तीन साल में ट्रेसपासिंग और दूसरी घटनाओं में 29 से 30 हजार लोगों ने जान गंवाई, ट्रेन दुर्घटना से एक भी मौत नहींDainik Bhaskar


रेलवे ने गुरुवार को कहा कि पिछले तीन सालों में ट्रेसपासिंग और दूसरी घटनाओं में 29 हजार से लेकर 30 हजार लोगों की मौत हुई है। रेलवे ने यह आंकड़े नीति आयोग के सवाल पर दिए हैं। रेलवे ने पिछले वित्त वर्ष में दुर्घटना में किसी की भी मौत न होने का दावा किया था। नीति आयोग ने इसपर सवाल उठाए थे।

ट्रेसपासिंग उन घटनाओं को कहा जाता है जैसे- जब कोई अचानक से ट्रैक पर आ जाए या फिर ट्रेन से लटकने और गेट पर बैठने से हादसा हो जाए।

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने रेलवे के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि हर साल केवल मुंबई उपनगरीय खंड में हजारों से ज्यादा की जान जाती है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने इसे बाद स्पष्टीकरण दिया है।

अमिताभ कांत ने लिखा था लेटर

अमिताभ कांत ने वीके यादव को एक लेटर भी लिखा था। इसमें उन्होंने कहा, “मैं इस फैक्ट की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि कई लोगों की मौत प्लेटफार्म से ट्रैक पर गिरने से होती है। इसलिए, इन्हें आरआरएसके (राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष) के दायरे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। इन मौतों को आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाना चाहिए।”

2019 से अब तक रेलवे की गलती से एक भी मौत नहीं

गुरुवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि रेलवे सभी मौतों का रिकॉर्ड रखती है। घटनाओं को तीन दायरे में रखा जाता है। इसमें एक रेलवे की तरफ से होने वाली दुर्घटना, दूसरी ट्रेसपासिंग और तीसरी अप्रिय घटनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि 2019 से लेकर 2020 में अब तक दुर्घटनाएं बिल्कुल नहीं हुई हैं। हालांकि, पिछले तीन सालों में ट्रेसपासिंग और दूसरी घटनाओं की वजह से 29 हजार से 30 हजार लोगों की जान गई है। उन्होंने बताया कि यह डाटा नीति आयोग को दिया गया है।

ट्रेसपासिंग रोकने में रेलवे का कंट्रोल नहीं

चेयरमैन की ब्रीफिंग के बाद रेलवे ने एक बयान जारी कर कहा कि पिछले साल 8 अरब लोगों ने ट्रेन से यात्रा की। लेकिन, दुर्घटनाओं में किसी की भी मौत नहीं हुई। रेलवे की तमाम कोशिशों के चलते इसे पाया गया है। बाकी ट्रेसपासिंग और दूसरी घटनाओं को रोकने में रेलवे का बहुत ज्यादा कंट्रोल नहीं है।

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रेलवे ने कहा है कि ट्रेसपासिंग और दूसरी घटनाओं को रोकने में हमारे पास बहुत ज्यादा कंट्रोल नहीं रहता है।- प्रतीकात्मक फोटो 

रेलवे ने गुरुवार को कहा कि पिछले तीन सालों में ट्रेसपासिंग और दूसरी घटनाओं में 29 हजार से लेकर 30 हजार लोगों की मौत हुई है। रेलवे ने यह आंकड़े नीति आयोग के सवाल पर दिए हैं। रेलवे ने पिछले वित्त वर्ष में दुर्घटना में किसी की भी मौत न होने का दावा किया था। नीति आयोग ने इसपर सवाल उठाए थे। ट्रेसपासिंग उन घटनाओं को कहा जाता है जैसे- जब कोई अचानक से ट्रैक पर आ जाए या फिर ट्रेन से लटकने और गेट पर बैठने से हादसा हो जाए। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने रेलवे के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि हर साल केवल मुंबई उपनगरीय खंड में हजारों से ज्यादा की जान जाती है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने इसे बाद स्पष्टीकरण दिया है। अमिताभ कांत ने लिखा था लेटर अमिताभ कांत ने वीके यादव को एक लेटर भी लिखा था। इसमें उन्होंने कहा, “मैं इस फैक्ट की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि कई लोगों की मौत प्लेटफार्म से ट्रैक पर गिरने से होती है। इसलिए, इन्हें आरआरएसके (राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष) के दायरे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। इन मौतों को आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाना चाहिए।” 2019 से अब तक रेलवे की गलती से एक भी मौत नहीं गुरुवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि रेलवे सभी मौतों का रिकॉर्ड रखती है। घटनाओं को तीन दायरे में रखा जाता है। इसमें एक रेलवे की तरफ से होने वाली दुर्घटना, दूसरी ट्रेसपासिंग और तीसरी अप्रिय घटनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि 2019 से लेकर 2020 में अब तक दुर्घटनाएं बिल्कुल नहीं हुई हैं। हालांकि, पिछले तीन सालों में ट्रेसपासिंग और दूसरी घटनाओं की वजह से 29 हजार से 30 हजार लोगों की जान गई है। उन्होंने बताया कि यह डाटा नीति आयोग को दिया गया है। ट्रेसपासिंग रोकने में रेलवे का कंट्रोल नहीं चेयरमैन की ब्रीफिंग के बाद रेलवे ने एक बयान जारी कर कहा कि पिछले साल 8 अरब लोगों ने ट्रेन से यात्रा की। लेकिन, दुर्घटनाओं में किसी की भी मौत नहीं हुई। रेलवे की तमाम कोशिशों के चलते इसे पाया गया है। बाकी ट्रेसपासिंग और दूसरी घटनाओं को रोकने में रेलवे का बहुत ज्यादा कंट्रोल नहीं है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

रेलवे ने कहा है कि ट्रेसपासिंग और दूसरी घटनाओं को रोकने में हमारे पास बहुत ज्यादा कंट्रोल नहीं रहता है।- प्रतीकात्मक फोटो Read More

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