नियंत्रण करना ही है तो पहले डिजिटल मीडिया पर किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका दायरा बड़ा और वायरल करने की ताकत भीDainik Bhaskar


इन्फार्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अगर आप मीडिया को नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू करना ही चाहते हैं, तो पहले डिजिटल मीडिया को किया जाना चाहिए, ना कि मुख्यधारा के मीडिया को। केंद्र ने तर्क दिया कि डिजिटल मीडिया की व्यूअर शिप का दायरा बहुत बड़ा है और यह वायरल करने की भी ताकत रखता है।

केंद्र ने कहा- डिजिटल मीडिया तेजी से लोगों तक पहुंचता है
केंद्र ने गुरुवार को कोर्ट एफिडेविट दाखिल किया और कहा- मुख्यधारा के मीडिया चाहे प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक, इनमें पब्लिकेशन और टेलीकास्ट एक बार होता है। उधर, डिजिटल मीडिया तेजी से ज्यादा बड़े पैमाने पर पहुंचता है। इसकी रीडरशिप का दायरा बड़ा है और वॉट्सऐप, ट्विटर और फेसबुक जैसी ऐप के चलते यह वायरल करने की ताकत भी रखता है।

केंद्र ने सुदर्शन टीवी मामले में यह एफिडेविट कोर्ट में रखा था। केंद्र ने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को लेकर अभी भी पर्याप्त सिस्टम मौजूद है और अदालतें भी निर्देश दे चुकी हैं। ऐसे में अगर कोर्ट रेगुलेशन की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला करती है तो ऐसा डिजिटल मीडिया से शुरू किया जाना चाहिए। मीडिया में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल प्रिंट मीडिया, डिजिटल वेब न्यूज पोर्टल, यू-ट्यूब चैनल और ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

केंद्र को एफिडेविट क्यों पेश करना पड़ा
मिनिस्ट्री ने गुरुवार को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस केएम जोसेफ, जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने यूपीएससी जिहाद प्रोग्राम के प्रसारण को लेकर सुदर्शन टीवी की ब्रॉडकास्टिंग पर रोक लगा दी है। ये रोक एक याचिका पर लगाई गई है, जिसमें कोर्ट से कहा गया था कि पत्रकार की आजादी और जिम्मेदारी भरी पत्रकारिता के बीच संतुलन होना चाहिए।

कोर्ट ने 5 सदस्यीय कमेटी के गठन का भी संकेत दिया था, जो इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए मानक तय करेगी। कोर्ट ने रोक लगाते वक्त कहा था कि चैनल का प्रोग्राम देखकर ऐसा लगता है कि इसका उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को बदनाम करना है।

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कोर्ट ने इस मामले में 5 सदस्यीय कमेटी के गठन का भी संकेत दिया था, जो इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए मानक तय करेगी। -फाइल फोटो

इन्फार्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अगर आप मीडिया को नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू करना ही चाहते हैं, तो पहले डिजिटल मीडिया को किया जाना चाहिए, ना कि मुख्यधारा के मीडिया को। केंद्र ने तर्क दिया कि डिजिटल मीडिया की व्यूअर शिप का दायरा बहुत बड़ा है और यह वायरल करने की भी ताकत रखता है। केंद्र ने कहा- डिजिटल मीडिया तेजी से लोगों तक पहुंचता है केंद्र ने गुरुवार को कोर्ट एफिडेविट दाखिल किया और कहा- मुख्यधारा के मीडिया चाहे प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक, इनमें पब्लिकेशन और टेलीकास्ट एक बार होता है। उधर, डिजिटल मीडिया तेजी से ज्यादा बड़े पैमाने पर पहुंचता है। इसकी रीडरशिप का दायरा बड़ा है और वॉट्सऐप, ट्विटर और फेसबुक जैसी ऐप के चलते यह वायरल करने की ताकत भी रखता है। केंद्र ने सुदर्शन टीवी मामले में यह एफिडेविट कोर्ट में रखा था। केंद्र ने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को लेकर अभी भी पर्याप्त सिस्टम मौजूद है और अदालतें भी निर्देश दे चुकी हैं। ऐसे में अगर कोर्ट रेगुलेशन की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला करती है तो ऐसा डिजिटल मीडिया से शुरू किया जाना चाहिए। मीडिया में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल प्रिंट मीडिया, डिजिटल वेब न्यूज पोर्टल, यू-ट्यूब चैनल और ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म शामिल हैं। केंद्र को एफिडेविट क्यों पेश करना पड़ा मिनिस्ट्री ने गुरुवार को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस केएम जोसेफ, जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने यूपीएससी जिहाद प्रोग्राम के प्रसारण को लेकर सुदर्शन टीवी की ब्रॉडकास्टिंग पर रोक लगा दी है। ये रोक एक याचिका पर लगाई गई है, जिसमें कोर्ट से कहा गया था कि पत्रकार की आजादी और जिम्मेदारी भरी पत्रकारिता के बीच संतुलन होना चाहिए। कोर्ट ने 5 सदस्यीय कमेटी के गठन का भी संकेत दिया था, जो इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए मानक तय करेगी। कोर्ट ने रोक लगाते वक्त कहा था कि चैनल का प्रोग्राम देखकर ऐसा लगता है कि इसका उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को बदनाम करना है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

कोर्ट ने इस मामले में 5 सदस्यीय कमेटी के गठन का भी संकेत दिया था, जो इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए मानक तय करेगी। -फाइल फोटोRead More

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