चीन सीमा विवाद के समाधान को लेकर गंभीर नहीं; भारत ने कहा- तनाव खत्म करने के लिए पूर्वी लद्दाख में पहले जैसी स्थिति बहाल होDainik Bhaskar


चीनी सेना पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। चीन के साथ जारी मिलिट्री वार्ता में गतिरोध की स्थिति हो गई है। क्योंकि भारतीय सेना इस बात के लिए जोर दे रही है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को अप्रैल की स्थिति बहाल करनी चाहिए, ताकि तीन महीने से ज्यादा समय से जारी तनाव खत्म हो सके। सरकार के सूत्रों ने ये जानकारी दी।

सूत्रों ने कहा कि इंडियन आर्मी ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को साफ तौर पर कहा है कि एक्चुअल लाइन ऑफ कंट्रोल (एलएसी) की ‘शिफ्टिंग’ स्वीकार्य नहीं है। इंडियन आर्मी की कड़ी प्रतिक्रिया के चलते पीएलए को अपने गलत कामों के अप्रत्याशित और अनपेक्षित परिणामों का सामना करना पड़ रहा है। यह ‘फेस-सेविंग एग्जिट स्ट्रैटजी’ की तलाश में है।

सीमा विवाद सुलझाने में चीन की दिलचस्पी नहीं

एक अन्य सूत्र ने कहा कि चीन की ओर से केवल टाल-मटोल की रणनीति का सहारा लिया जा रहा है। वह सीमा गतिरोध का हल खोजने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बीच भारत-चीन में गुरुवार को एक बार फिर बातचीत हुई। वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड को-ऑर्डिनेशन (डब्ल्यूएमसीसी) की 18वीं मीटिंग में दोनों देशों के जॉइंट सेक्रेटरी लेवल के अफसर शामिल हुए थे।

सीमा में शांति की जरूरत

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दोनों देशों में कम्प्लीट डिसएंगेजमेंट और मुद्दों को तेजी से हल करने पर सहमति बनी है। दोनों देशों का मानना है कि आपसी रिश्ते सुधारने के लिए सीमा में शांति की जरूरत है। इसमें यह भी तय किया गया कि आगे भी बैठकें होती रहेंगी।

डोभाल-वांग वार्ता के बाद डिसएंगेजमेंट

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 5 जुलाई हुई वार्ता के एक दिन बाद 6 जुलाई को औपचारिक तौर पर सैनिकों की डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि, 15 जुलाई के बाद से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

सूत्रों ने कहा कि पीएलए ने गलवान घाटी और कुछ अन्य जगहों से पीछे हटा है, लेकिन पैंगोंग त्सो, देपसांग और कुछ अन्य क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी नहीं हुई है। कमांडर-स्तरीय वार्ता के पांच राउंड में भारतीय पक्ष पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के अप्रैल से पहले जैसी स्थिति की तत्काल बहाली पर जोर दे रहा है।

चीन 3 इलाकों से पीछे नहीं हट रहा

आर्मी और डिप्लोमेटिक लेवल की कई राउंड की बातचीत के बावजूद चीन पूर्वी लद्दाख के फिंगर एरिया, देप्सांग और गोगरा इलाकों से पीछे नहीं हट रहा। चीन के सैनिक 3 महीने से फिंगर एरिया में जमे हुए हैं। अब उन्होंने बंकर बनाने और दूसरे अस्थायी निर्माण करने भी शुरू कर दिए हैं।

गलवान में हुई थी खूनी झड़प

भारत-चीन के बीच 15 जून को गलवान में हुई झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। चीन के भी 40 सैनिक मारे गए, लेकिन उसने यह कबूला नहीं।

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भारत-चीन के बीच 15 जून को गलवान में हुई झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। (फाइल फोटो)

चीनी सेना पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। चीन के साथ जारी मिलिट्री वार्ता में गतिरोध की स्थिति हो गई है। क्योंकि भारतीय सेना इस बात के लिए जोर दे रही है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को अप्रैल की स्थिति बहाल करनी चाहिए, ताकि तीन महीने से ज्यादा समय से जारी तनाव खत्म हो सके। सरकार के सूत्रों ने ये जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि इंडियन आर्मी ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को साफ तौर पर कहा है कि एक्चुअल लाइन ऑफ कंट्रोल (एलएसी) की ‘शिफ्टिंग’ स्वीकार्य नहीं है। इंडियन आर्मी की कड़ी प्रतिक्रिया के चलते पीएलए को अपने गलत कामों के अप्रत्याशित और अनपेक्षित परिणामों का सामना करना पड़ रहा है। यह ‘फेस-सेविंग एग्जिट स्ट्रैटजी’ की तलाश में है। सीमा विवाद सुलझाने में चीन की दिलचस्पी नहीं एक अन्य सूत्र ने कहा कि चीन की ओर से केवल टाल-मटोल की रणनीति का सहारा लिया जा रहा है। वह सीमा गतिरोध का हल खोजने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बीच भारत-चीन में गुरुवार को एक बार फिर बातचीत हुई। वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड को-ऑर्डिनेशन (डब्ल्यूएमसीसी) की 18वीं मीटिंग में दोनों देशों के जॉइंट सेक्रेटरी लेवल के अफसर शामिल हुए थे। सीमा में शांति की जरूरत विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दोनों देशों में कम्प्लीट डिसएंगेजमेंट और मुद्दों को तेजी से हल करने पर सहमति बनी है। दोनों देशों का मानना है कि आपसी रिश्ते सुधारने के लिए सीमा में शांति की जरूरत है। इसमें यह भी तय किया गया कि आगे भी बैठकें होती रहेंगी। डोभाल-वांग वार्ता के बाद डिसएंगेजमेंट राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 5 जुलाई हुई वार्ता के एक दिन बाद 6 जुलाई को औपचारिक तौर पर सैनिकों की डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि, 15 जुलाई के बाद से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। सूत्रों ने कहा कि पीएलए ने गलवान घाटी और कुछ अन्य जगहों से पीछे हटा है, लेकिन पैंगोंग त्सो, देपसांग और कुछ अन्य क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी नहीं हुई है। कमांडर-स्तरीय वार्ता के पांच राउंड में भारतीय पक्ष पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के अप्रैल से पहले जैसी स्थिति की तत्काल बहाली पर जोर दे रहा है। चीन 3 इलाकों से पीछे नहीं हट रहा आर्मी और डिप्लोमेटिक लेवल की कई राउंड की बातचीत के बावजूद चीन पूर्वी लद्दाख के फिंगर एरिया, देप्सांग और गोगरा इलाकों से पीछे नहीं हट रहा। चीन के सैनिक 3 महीने से फिंगर एरिया में जमे हुए हैं। अब उन्होंने बंकर बनाने और दूसरे अस्थायी निर्माण करने भी शुरू कर दिए हैं। गलवान में हुई थी खूनी झड़प भारत-चीन के बीच 15 जून को गलवान में हुई झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। चीन के भी 40 सैनिक मारे गए, लेकिन उसने यह कबूला नहीं। ये भी पढ़ें… लद्दाख सीमा विवाद:भारत-चीन के बीच जॉइंट सेक्रेटरी लेवल की बातचीत हुई; कम्प्लीट डिसएंगेजमेंट और मामले को तेजी से हल करने पर सहमति बनी आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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