डायलिसिस करा रहे मरीजों को कोरोना का जोखिम ज्यादा, सीडीसी ने कहा- किसी भी स्टेज की क्रोनिक किडनी बीमारी में हो सकता है खतराDainik Bhaskar


क्रोनिक किडनी बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए बुरी खबर है। जॉन्स हॉप्किंस मेडिसिन के शोधकर्ताओं की नई स्टडी के मुताबिक, क्रोनिक किडनी बीमारी के लिए हीमोडायलिसिस ले रहे नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों को SARS-CoV-2 से संक्रमित होने का ज्यादा खतरा हो सकता है। मॉर्बिडिटी एंड मोर्टेलिटी वीकली रिपोर्ट में दी गई स्टडी की जानकारियों को अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने प्रकाशित किया था।

डायलिसिस ले रहे 47 प्रतिशत मरीज मिले पॉजिटिव
स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने अप्रैल में 200 बिस्तरों वाले मैरीलैंड नर्सिंग होम में कोरोना के मामलों की जांच की। यहां कुल 170 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 32 को 16 से 30 अप्रैल के बीच डायलिसिस ट्रीटमेंट दिया गया था। स्टडी पूरी होने तक सभी मरीजों पर SARS-CoV-2 के संपर्क में आने की संभावना की जांच की थी।

शोधकर्ताओं ने पाया कि डायलिसिस ले रहे 32 में 15 (47%) मरीज कोरोना पॉजिटिव मिले। जबकि दूसरे 138 मरीजों में यह आंकड़ा केवल 22 (16%) रहा। जॉन्स हॉप्किंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में फोर्थ ईयर के मेडिकल छात्र और स्टडी के मुख्य लेखक बेंजामिन बिग्लो ने कहा “रिजल्ट्स के आधार पर हम मानते हैं कि नर्सिंग होम में भर्ती होकर डायलिसिस ले रहे मरीजों के SARS-CoV-2 के संपर्क में बार-बार और ज्यादा समय तक रहने की संभावना दूसरे मरीजों की तुलना में अधिक है।”

डायलिसिस ले रहे मरीजों की हेल्थ को मॉनिटर करने की जरूरत है
जॉन्स हॉप्किंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में मेडिसिन की असिस्टेंट प्रोफेसर मॉर्गन काट्ज ने कहा “हमारी स्टडी बताती है कि कोविड 19 के मामलों को रोकने के लिए नर्सिंग होम और डायलिसिस सेंटर्स को मरीज को डायलिसिस के लिए ले जाते वक्त और डायलिसिस प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाने के लिए साफ और लगातार बात करनी होगी।”

मॉर्गन ने कहा “डायलिसिस से गुजर रहे भर्ती मरीजों को मॉनिटर करना चाहिए और SARS-CoV-2 के संपर्क में आने की संभावना वाले किसी भी डायलिसिस स्टाफ के कॉन्टेक्ट में आने पर टेस्टिंग को प्राथमिकता देनी होगी।” उन्होंने कहा “संक्रमण को रोकने और बचने के गंभीर उपायों के साथ शुरुआत में मामलों का पता लगना नर्सिंग होम में भर्ती क्रोनिक किडनी बीमारी के मरीजों को बचाने के जरूरी उपाय हैं। महामारी के दौरान यह मरीज सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।”

क्रोनिक किडनी बीमारी की हर स्टेज खतरनाक
सीडीसी के अनुसार, किसी भी स्टेज की क्रोनिक किडनी बीमारी आपकी कोविड 19 के चलते गंभीर बीमारी के जोखिम को बढ़ाती है। ऐसे में अपनी सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। किडनी में हो रहे बदलाव या नुकसान के कारण किडनी फेल भी हो सकती है। अगर आपकी किडनी फेल हो गई है तो आपको ब्लड को हफ्ते में कई बार फिल्टर (डायलिसिस ट्रीटमेंट) करना होता है। ऐसे में हो सकता है कि आपको किडनी ट्रांसप्लांट भी करानी पड़े।

किडनी की परेशानियों को कैसे पहचानें
अगर आपको किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही है तो डॉक्टर के पास ब्लड और यूरीन की जांच कराएं। अगर यूरीन में प्रोटीन (एल्ब्युमिन) नजर आता है तो यह डायबिटीज के कारण किडनी की बीमारी शुरू होने के संकेत हैं। हर साल जांच कराएं और अगर यूरीन में प्रोटीन मिल रहा है या आपकी किडनी सामान्य तरह से काम नहीं कर रही हैं तो ज्यादा बार टेस्ट कराएं।

किडनी को स्वस्थ्य कैसे रखें और फेल होने से कैसे बचाएं?

  • सीडीसी से मुताबिक, अपने ब्लड प्रेशर को 140/90 से कम रखें या अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड प्रेशर टार्गेट का पता करें। कम नमक वाला खाना खाएं, फल और सब्जियों की डाइट बढ़ाएं। इसके अलावा एक्टिव रहें और अपनी तय कॉलेस्ट्रॉल रेंज को बनाए रखें। साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेते रहें।
  • अगर आपकी किडनी फेल हो जाती है तो आपको डायलिसिस ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अपनी किडनी को स्वस्थ रखना और फेल होने से बचाना बहुत जरूरी है। सीडीसी के अनुसार, अगर आप जोखिम में हैं तो क्रोनिक किडनी बीमारियों की जांच कराते रहें और शुरुआत में पता लगने के साथ ही इलाज भी कराएं।
  • अगर आपको डायबिटीज है तो हर साल ब्लड और यूरीन की जांच कराएं और ब्लड शुगर रेंज में रहें। एक जगह बैठे रहने की आदत न डालें और एक्टिव रहें, क्योंकि फिजिकल एक्टिविटि ब्लड शुगर स्तर को कंट्रोल करने में मदद करती है।
  • मोटापा भी मुश्किलों का कारण बन सकता है। अगर आपका वजन ज्यादा है तो इसे कम करें और स्मोकिंग की आदत को छोड़ दें। अगर आपको क्रोनिक किडनी बीमारी है तो डायटीशियन से मिलकर किडनी को स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए फूड प्लान तैयार करें।

किडनी का ख्याल रखें और कोई ट्रीटमेंट न छोड़ें
हेल्थ केयर टीम से लगातार संपर्क में बने रहें। खासतौर से तब जब आपकी बीमारी के लक्षण बिगड़ने लगें। अगर आपके पास खाना या दवाई नहीं है तो उन्हें इस बात की जानकारी दें। अपने पास खाने की चॉइस रखें जो आपकी किडनी डाइट को फॉलो करने में मदद कर सके। अगर आप डायलिसिस पर हैं तो क्लीनिक में संपर्क करें और अपना कोई भी ट्रीटमेंट न छोड़ें।

अगर आप किसी भी बीमारी से जूझ रहे हैं तो दो बातों का रखें ध्यान

  • दवाइयों को जारी रखें: अगर आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं तो अपनी दवाइयों को लेकर सजग रहें और ट्रीटमेंट जारी रखें। इसके अलावा अगर आपके लक्षण बिगड़ रहे हैं तो सुरक्षित रहकर डॉक्टर से संपर्क करें। इस वक्त कई हेल्थ एक्सपर्ट्स ऑनलाइन कंसल्टेंसी दे रहे हैं।
  • कम से कम 30 दिन की सप्लाई रखें: इस दौरान घर से निकलना सुरक्षित नहीं है, क्योंकि आप नहीं जानते कि घर से निकलने के बाद आप कितने लोगों के संपर्क में आएंगे। ऐसे में अपने डॉक्टर से संपर्क कर दवाइयों का कम से कम 30 दिन का स्टॉक अपने पास रखें।

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Coronavirus | Chronic Kidney Disease (CKD); What Patients Need to Know? Here’s Latest Updates From Johns Hopkins Medicine Researchers

क्रोनिक किडनी बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए बुरी खबर है। जॉन्स हॉप्किंस मेडिसिन के शोधकर्ताओं की नई स्टडी के मुताबिक, क्रोनिक किडनी बीमारी के लिए हीमोडायलिसिस ले रहे नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों को SARS-CoV-2 से संक्रमित होने का ज्यादा खतरा हो सकता है। मॉर्बिडिटी एंड मोर्टेलिटी वीकली रिपोर्ट में दी गई स्टडी की जानकारियों को अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने प्रकाशित किया था। डायलिसिस ले रहे 47 प्रतिशत मरीज मिले पॉजिटिव स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने अप्रैल में 200 बिस्तरों वाले मैरीलैंड नर्सिंग होम में कोरोना के मामलों की जांच की। यहां कुल 170 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 32 को 16 से 30 अप्रैल के बीच डायलिसिस ट्रीटमेंट दिया गया था। स्टडी पूरी होने तक सभी मरीजों पर SARS-CoV-2 के संपर्क में आने की संभावना की जांच की थी। शोधकर्ताओं ने पाया कि डायलिसिस ले रहे 32 में 15 (47%) मरीज कोरोना पॉजिटिव मिले। जबकि दूसरे 138 मरीजों में यह आंकड़ा केवल 22 (16%) रहा। जॉन्स हॉप्किंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में फोर्थ ईयर के मेडिकल छात्र और स्टडी के मुख्य लेखक बेंजामिन बिग्लो ने कहा “रिजल्ट्स के आधार पर हम मानते हैं कि नर्सिंग होम में भर्ती होकर डायलिसिस ले रहे मरीजों के SARS-CoV-2 के संपर्क में बार-बार और ज्यादा समय तक रहने की संभावना दूसरे मरीजों की तुलना में अधिक है।” डायलिसिस ले रहे मरीजों की हेल्थ को मॉनिटर करने की जरूरत है जॉन्स हॉप्किंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में मेडिसिन की असिस्टेंट प्रोफेसर मॉर्गन काट्ज ने कहा “हमारी स्टडी बताती है कि कोविड 19 के मामलों को रोकने के लिए नर्सिंग होम और डायलिसिस सेंटर्स को मरीज को डायलिसिस के लिए ले जाते वक्त और डायलिसिस प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाने के लिए साफ और लगातार बात करनी होगी।” मॉर्गन ने कहा “डायलिसिस से गुजर रहे भर्ती मरीजों को मॉनिटर करना चाहिए और SARS-CoV-2 के संपर्क में आने की संभावना वाले किसी भी डायलिसिस स्टाफ के कॉन्टेक्ट में आने पर टेस्टिंग को प्राथमिकता देनी होगी।” उन्होंने कहा “संक्रमण को रोकने और बचने के गंभीर उपायों के साथ शुरुआत में मामलों का पता लगना नर्सिंग होम में भर्ती क्रोनिक किडनी बीमारी के मरीजों को बचाने के जरूरी उपाय हैं। महामारी के दौरान यह मरीज सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।” क्रोनिक किडनी बीमारी की हर स्टेज खतरनाक सीडीसी के अनुसार, किसी भी स्टेज की क्रोनिक किडनी बीमारी आपकी कोविड 19 के चलते गंभीर बीमारी के जोखिम को बढ़ाती है। ऐसे में अपनी सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। किडनी में हो रहे बदलाव या नुकसान के कारण किडनी फेल भी हो सकती है। अगर आपकी किडनी फेल हो गई है तो आपको ब्लड को हफ्ते में कई बार फिल्टर (डायलिसिस ट्रीटमेंट) करना होता है। ऐसे में हो सकता है कि आपको किडनी ट्रांसप्लांट भी करानी पड़े। किडनी की परेशानियों को कैसे पहचानें अगर आपको किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही है तो डॉक्टर के पास ब्लड और यूरीन की जांच कराएं। अगर यूरीन में प्रोटीन (एल्ब्युमिन) नजर आता है तो यह डायबिटीज के कारण किडनी की बीमारी शुरू होने के संकेत हैं। हर साल जांच कराएं और अगर यूरीन में प्रोटीन मिल रहा है या आपकी किडनी सामान्य तरह से काम नहीं कर रही हैं तो ज्यादा बार टेस्ट कराएं। किडनी को स्वस्थ्य कैसे रखें और फेल होने से कैसे बचाएं? सीडीसी से मुताबिक, अपने ब्लड प्रेशर को 140/90 से कम रखें या अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड प्रेशर टार्गेट का पता करें। कम नमक वाला खाना खाएं, फल और सब्जियों की डाइट बढ़ाएं। इसके अलावा एक्टिव रहें और अपनी तय कॉलेस्ट्रॉल रेंज को बनाए रखें। साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेते रहें।अगर आपकी किडनी फेल हो जाती है तो आपको डायलिसिस ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अपनी किडनी को स्वस्थ रखना और फेल होने से बचाना बहुत जरूरी है। सीडीसी के अनुसार, अगर आप जोखिम में हैं तो क्रोनिक किडनी बीमारियों की जांच कराते रहें और शुरुआत में पता लगने के साथ ही इलाज भी कराएं।अगर आपको डायबिटीज है तो हर साल ब्लड और यूरीन की जांच कराएं और ब्लड शुगर रेंज में रहें। एक जगह बैठे रहने की आदत न डालें और एक्टिव रहें, क्योंकि फिजिकल एक्टिविटि ब्लड शुगर स्तर को कंट्रोल करने में मदद करती है।मोटापा भी मुश्किलों का कारण बन सकता है। अगर आपका वजन ज्यादा है तो इसे कम करें और स्मोकिंग की आदत को छोड़ दें। अगर आपको क्रोनिक किडनी बीमारी है तो डायटीशियन से मिलकर किडनी को स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए फूड प्लान तैयार करें। किडनी का ख्याल रखें और कोई ट्रीटमेंट न छोड़ें हेल्थ केयर टीम से लगातार संपर्क में बने रहें। खासतौर से तब जब आपकी बीमारी के लक्षण बिगड़ने लगें। अगर आपके पास खाना या दवाई नहीं है तो उन्हें इस बात की जानकारी दें। अपने पास खाने की चॉइस रखें जो आपकी किडनी डाइट को फॉलो करने में मदद कर सके। अगर आप डायलिसिस पर हैं तो क्लीनिक में संपर्क करें और अपना कोई भी ट्रीटमेंट न छोड़ें। अगर आप किसी भी बीमारी से जूझ रहे हैं तो दो बातों का रखें ध्यान दवाइयों को जारी रखें: अगर आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं तो अपनी दवाइयों को लेकर सजग रहें और ट्रीटमेंट जारी रखें। इसके अलावा अगर आपके लक्षण बिगड़ रहे हैं तो सुरक्षित रहकर डॉक्टर से संपर्क करें। इस वक्त कई हेल्थ एक्सपर्ट्स ऑनलाइन कंसल्टेंसी दे रहे हैं।कम से कम 30 दिन की सप्लाई रखें: इस दौरान घर से निकलना सुरक्षित नहीं है, क्योंकि आप नहीं जानते कि घर से निकलने के बाद आप कितने लोगों के संपर्क में आएंगे। ऐसे में अपने डॉक्टर से संपर्क कर दवाइयों का कम से कम 30 दिन का स्टॉक अपने पास रखें। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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