राहुल का तंज- उनका मरना देखा जमाने ने, मोदी सरकार को खबर ना हुई; सरकार ने कहा था- लॉकडाउन में मजदूरों की मौतों के आंकड़े नहींDainik Bhaskar


लॉकडाउन में मजदूरों की मौत के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तंज कसा है। राहुल ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा- ‘मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूर मरे और कितनी नौकरियां गईं। तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हां मगर दुख है सरकार पर असर ना हुआ। उनका मरना देखा जमाने ने, एक मोदी सरकार है जिसे खबर ना हुई।’

सरकार संसद में भूली…
राहुल ने ऐसा इसलिए कहा, क्योंकि केंद्र सरकार का कहना है कि उसे पता नहीं कि लॉकडाउन के दौरान घर लौटते वक्त कितने मजदूरों की मौत हुई। कोरोनाकाल में संसद के पहले सत्र में ही सरकार ने माना कि उसके पास प्रवासी मजदूरों की मौत का कोई आंकड़ा नहीं है। यही नहीं, लॉकडाउन के दौरान कितने मजदूरों का रोजगार छिना, इस पर भी सरकार ने कोई सर्वे नहीं करवाया है।

सत्र के पहले दिन सांसदों ने 230 अतारांकित (अनस्टार्ड) प्रश्न पूछे, जिनमें से 31 श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से जुड़े थे, इनमें से 15 प्रश्न कोरोना काल में रोजगार छिनने, प्रवासी मजदूरों के घर वापसी के दौरान मौत और बेरोजगारी से जुड़े थे। सवाल संख्या-60 में पूछा गया कि लॉकडाउन की वजह से अपने घरों को लौटते समय मजदूरों के हताहत होने की राज्यवार संख्या कितनी है? तो सरकार ने कहा- ऐसे किसी आंकड़े का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।

…लेकिन जनता नहीं भूली
एनजीओ सेव लाइफ फाउंडेशन के मुताबिक 24 मार्च से 2 जून के बीच में हादसों में 198 मजदूरों की मौत हुई थी। इसके मुताबिक 3 बड़े हादसों में 48 मजदूर मारे गए थे। 16 मई को यूपी के औरेया में ट्रक हादसे में 24 मजदूरों की मौत हो गई थी। 14 मई को मध्य प्रदेश के गुना में ट्रक-बस की टक्कर में 8 मजदूरों की जान चली गई। वहीं 14 मई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में 16 मजदूरों की जान ट्रेन की चपेट में आने की वजह से चली गई थी।

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Rahul Gandhi Twitter Reaction Update | Congress Leader Rahul Gandhi Slams Narendra Modi Government Over Workers’ Deaths In Lockdown

लॉकडाउन में मजदूरों की मौत के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तंज कसा है। राहुल ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा- ‘मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूर मरे और कितनी नौकरियां गईं। तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हां मगर दुख है सरकार पर असर ना हुआ। उनका मरना देखा जमाने ने, एक मोदी सरकार है जिसे खबर ना हुई।’ मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मज़दूर मरे और कितनी नौकरियाँ गयीं। तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हाँ मगर दुख है सरकार पे असर ना हुई, उनका मरना देखा ज़माने ने, एक मोदी सरकार है जिसे ख़बर ना हुई। — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 15, 2020सरकार संसद में भूली… राहुल ने ऐसा इसलिए कहा, क्योंकि केंद्र सरकार का कहना है कि उसे पता नहीं कि लॉकडाउन के दौरान घर लौटते वक्त कितने मजदूरों की मौत हुई। कोरोनाकाल में संसद के पहले सत्र में ही सरकार ने माना कि उसके पास प्रवासी मजदूरों की मौत का कोई आंकड़ा नहीं है। यही नहीं, लॉकडाउन के दौरान कितने मजदूरों का रोजगार छिना, इस पर भी सरकार ने कोई सर्वे नहीं करवाया है। सत्र के पहले दिन सांसदों ने 230 अतारांकित (अनस्टार्ड) प्रश्न पूछे, जिनमें से 31 श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से जुड़े थे, इनमें से 15 प्रश्न कोरोना काल में रोजगार छिनने, प्रवासी मजदूरों के घर वापसी के दौरान मौत और बेरोजगारी से जुड़े थे। सवाल संख्या-60 में पूछा गया कि लॉकडाउन की वजह से अपने घरों को लौटते समय मजदूरों के हताहत होने की राज्यवार संख्या कितनी है? तो सरकार ने कहा- ऐसे किसी आंकड़े का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। …लेकिन जनता नहीं भूली एनजीओ सेव लाइफ फाउंडेशन के मुताबिक 24 मार्च से 2 जून के बीच में हादसों में 198 मजदूरों की मौत हुई थी। इसके मुताबिक 3 बड़े हादसों में 48 मजदूर मारे गए थे। 16 मई को यूपी के औरेया में ट्रक हादसे में 24 मजदूरों की मौत हो गई थी। 14 मई को मध्य प्रदेश के गुना में ट्रक-बस की टक्कर में 8 मजदूरों की जान चली गई। वहीं 14 मई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में 16 मजदूरों की जान ट्रेन की चपेट में आने की वजह से चली गई थी। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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