भारत ने कहा- चीन से उम्मीद है कि कम्पलीट डिसएंगेजमेंट के लिए वह हमारे साथ मिलकर ईमानदारी से काम करेगाDainik Bhaskar


भारत ने शुक्रवार को कहा कि उसे उम्मीद है कि चीन एक्चुअल लाइन ऑफ कंट्रोल (एलएसी) पर कम्पलीट डिसएंगजमेंट और डी-एस्केलेशन के उद्देश्य से हमारे साथ मिलकर काम करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि बॉर्डर एरिया में पूर्ण रूप से शांति बहाली के लिए दोनों पक्षों द्वारा सहमति जताना जरूरी है। ताकि दोनों देशों के आगे भी द्विपक्षीय संबंध मजबूत बने रहे।

श्रीवास्तव ने ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि जैसा कि विदेश मंत्री (एस. जयशंकर) ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि सीमा के हालात और हमारे संबंधों के भविष्य को अलग नहीं किया जा सकता है। भारत और चीन ने पिछले कुछ हफ्तों में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में डिसएंगजमेंट के लिए कई बार डिप्लोमेटिक और सैन्य स्तर पर मीटिंग की।

डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो

श्रीवास्तव ने कहा- हम चाहते हैं कि डिस-एंगेजमेंट की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो। इसके लिए हमें यह ध्यान रखने की जरूरत है कि सहमति दोनों तरफ से हो। इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि चीन ईमानदारी से इसके लिए हमारे साथ काम करेगा। जिससे सीमा क्षेत्रों में पूर्ण रूप से शांति बहाली, डी-एस्केलेशन और डिसएंगजमेंट का उद्देश्य पूरा हो सके।

श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी द्वारा 5 जुलाई को फोन पर हुई बातचीत का बी जिक्र किया। इस दौरान दोनों प्रतिनिधियों के बीच एलएसी पर सैनिकों के कम्पलीट डिसएंगेजमेंट को लेकर फैसले किए गए थे। सीमा वार्ता के लिए डोभाल और वांग स्पेशल रिप्रजेंटेटिव हैं।

डोभाल-वांग वार्ता के अगले दिन डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू

डोभाल-वांग वार्ता के एक दिन बाद 6 जुलाई को औपचारिक तौर पर सैनिकों की डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों के बीच जो सहमति बनी थी उसे पूरी तरह से लागू किया जाना जरूरी है। तभी पूर्ण रूप से शांति स्थापित हो सकती है। इन्हें पूरा करना एक जटिल प्रक्रिया है। इसमें सेनाओं को अपने सामान्य पोस्ट पर तैनात करने की जरूरत है। दोनों पक्षों की सहमति के बाद ही इसे किया जा सकता है।

सैन्य सूत्रों के अनुसार, चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) गलवान घाटी और कुछ अन्य संघर्ष वाले जगहों से पीछे हटी है। लेकिन पैंगोंग त्सो, गोगरा और देपसांग में फिंगर क्षेत्रों से अपने सैनिकों की वापसी नहीं की है।

आगे भी दोनों देशों के बीच बैठक हो सकती है

भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि चीन को अपनी सेनाओं को फिंगर फोर और आठ के बीच के क्षेत्रों से हटाना होगा। सैन्य और कूटनीतिक वार्ता का जिक्र करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि आने वाले समय में और बैठकें होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि दोनों देश बॉर्डर एरिया से डिप्लोमेटिक और मिलिट्री चैनल्स के जरिए कम्पलीट डिसएंगेजमेंट में लगे हुए हैं।

गलवान में हुई थी खूनी झड़प

भारत-चीन के बीच 15 जून को गलवान में हुई झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। चीन के भी 40 सैनिक मारे गए, लेकिन उसने यह कबूला नहीं।

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पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में सैनिकों के डिसएंगजमेंट के लिए कई बार डिप्लोमेटिक और सैन्य स्तर पर बातचीत हुई है। -फाइल फोटो

भारत ने शुक्रवार को कहा कि उसे उम्मीद है कि चीन एक्चुअल लाइन ऑफ कंट्रोल (एलएसी) पर कम्पलीट डिसएंगजमेंट और डी-एस्केलेशन के उद्देश्य से हमारे साथ मिलकर काम करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि बॉर्डर एरिया में पूर्ण रूप से शांति बहाली के लिए दोनों पक्षों द्वारा सहमति जताना जरूरी है। ताकि दोनों देशों के आगे भी द्विपक्षीय संबंध मजबूत बने रहे। श्रीवास्तव ने ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि जैसा कि विदेश मंत्री (एस. जयशंकर) ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि सीमा के हालात और हमारे संबंधों के भविष्य को अलग नहीं किया जा सकता है। भारत और चीन ने पिछले कुछ हफ्तों में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में डिसएंगजमेंट के लिए कई बार डिप्लोमेटिक और सैन्य स्तर पर मीटिंग की। डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो श्रीवास्तव ने कहा- हम चाहते हैं कि डिस-एंगेजमेंट की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो। इसके लिए हमें यह ध्यान रखने की जरूरत है कि सहमति दोनों तरफ से हो। इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि चीन ईमानदारी से इसके लिए हमारे साथ काम करेगा। जिससे सीमा क्षेत्रों में पूर्ण रूप से शांति बहाली, डी-एस्केलेशन और डिसएंगजमेंट का उद्देश्य पूरा हो सके। श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी द्वारा 5 जुलाई को फोन पर हुई बातचीत का बी जिक्र किया। इस दौरान दोनों प्रतिनिधियों के बीच एलएसी पर सैनिकों के कम्पलीट डिसएंगेजमेंट को लेकर फैसले किए गए थे। सीमा वार्ता के लिए डोभाल और वांग स्पेशल रिप्रजेंटेटिव हैं। डोभाल-वांग वार्ता के अगले दिन डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू डोभाल-वांग वार्ता के एक दिन बाद 6 जुलाई को औपचारिक तौर पर सैनिकों की डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों के बीच जो सहमति बनी थी उसे पूरी तरह से लागू किया जाना जरूरी है। तभी पूर्ण रूप से शांति स्थापित हो सकती है। इन्हें पूरा करना एक जटिल प्रक्रिया है। इसमें सेनाओं को अपने सामान्य पोस्ट पर तैनात करने की जरूरत है। दोनों पक्षों की सहमति के बाद ही इसे किया जा सकता है। सैन्य सूत्रों के अनुसार, चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) गलवान घाटी और कुछ अन्य संघर्ष वाले जगहों से पीछे हटी है। लेकिन पैंगोंग त्सो, गोगरा और देपसांग में फिंगर क्षेत्रों से अपने सैनिकों की वापसी नहीं की है। आगे भी दोनों देशों के बीच बैठक हो सकती है भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि चीन को अपनी सेनाओं को फिंगर फोर और आठ के बीच के क्षेत्रों से हटाना होगा। सैन्य और कूटनीतिक वार्ता का जिक्र करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि आने वाले समय में और बैठकें होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि दोनों देश बॉर्डर एरिया से डिप्लोमेटिक और मिलिट्री चैनल्स के जरिए कम्पलीट डिसएंगेजमेंट में लगे हुए हैं। गलवान में हुई थी खूनी झड़प भारत-चीन के बीच 15 जून को गलवान में हुई झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। चीन के भी 40 सैनिक मारे गए, लेकिन उसने यह कबूला नहीं। ये भी पढ़े लद्दाख में आईटीबीपी का शौर्य:मई-जून में 6 बार ईस्टर्न लद्दाख में चीन का मुकाबला करनेवाले आईटीबीपी के 21 जवानों को गैलेंट्री मेडल डोभाल से चर्चा के बाद झुका चीन?:मोदी के लद्दाख दौरे के 48 घंटे बाद डोभाल और चीनी विदेश मंत्री के बीच 2 घंटे वीडियो कॉल हुआ, चीन की सेना सीमा से पीछे हटी आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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