कोरोना काल में ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं ब्रांड; पिछले एक साल में बनाई गई वेबसाइट पर खरीदारी 88% बढ़ी, ब्यूटी प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन सेल में भी इजाफाDainik Bhaskar


कोरोनावायरस महामारी के कारण ज्यादातर ग्राहकों का रुझान ऑनलाइन खरीदारी की ओर बढ़ा है। Saas कंपनी यूनिकॉमर्स की ई-कॉमर्स ट्रेंड्स 2020 रिपोर्ट में बताया गया है कि कोविड-19 के कारण ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं। इस कारण कंपनियों की ज्यादा बिक्री ऑनलाइन हो रही है। खासकर उन कंपनियों की बिक्री में ज्यादा तेजी देखी गई है, जिन्होंने हाल में ही अपनी वेबसाइट लॉन्च की हैं।

इस सेगमेंट्स में सुधार हुआ

रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-कॉमर्स के नए दौर में ग्राहकों का व्यवहार किस तरह बदल रहा है और इंडस्ट्री से इस नए दौर को कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसके अलावा, रिपोर्ट कोविड-19 के बाद कई सेगमेंट्स में ई-कॉमर्स में शुरूआती सुधार की बात बताती है। साथ ही रिपोर्ट में ई-कॉमर्स से जुड़े विभिन्न पहलुओं जैसे कि रिटर्न, शिपिंग, ब्रांड, वेबसाइट डेवलपमेंट और तकनीक को अपनाए जाने पर पड़े प्रभाव को भी बताया गया है।

रिपोर्ट की मुख्य बातें

  • ई-कॉमर्स पर लॉकडाउन से पहले की तुलना में ज्यादा बिक्री हुई। जून 2020 के बाद से ऑर्डर में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ग्राहकों के खरीदने का तरीका और पसंद बदल गया है। हेल्थ एण्ड फार्मा, एफएमसीजी और कृषि जैसे सेगमेंट में मांग बढ़ी है।
  • पहली बार ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले खरीदारों की संख्या भी बढ़ी है।
  • कोविड-19 के बाद ई-कॉमर्स फिर से शुरू होने के बाद रिटर्न रेट में 30 फीसदी तक गिरावट आई है। नए सुरक्षा नियमों, जरूरी उत्पादों की बढ़ी हुई मांग के कारण ऐसा हो सकता है, क्योंकि जरूरी उत्पादों को आमतौर पर रिटर्न नहीं किया जा सकता। यह देखना रोचक होगा कि क्या लंबे समय तक रिटर्न रेट में यह कमी जारी रहती है।
  • पहले की तुलना में अधिक संख्या में ग्राहक सीधे ब्रांड की वेबसाइट से खरीदारी कर रहे हैं। रिटेल ब्रांड अब अपनी ऑनलाइन क्षमता बढ़ा रहे हैं और ग्राहकों के साथ जुड़ने के लिए नई स्ट्रेटजी अपना रहे हैं।
  • पिछले एक साल में अपनी वेबसाइट बनाने वाले ब्रांड्स ने 65 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की है। उनकी वेबसाइट से शिप किए जाने वाले ऑर्डर की संख्या बढ़ी है।

सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ रहे हैं ब्रांड

  • भारत में ई-कॉमर्स सिस्टम बेहतर हो रहा है। बड़ी संख्या में ब्रांड सीधे ग्राहकों के साथ जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए जहां एक ओर ब्रांड्स ने अपनी खुद की वेबसाइट्स बनाई हैं, वहीं दूसरी ओर ब्रांड मार्केटप्लेस पर भी संचालन जारी रखे हुए हैं। यहां आज भी ज़्यादा संख्या में ऑर्डर मिल रहे हैं।
  • मार्केटप्लेस की तुलना में सीधे ब्रांड की वेबसाइट से खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ब्रांड वेबसाइट्स ने ऑर्डर की मात्रा में 88 फीसदी वृद्धि दर्ज की है, जबकि मार्केटप्लेस पर ऑर्डर में 32 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • टॉप पायदान के 3 सेगमेंट जहां डी2सी ब्रांड की पहुंच बढ़ी है। वो ब्यूटी एण्ड वैलनेस, फैशन एण्ड एक्सेसरीज और एफएमसीजी एवं कृषि क्षेत्र हैं।

कोविड से पहले भारत में ई-कॉमर्स का सालाना विकास

  • भारत का ई-कॉमर्स सेक्टर लगातार बढ़त दर्ज कर रहा है। ई-कॉमर्स पर ऑर्डर 20% बढ़े हैं, जबकि जीएमवी ने औसत 1100 रुपए के ऑर्डर साइज के साथ 23% बढ़ोतरी दर्ज की है।

  • ब्यूटी एण्ड वैलनेस ऐसा सेक्टर है, जहां ऑर्डर में 130% बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद एफएमसीजी और कृषि तथा हेल्थ एवं फार्मा में क्रमशः 55 फीसदी और 38 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है।

भारत के दूरदराज के इलाकों से बढ़ रही है मांग

  • सभी ई-कॉमर्स कंपनियां आज महानगरों के दायरे से बाहर जाकर छोटे शहरों पर ध्यान केन्द्रित कर रही हैं। वर्तमान में देश में दूसरे स्तर के एवं इसके बाद के शहर कुल ऑनलाइन मांग में तकरीबन 66 फीसदी का योगदान देते हैं और आने वाले समय में यह आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है।
  • तीसरे स्तर एवं इसके बाद के शहरों में 53 फीसदी विकास दर्ज किया गया है, जो सबसे तेजी से विकसित होता सेक्टर है। पाया गया है कि तीसरे स्तर के शहरों में शीर्ष पायदान के 5 शहरों ने 22 फीसदी का योगदान दिया है, जबकि महानगरों की बात करें तो शीर्ष पायदान के पांच शहरों का योगदान 90 फीसदी है।
  • ई-कॉमर्स वाल्यूम की बात करें तो तीन राज्य दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र और कर्नाटक उपभोक्ताओं की कुल मांग का 65 फीसदी हिस्सा बनाते हैं।

रिटर्न आर्डर में गिरावट

  • रिटर्न का प्रबंधन किसी भी ई-कॉमर्स कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रिटर्न की कुल प्रतिशत (फाॅवर्ड डिस्पैच की प्रतिशतता के रूप में) में पिछले साल की तुलना में 13 फीसदी गिरावट आई है।
  • ई-कॉमर्स कंपनियों ने सीओडी रिटर्न में कमी लाने के लिए व्यापक निवेश किया है, क्योंकि ये कुल रिटर्न में सबसे ज़्यादा हिस्सा बनाते हैं। सीओडी ऑर्डर में रिटर्न की मात्रा 2019 में 27 फीसदी थी जो 2020 में कम हो कर 20 फीसदी हो गई है।
  • प्रीपेड ऑर्डर की बात करें तो रिटर्न की संख्या 2019 में 12 फीसदी थी जो 2020 में 11 फीसदी हो गई है। सीओडी रिटर्न में उल्लेखनीय गिरावट के बाद भी यह प्रीपेड ऑर्डर पर तकरीबन दोगुना है।
  • दूसरे स्तर और इसके बाद के शहरों में एक और रोचक रुझान पाया गया है, जहां कुल रिटर्न में 23 फीसदी कमी आई है। इस बदलाव का श्रेय टेक्नोलॉजी अडॉप्शन, बेहतर लास्ट माइल डिलीवरी तथा उपभोक्ता के लिए बनी रिटर्न नीतियों को दिया जा सकता है।

आने वाले समय में दुनिया भर में तेज़ी से विकसित होगा ई-कॉमर्स उद्योग

रिपोर्ट के बारे में बात करते हुए कपिल मखीजा, सीईओ, यूनिकाॅमर्स ने कहा कि दुनिया कोविड-19 के प्रभावों से जूझ रही है, इस बीच भारत के ई-काॅमर्स उद्योग को साल की शुरूआत से ही प्रोत्साहन मिला है। उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, खरीददारी के बदलते तरीकों, पहली बार ऑनलाइन खरीद करने वाले उपभोक्ताओं, रिटेलरों द्वारा डिजिटलीकरण, ब्रांड्स द्वारा डी2सी माॅडल्स को अपनाने जैसे पहलुओं को देखते हुए हमें विश्वास है कि ई-कॉमर्स आने वाले समय में दुनिया भर में तेजी से डेवलप होगा।

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रिपोर्ट कोविड-19 के बाद विभिन्न सेगमेंट्स में ई-कॉमर्स में शुरूआती सुधार की बात करती है।

कोरोनावायरस महामारी के कारण ज्यादातर ग्राहकों का रुझान ऑनलाइन खरीदारी की ओर बढ़ा है। Saas कंपनी यूनिकॉमर्स की ई-कॉमर्स ट्रेंड्स 2020 रिपोर्ट में बताया गया है कि कोविड-19 के कारण ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं। इस कारण कंपनियों की ज्यादा बिक्री ऑनलाइन हो रही है। खासकर उन कंपनियों की बिक्री में ज्यादा तेजी देखी गई है, जिन्होंने हाल में ही अपनी वेबसाइट लॉन्च की हैं। इस सेगमेंट्स में सुधार हुआ रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-कॉमर्स के नए दौर में ग्राहकों का व्यवहार किस तरह बदल रहा है और इंडस्ट्री से इस नए दौर को कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसके अलावा, रिपोर्ट कोविड-19 के बाद कई सेगमेंट्स में ई-कॉमर्स में शुरूआती सुधार की बात बताती है। साथ ही रिपोर्ट में ई-कॉमर्स से जुड़े विभिन्न पहलुओं जैसे कि रिटर्न, शिपिंग, ब्रांड, वेबसाइट डेवलपमेंट और तकनीक को अपनाए जाने पर पड़े प्रभाव को भी बताया गया है। रिपोर्ट की मुख्य बातें ई-कॉमर्स पर लॉकडाउन से पहले की तुलना में ज्यादा बिक्री हुई। जून 2020 के बाद से ऑर्डर में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ग्राहकों के खरीदने का तरीका और पसंद बदल गया है। हेल्थ एण्ड फार्मा, एफएमसीजी और कृषि जैसे सेगमेंट में मांग बढ़ी है।पहली बार ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले खरीदारों की संख्या भी बढ़ी है।कोविड-19 के बाद ई-कॉमर्स फिर से शुरू होने के बाद रिटर्न रेट में 30 फीसदी तक गिरावट आई है। नए सुरक्षा नियमों, जरूरी उत्पादों की बढ़ी हुई मांग के कारण ऐसा हो सकता है, क्योंकि जरूरी उत्पादों को आमतौर पर रिटर्न नहीं किया जा सकता। यह देखना रोचक होगा कि क्या लंबे समय तक रिटर्न रेट में यह कमी जारी रहती है।पहले की तुलना में अधिक संख्या में ग्राहक सीधे ब्रांड की वेबसाइट से खरीदारी कर रहे हैं। रिटेल ब्रांड अब अपनी ऑनलाइन क्षमता बढ़ा रहे हैं और ग्राहकों के साथ जुड़ने के लिए नई स्ट्रेटजी अपना रहे हैं।पिछले एक साल में अपनी वेबसाइट बनाने वाले ब्रांड्स ने 65 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की है। उनकी वेबसाइट से शिप किए जाने वाले ऑर्डर की संख्या बढ़ी है। सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ रहे हैं ब्रांड भारत में ई-कॉमर्स सिस्टम बेहतर हो रहा है। बड़ी संख्या में ब्रांड सीधे ग्राहकों के साथ जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए जहां एक ओर ब्रांड्स ने अपनी खुद की वेबसाइट्स बनाई हैं, वहीं दूसरी ओर ब्रांड मार्केटप्लेस पर भी संचालन जारी रखे हुए हैं। यहां आज भी ज़्यादा संख्या में ऑर्डर मिल रहे हैं।मार्केटप्लेस की तुलना में सीधे ब्रांड की वेबसाइट से खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ब्रांड वेबसाइट्स ने ऑर्डर की मात्रा में 88 फीसदी वृद्धि दर्ज की है, जबकि मार्केटप्लेस पर ऑर्डर में 32 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।टॉप पायदान के 3 सेगमेंट जहां डी2सी ब्रांड की पहुंच बढ़ी है। वो ब्यूटी एण्ड वैलनेस, फैशन एण्ड एक्सेसरीज और एफएमसीजी एवं कृषि क्षेत्र हैं। कोविड से पहले भारत में ई-कॉमर्स का सालाना विकास भारत का ई-कॉमर्स सेक्टर लगातार बढ़त दर्ज कर रहा है। ई-कॉमर्स पर ऑर्डर 20% बढ़े हैं, जबकि जीएमवी ने औसत 1100 रुपए के ऑर्डर साइज के साथ 23% बढ़ोतरी दर्ज की है। ब्यूटी एण्ड वैलनेस ऐसा सेक्टर है, जहां ऑर्डर में 130% बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद एफएमसीजी और कृषि तथा हेल्थ एवं फार्मा में क्रमशः 55 फीसदी और 38 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है। भारत के दूरदराज के इलाकों से बढ़ रही है मांग सभी ई-कॉमर्स कंपनियां आज महानगरों के दायरे से बाहर जाकर छोटे शहरों पर ध्यान केन्द्रित कर रही हैं। वर्तमान में देश में दूसरे स्तर के एवं इसके बाद के शहर कुल ऑनलाइन मांग में तकरीबन 66 फीसदी का योगदान देते हैं और आने वाले समय में यह आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है।तीसरे स्तर एवं इसके बाद के शहरों में 53 फीसदी विकास दर्ज किया गया है, जो सबसे तेजी से विकसित होता सेक्टर है। पाया गया है कि तीसरे स्तर के शहरों में शीर्ष पायदान के 5 शहरों ने 22 फीसदी का योगदान दिया है, जबकि महानगरों की बात करें तो शीर्ष पायदान के पांच शहरों का योगदान 90 फीसदी है।ई-कॉमर्स वाल्यूम की बात करें तो तीन राज्य दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र और कर्नाटक उपभोक्ताओं की कुल मांग का 65 फीसदी हिस्सा बनाते हैं। रिटर्न आर्डर में गिरावट रिटर्न का प्रबंधन किसी भी ई-कॉमर्स कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रिटर्न की कुल प्रतिशत (फाॅवर्ड डिस्पैच की प्रतिशतता के रूप में) में पिछले साल की तुलना में 13 फीसदी गिरावट आई है।ई-कॉमर्स कंपनियों ने सीओडी रिटर्न में कमी लाने के लिए व्यापक निवेश किया है, क्योंकि ये कुल रिटर्न में सबसे ज़्यादा हिस्सा बनाते हैं। सीओडी ऑर्डर में रिटर्न की मात्रा 2019 में 27 फीसदी थी जो 2020 में कम हो कर 20 फीसदी हो गई है।प्रीपेड ऑर्डर की बात करें तो रिटर्न की संख्या 2019 में 12 फीसदी थी जो 2020 में 11 फीसदी हो गई है। सीओडी रिटर्न में उल्लेखनीय गिरावट के बाद भी यह प्रीपेड ऑर्डर पर तकरीबन दोगुना है।दूसरे स्तर और इसके बाद के शहरों में एक और रोचक रुझान पाया गया है, जहां कुल रिटर्न में 23 फीसदी कमी आई है। इस बदलाव का श्रेय टेक्नोलॉजी अडॉप्शन, बेहतर लास्ट माइल डिलीवरी तथा उपभोक्ता के लिए बनी रिटर्न नीतियों को दिया जा सकता है। आने वाले समय में दुनिया भर में तेज़ी से विकसित होगा ई-कॉमर्स उद्योग रिपोर्ट के बारे में बात करते हुए कपिल मखीजा, सीईओ, यूनिकाॅमर्स ने कहा कि दुनिया कोविड-19 के प्रभावों से जूझ रही है, इस बीच भारत के ई-काॅमर्स उद्योग को साल की शुरूआत से ही प्रोत्साहन मिला है। उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, खरीददारी के बदलते तरीकों, पहली बार ऑनलाइन खरीद करने वाले उपभोक्ताओं, रिटेलरों द्वारा डिजिटलीकरण, ब्रांड्स द्वारा डी2सी माॅडल्स को अपनाने जैसे पहलुओं को देखते हुए हमें विश्वास है कि ई-कॉमर्स आने वाले समय में दुनिया भर में तेजी से डेवलप होगा। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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