स्मार्टफोन से आपकी लोकेशन को कंपनियां बेच रही हैं, हैकर कर रहे फॉलो; जानिए आप कैसे होते हैं ट्रैकDainik Bhaskar


जेनिफर वेलेंटीनी-डिव्रीज. कोरोनावायरस किस तरह से लोगों के व्यवहार को प्रभावित कर रहा है? यह जानने के लिए शोधकर्ता और पत्रकार स्मार्टफोन से मिलने वाली लोकेशन की जानकारी पर निर्भर हैं। इस तरह का डाटा लाखों लोगों के मूवमेंट की जानकारी देता है, लेकिन इसका असर निजता पर भी पड़ता है। दुनियाभर में करोड़ों लोग स्मार्टफोन ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं और लोकेशन ट्रैक करने की अनुमति देते हैं।

इस तरह के डाटा से क्या खतरा होता है?

  • इस डाटा में नाम, फोन नंबर्स और दूसरी पहचान से जुड़ी जानकारी नहीं होती हैं, लेकिन अज्ञात लोकेशन की जानकारी भी कई खुलासे कर सकती है। द टाइम्स ने बिना अधिकार के काम करने वाले डाटा की जांच की। इस तरह का डाटा आपके लगातार डॉक्टर के पास ट्रिप्स या किसी के साथ लगातार बाहर घूमने की निजी जानकारी बता सकता है।
  • सच यह है कि कंपनियां तमाम जोखिमों के बाद भी लोकेशन की जानकारी एकत्र कर बेच रही हैं। रॉ लोकेशन डाटा तक पहुंच रखने वाले हैकर्स और लोग किसी व्यक्तिक की मर्जी के बिना फॉलो कर सकते हैं। अलग-अलग कंपनियां इस तरह के लोकेशन डाटा को संभालने के लिए कई तरीके अपना रही हैं। इनमें निजी कारणों से डाटा का बड़ा हिस्सा डिलीट करना या बिना किसी सुरक्षा के रॉ डाटा बेचना शामिल है। एक व्यक्ति के लोकेशन डाटा का इस्तेमाल मार्केटिंग और कानून के लिए किया जाता है।

इस डाटा का फायदा क्या है?

  • स्मार्टफोन से मिलने वाला डाटा का कई चीजों के लिए उपयोग किया जाता है। खासतौर से प्रचार के लिए। उदाहरण के लिए- कंपनियां जिम में ज्यादा वक्त गुजारने वाले लोगों को स्नीकर्स के एडवरटाइजमेंट दिखा सकती हैं। एप्पल और गूगल जैसी कंपनियां इस जानकारी का इस्तेमाल मैपिंग और ट्रैफिक मॉनिटर करने के लिए करती हैं।
  • डाटा बेचने वाली एप्स बनाने वाले मेकर्स कहते हैं कि इससे वे यूजर्स को बिना पैसा लिए सेवाएं दे पाते हैं। कोरोनावायरस महामारी के दौरान लोकेशन की जानकारी से सोशल डिस्टेंसिंग और ट्रैवलिंग का पता चला।

मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा डाटा लिया जा रहा है या नहीं?

  • लोगों को इस बात का पता करना मुश्किल होता है कि उनका डाटा कैसे जुटाया जा रहा है। एंड्रॉयड आधारित डिवाइस और आईफोन डाटा कलेक्ट करने से पहले यूजर से अनुमति मांगते हैं। हालांकि अनुमति देने पर प्रोत्साहित किए जाने वाली बातें कई बार भ्रामक होती हैं।
  • एक ऐप यूजर से यह तो कह सकती है कि लोकेशन की जानकारी देने पर आपको मौसम की जानकारी मिलेगी पर यह नहीं बताती कि इस डाटा को बेचा जाएगा। इस तरह की जानकारी अधिकतर लंबी लिखी हुई प्राइवेसी पॉलिसी में दब जाती हैं।
  • क्यूबिक (मार्केटर्स और एडवरटाइजर्स के लिए डाटा एनेलाइज करने वाली कंपनी) को डाटा सेट के लिए जानकारी देने वाली पांच ऐप्स को टेस्ट किया गया। इन ऐप्स के डिसक्लोजर में यह बताया गया था कि डाटा को एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग के लिए शेयर किया जाएगा। इसके अलावा यूजर्स को शेयरिंग की जानकारी तक भी पहुंचाया गया था, लेकिन कुछ ऐप्स ने दूसरों के मुकाबले डाटा कलेक्शन को रोकना आसान कर दिया था।
  • बीते साल न्यूयॉर्क टाइम्स ओपीनियन जर्नलिस्ट ने एक एप का टेस्ट किया तो पाया कि लोकेशन की अनुमति मांगने पर शुरुआत में यह कहीं भी नहीं बताया गया कि जानकारी का उपयोग कैसे किया जायगा। जबकि बाद में ऐप ने यह जानकारी बदल दी। इसके अलावा डिसक्लोजर के बाद भी यूजर्स को यह साफ नहीं है कि कितनी बार एक यूजर की जानकारी कलेक्ट की जाती है और यह क्या दिखाती है। यूरोप और कैलिफोर्निया में यूजर्स अपना डाटा की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों के हिसाब से पॉलिसी अलग-अलग होती हैं।
  • आप क्यूबिक से अपना डाटा मांग सकते हैं और डिलीट करने के लिए भी कह सकते हैं। क्यूबिक आपके डाटा को फोन की कथित एडवर्टाइजिंग आईडी से जोड़ता है। इस आईडी का उपयोग मार्केटर्स करते हैं। किसी और की आईडी के डाटा को बचाने के लिए कंपनी आपको ऐप डाउनलोड कर नंबर वेरिफाई कराने के लिए कहती है। आप ऐप को बाद में डिलीट भी कर सकते हैं और यह एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है।

अगर मुझे जानकारी नहीं देना हो तो?

  • अगर आप चाहते हैं कि क्यूबिक आपका डाटा कलेक्ट न करे तो इसका सबसे आसान उपाय फोन की एडवर्टाइजिंग आईडी को डी एक्टिवेट करना है। अगर आप इसे डिसेबल कर देंगे तो क्यूबिक आपकी डिवाइस का डाटा कलेक्ट नहीं कर पाएगी। इसके अलावा क्यूबिक में लोकेशन की जानकारी बंद करने के कई तरीके हैं।
  • हालांकि, क्यूबिक डाटाबेस से लोकेशन ऑप्शन बंद कर देना डाटा कलेक्शन से नहीं बचाता है। दूसरी कंपनियां आपकी लोकेशन की जानकारी कलेक्ट कर सकती हैं। कुछ कंपनियां क्यूबिक की तरह ही ऑप्शन देती हैं, लेकिन सभी नहीं।
  • अगर आप लोकेशन की जानकारी देने से बचना चाहते हैं तो इसका सबसे अच्छा तरीका है उन ऐप्स की पहचान करना जो जरूरत से ज्यादा कलेक्ट कर रही हैं। जितना हो सके उतनी ऐप्स को डाटा एक्सेस करने से रोक दें और इन्हें तभी अनुमति दें जब आप ऐप का उपयोग कर रहे हों।

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दुनियाभर में करोड़ों लोग स्मार्टफोन ऐप्स के जरिए रोज अपनी लोकेशन शेयर कर रहे हैं। यह डाटा एडवरटाइजर्स और दूसरी कंपनियों के साथ शेयर किया जाता है।

जेनिफर वेलेंटीनी-डिव्रीज. कोरोनावायरस किस तरह से लोगों के व्यवहार को प्रभावित कर रहा है? यह जानने के लिए शोधकर्ता और पत्रकार स्मार्टफोन से मिलने वाली लोकेशन की जानकारी पर निर्भर हैं। इस तरह का डाटा लाखों लोगों के मूवमेंट की जानकारी देता है, लेकिन इसका असर निजता पर भी पड़ता है। दुनियाभर में करोड़ों लोग स्मार्टफोन ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं और लोकेशन ट्रैक करने की अनुमति देते हैं। इस तरह के डाटा से क्या खतरा होता है? इस डाटा में नाम, फोन नंबर्स और दूसरी पहचान से जुड़ी जानकारी नहीं होती हैं, लेकिन अज्ञात लोकेशन की जानकारी भी कई खुलासे कर सकती है। द टाइम्स ने बिना अधिकार के काम करने वाले डाटा की जांच की। इस तरह का डाटा आपके लगातार डॉक्टर के पास ट्रिप्स या किसी के साथ लगातार बाहर घूमने की निजी जानकारी बता सकता है।सच यह है कि कंपनियां तमाम जोखिमों के बाद भी लोकेशन की जानकारी एकत्र कर बेच रही हैं। रॉ लोकेशन डाटा तक पहुंच रखने वाले हैकर्स और लोग किसी व्यक्तिक की मर्जी के बिना फॉलो कर सकते हैं। अलग-अलग कंपनियां इस तरह के लोकेशन डाटा को संभालने के लिए कई तरीके अपना रही हैं। इनमें निजी कारणों से डाटा का बड़ा हिस्सा डिलीट करना या बिना किसी सुरक्षा के रॉ डाटा बेचना शामिल है। एक व्यक्ति के लोकेशन डाटा का इस्तेमाल मार्केटिंग और कानून के लिए किया जाता है। इस डाटा का फायदा क्या है? स्मार्टफोन से मिलने वाला डाटा का कई चीजों के लिए उपयोग किया जाता है। खासतौर से प्रचार के लिए। उदाहरण के लिए- कंपनियां जिम में ज्यादा वक्त गुजारने वाले लोगों को स्नीकर्स के एडवरटाइजमेंट दिखा सकती हैं। एप्पल और गूगल जैसी कंपनियां इस जानकारी का इस्तेमाल मैपिंग और ट्रैफिक मॉनिटर करने के लिए करती हैं।डाटा बेचने वाली एप्स बनाने वाले मेकर्स कहते हैं कि इससे वे यूजर्स को बिना पैसा लिए सेवाएं दे पाते हैं। कोरोनावायरस महामारी के दौरान लोकेशन की जानकारी से सोशल डिस्टेंसिंग और ट्रैवलिंग का पता चला। मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा डाटा लिया जा रहा है या नहीं? लोगों को इस बात का पता करना मुश्किल होता है कि उनका डाटा कैसे जुटाया जा रहा है। एंड्रॉयड आधारित डिवाइस और आईफोन डाटा कलेक्ट करने से पहले यूजर से अनुमति मांगते हैं। हालांकि अनुमति देने पर प्रोत्साहित किए जाने वाली बातें कई बार भ्रामक होती हैं।एक ऐप यूजर से यह तो कह सकती है कि लोकेशन की जानकारी देने पर आपको मौसम की जानकारी मिलेगी पर यह नहीं बताती कि इस डाटा को बेचा जाएगा। इस तरह की जानकारी अधिकतर लंबी लिखी हुई प्राइवेसी पॉलिसी में दब जाती हैं।क्यूबिक (मार्केटर्स और एडवरटाइजर्स के लिए डाटा एनेलाइज करने वाली कंपनी) को डाटा सेट के लिए जानकारी देने वाली पांच ऐप्स को टेस्ट किया गया। इन ऐप्स के डिसक्लोजर में यह बताया गया था कि डाटा को एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग के लिए शेयर किया जाएगा। इसके अलावा यूजर्स को शेयरिंग की जानकारी तक भी पहुंचाया गया था, लेकिन कुछ ऐप्स ने दूसरों के मुकाबले डाटा कलेक्शन को रोकना आसान कर दिया था।बीते साल न्यूयॉर्क टाइम्स ओपीनियन जर्नलिस्ट ने एक एप का टेस्ट किया तो पाया कि लोकेशन की अनुमति मांगने पर शुरुआत में यह कहीं भी नहीं बताया गया कि जानकारी का उपयोग कैसे किया जायगा। जबकि बाद में ऐप ने यह जानकारी बदल दी। इसके अलावा डिसक्लोजर के बाद भी यूजर्स को यह साफ नहीं है कि कितनी बार एक यूजर की जानकारी कलेक्ट की जाती है और यह क्या दिखाती है। यूरोप और कैलिफोर्निया में यूजर्स अपना डाटा की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों के हिसाब से पॉलिसी अलग-अलग होती हैं।आप क्यूबिक से अपना डाटा मांग सकते हैं और डिलीट करने के लिए भी कह सकते हैं। क्यूबिक आपके डाटा को फोन की कथित एडवर्टाइजिंग आईडी से जोड़ता है। इस आईडी का उपयोग मार्केटर्स करते हैं। किसी और की आईडी के डाटा को बचाने के लिए कंपनी आपको ऐप डाउनलोड कर नंबर वेरिफाई कराने के लिए कहती है। आप ऐप को बाद में डिलीट भी कर सकते हैं और यह एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है। अगर मुझे जानकारी नहीं देना हो तो? अगर आप चाहते हैं कि क्यूबिक आपका डाटा कलेक्ट न करे तो इसका सबसे आसान उपाय फोन की एडवर्टाइजिंग आईडी को डी एक्टिवेट करना है। अगर आप इसे डिसेबल कर देंगे तो क्यूबिक आपकी डिवाइस का डाटा कलेक्ट नहीं कर पाएगी। इसके अलावा क्यूबिक में लोकेशन की जानकारी बंद करने के कई तरीके हैं।हालांकि, क्यूबिक डाटाबेस से लोकेशन ऑप्शन बंद कर देना डाटा कलेक्शन से नहीं बचाता है। दूसरी कंपनियां आपकी लोकेशन की जानकारी कलेक्ट कर सकती हैं। कुछ कंपनियां क्यूबिक की तरह ही ऑप्शन देती हैं, लेकिन सभी नहीं।अगर आप लोकेशन की जानकारी देने से बचना चाहते हैं तो इसका सबसे अच्छा तरीका है उन ऐप्स की पहचान करना जो जरूरत से ज्यादा कलेक्ट कर रही हैं। जितना हो सके उतनी ऐप्स को डाटा एक्सेस करने से रोक दें और इन्हें तभी अनुमति दें जब आप ऐप का उपयोग कर रहे हों। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

दुनियाभर में करोड़ों लोग स्मार्टफोन ऐप्स के जरिए रोज अपनी लोकेशन शेयर कर रहे हैं। यह डाटा एडवरटाइजर्स और दूसरी कंपनियों के साथ शेयर किया जाता है।Read More

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