एलएसी के लिए रवाना होने वाले सैनिकों की हौसला अफजाई करने पहुंचे तिब्बती, बुद्ध परंपरा के मुताबिक खाटा देकर स्वागत कियाDainik Bhaskar


चीन के साथ विवाद बढ़ने पर भारत ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। हिमाचल प्रदेश से सटे तिब्बत बॉर्डर पर स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) के जवानों को तैनात किया जा रहा है। शिमला पहुंचने पर शुक्रवार को तिब्बती लोगों ने इनका स्वागत किया। तिब्बती बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग नेशनल हाइवे 5 पर पंथाघाटी के पास पहुंचे और सैनिकों को बौद्ध परंपरा के मुताबिक, खाटा (प्रार्थना के लिए इस्तेमाल में लाया जाने वाला कपड़ा) सौंपा।

सैनिकों के स्वागत के लिए पहुंचे निर्वासन में रह रहे तिब्बती युवा पालडेन धोंडुप ने कहा- एसएफएफ 1960 में बनाई गई थी। निर्वासन में रहे तिब्बती लोग अपने साथी तिब्बती जवानों का स्वागत करने में गौरव महसूस करते हैं। एसएफएफ भारतीय सेना में फ्रंटलाइन वॉरियर के तौर पर 5 दशकों से काम कर रहे हैं। चीन बॉर्डर पर जाने से पहले हम उन्हें बेस्ट ऑफ लक कहने आए हैं।

सीमा विवाद के दौरान अहम भूमिका निभाती है एसएफएफ

एसएफएफ से रिटायर हो चुके पेमा डोर्जी ने कहा- यह फोर्स सीमा पर तनाव होने पर अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में तिब्बत समुदाय के लोगों की यह ड्यूटी है कि वे इन जवानों का मनोबल बढ़ाएं। तिब्बती लोगों के साथ ही हिमाचल के स्थानीय लोग भी इन जवानों के लिए पहुंचे।

हिमाचल प्रदेश में 240 किमी लंबी तिब्बती सीमा
हिमाचल प्रदेश में भारत और तिब्बत की 242 किमी. लंबी सीमा है। यह किन्नौर और लाहौल स्पीति जिले में है। स्पीति में ही समधो बॉर्डर है। इसी बॉर्डर पर मार्च और अप्रैल में चीन के हेलिकॉप्टर्स देखे गए थे। इसके बाद से ही भारतीय सेना ने यहां चौकसी बढ़ा दी है। चीन के साथ इस हफ्ते तनाव बढ़ने के बाद एक बार फिर से हिमाचल से सटे तिब्बती सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

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हिमाचल प्रदेश के शिमला में एलएसी के लिए रवाना होते सैनिकों के स्वागत के लिए पहुंचे स्थानीय और तिब्बती समुदाय के लोग।

चीन के साथ विवाद बढ़ने पर भारत ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। हिमाचल प्रदेश से सटे तिब्बत बॉर्डर पर स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) के जवानों को तैनात किया जा रहा है। शिमला पहुंचने पर शुक्रवार को तिब्बती लोगों ने इनका स्वागत किया। तिब्बती बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग नेशनल हाइवे 5 पर पंथाघाटी के पास पहुंचे और सैनिकों को बौद्ध परंपरा के मुताबिक, खाटा (प्रार्थना के लिए इस्तेमाल में लाया जाने वाला कपड़ा) सौंपा। सैनिकों के स्वागत के लिए पहुंचे निर्वासन में रह रहे तिब्बती युवा पालडेन धोंडुप ने कहा- एसएफएफ 1960 में बनाई गई थी। निर्वासन में रहे तिब्बती लोग अपने साथी तिब्बती जवानों का स्वागत करने में गौरव महसूस करते हैं। एसएफएफ भारतीय सेना में फ्रंटलाइन वॉरियर के तौर पर 5 दशकों से काम कर रहे हैं। चीन बॉर्डर पर जाने से पहले हम उन्हें बेस्ट ऑफ लक कहने आए हैं। सीमा विवाद के दौरान अहम भूमिका निभाती है एसएफएफ एसएफएफ से रिटायर हो चुके पेमा डोर्जी ने कहा- यह फोर्स सीमा पर तनाव होने पर अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में तिब्बत समुदाय के लोगों की यह ड्यूटी है कि वे इन जवानों का मनोबल बढ़ाएं। तिब्बती लोगों के साथ ही हिमाचल के स्थानीय लोग भी इन जवानों के लिए पहुंचे। हिमाचल प्रदेश में 240 किमी लंबी तिब्बती सीमा हिमाचल प्रदेश में भारत और तिब्बत की 242 किमी. लंबी सीमा है। यह किन्नौर और लाहौल स्पीति जिले में है। स्पीति में ही समधो बॉर्डर है। इसी बॉर्डर पर मार्च और अप्रैल में चीन के हेलिकॉप्टर्स देखे गए थे। इसके बाद से ही भारतीय सेना ने यहां चौकसी बढ़ा दी है। चीन के साथ इस हफ्ते तनाव बढ़ने के बाद एक बार फिर से हिमाचल से सटे तिब्बती सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

हिमाचल प्रदेश के शिमला में एलएसी के लिए रवाना होते सैनिकों के स्वागत के लिए पहुंचे स्थानीय और तिब्बती समुदाय के लोग।Read More

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