एक्सपर्ट कमेटी ब्याज में छूट नहीं देने की सिफारिश कर सकती है; 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगीDainik Bhaskar


लोन मोरेटोरियम की अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज वसूली में छूट मिलने का इंतजार कर रहे कर्जदारों को झटका लग सकता है। केंद्र सरकार की ओर से गठित राजीव महर्षि की अध्यक्षता वाली एक्सपर्ट कमेटी ब्याज पर ब्याज में छूट नहीं देने की सिफारिश कर सकती है। न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से ऐसा कहा गया है।

10 सितंबर को किया गया था कमेटी का गठन

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने 10 सितंबर को महर्षि कमेटी का गठन किया था। मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज में छूट और कर्जदारों की क्रेडिट प्रोफाइल को डाउनग्रेड नहीं करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट ने ब्याज में छूट की संभावना तलाशने के लिए कमेटी बनाने का आदेश दिया था। इस मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मोरेटोरियम में ब्याज की राशि 10 से 20 हजार करोड़ रुपए की रेंज में हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अहम भूमिका निभाएगी कमेटी की सिफारिश

इस कमेटी की अध्यक्षता कर रहे राजीव महर्षि पूर्व CAG हैं। इसके अलावा आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व प्रोफेसर रविंद्र एच ढोलकिया और एसबीआई-आईडीबीआई बैंक के पूर्व एमडी बी. श्रीराम भी इस कमेटी में शामिल हैं। इस कमेटी की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अहम भूमिका निभाएगी।

28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में आरबीआई को निर्देश दिया था कि अगले आदेश तक लोन नहीं चुकाने वालों को डिफॉल्टर घोषित नहीं किया जाए। साथ ही केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर ठोस फैसला लेने को कहा था। इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि लोन मोरेटोरियम की अवधि को दो साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। उसी दिन लोन मोराटोरियम की अवधि बढ़ाने और ब्याज पर ब्याज की छूट की मांग पर फैसला आ सकता है।

31 अगस्त को खत्म हुई है लोन मोरेटोरियम की सुविधा

कोरोना संक्रमण के आर्थिक असर को देखते हुए आरबीआई ने मार्च में तीन महीने के लिए मोरेटोरियम सुविधा दी थी। यह सुविधा 1 मार्च से 31 मई तक तीन महीने के लिए लागू की गई थी। बाद में आरबीआई ने इसे तीन महीनों के लिए और बढ़ाते हुए 31 अगस्त तक के लिए कर दिया था। यानी कुल 6 महीने की मोरेटोरियम सुविधा दी गई थी।

क्या है मोरेटोरियम?

जब किसी प्राकृतिक या अन्य आपदा की वजह से कर्ज लेने वालों की वित्तीय हालत खराब हो जाती है, तो कर्ज देने वालों की ओर से भुगतान में कुछ समय के लिए मोहलत दी जाती है। कोरोना संकट के कारण देश में भी लॉकडाउन लगाया गया था। इस कारण बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया था। इस संकट से निपटने के लिए आरबीआई ने 6 महीने के मोरेटोरियम की सुविधा दी थी। इस अवधि के दौरान सभी तरह के लोन लेने वालों को किश्त का भुगतान करने की मोहलत मिल गई थी।

वन टाइम लोन रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम लेकर आया है आरबीआई

मोरेटोरियम खत्म होने की सूरत में कर्ज लेने वालों की समस्या को दूर करने के लिए आरबीआई वन टाइम लोन रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम लेकर आया है। आरबीआई के मुताबिक, कॉरपोरेट घरानों के अलावा इंडिविजुअल को भी इस स्कीम का फायदा मिलेगा। कंज्यूमर लोन, एजुकेशन लोन, हाउसिंग लोन, शेयर मार्केट-डिबेंचर खरीदने के लिए लिया गया लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदने के लिए लिया गया लोन, क्रेडिट कार्ड लोन, ऑटो लोन (कमर्शियल व्हीकल लोन छोड़कर), गोल्ड, ज्वैलरी, एफडी के बदले लिया गया लोन, पर्सनल लोन टू प्रोफेशनल्स और अन्य किसी काम के लिए लिए गए पर्सनल लोन पर भी रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम का फायदा लिया जा सकता है।

लोन रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम में मिल सकते हैं ये विकल्प

  • बैंक इंडिविजुअल बॉरोअर को पेमेंट री-शेड्यूल की सुविधा दे सकते हैं।
  • ब्याज को क्रेडिट सुविधा के रूप में अलग किया जा सकता है।
  • इनकम को देखते हुए बैंक व्यक्तिगत तौर पर मोरेटोरियम की सुविधा दे सकते हैं। हालांकि, यह दो साल से ज्यादा अवधि के लिए नहीं होगी।
  • ईएमआई कम करने के लिए लोन की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
  • अगर मोरेटोरियम विकल्प पर सहमति होती है तो रेजोल्यूशन प्लान पूरा होते ही यह लागू हो जाएगा।

आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें


केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि लोन मोराटोरियम की अवधि को दो साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है।

लोन मोरेटोरियम की अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज वसूली में छूट मिलने का इंतजार कर रहे कर्जदारों को झटका लग सकता है। केंद्र सरकार की ओर से गठित राजीव महर्षि की अध्यक्षता वाली एक्सपर्ट कमेटी ब्याज पर ब्याज में छूट नहीं देने की सिफारिश कर सकती है। न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से ऐसा कहा गया है। 10 सितंबर को किया गया था कमेटी का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने 10 सितंबर को महर्षि कमेटी का गठन किया था। मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज में छूट और कर्जदारों की क्रेडिट प्रोफाइल को डाउनग्रेड नहीं करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट ने ब्याज में छूट की संभावना तलाशने के लिए कमेटी बनाने का आदेश दिया था। इस मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मोरेटोरियम में ब्याज की राशि 10 से 20 हजार करोड़ रुपए की रेंज में हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अहम भूमिका निभाएगी कमेटी की सिफारिश इस कमेटी की अध्यक्षता कर रहे राजीव महर्षि पूर्व CAG हैं। इसके अलावा आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व प्रोफेसर रविंद्र एच ढोलकिया और एसबीआई-आईडीबीआई बैंक के पूर्व एमडी बी. श्रीराम भी इस कमेटी में शामिल हैं। इस कमेटी की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अहम भूमिका निभाएगी। 28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में आरबीआई को निर्देश दिया था कि अगले आदेश तक लोन नहीं चुकाने वालों को डिफॉल्टर घोषित नहीं किया जाए। साथ ही केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर ठोस फैसला लेने को कहा था। इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि लोन मोरेटोरियम की अवधि को दो साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। उसी दिन लोन मोराटोरियम की अवधि बढ़ाने और ब्याज पर ब्याज की छूट की मांग पर फैसला आ सकता है। 31 अगस्त को खत्म हुई है लोन मोरेटोरियम की सुविधा कोरोना संक्रमण के आर्थिक असर को देखते हुए आरबीआई ने मार्च में तीन महीने के लिए मोरेटोरियम सुविधा दी थी। यह सुविधा 1 मार्च से 31 मई तक तीन महीने के लिए लागू की गई थी। बाद में आरबीआई ने इसे तीन महीनों के लिए और बढ़ाते हुए 31 अगस्त तक के लिए कर दिया था। यानी कुल 6 महीने की मोरेटोरियम सुविधा दी गई थी। क्या है मोरेटोरियम? जब किसी प्राकृतिक या अन्य आपदा की वजह से कर्ज लेने वालों की वित्तीय हालत खराब हो जाती है, तो कर्ज देने वालों की ओर से भुगतान में कुछ समय के लिए मोहलत दी जाती है। कोरोना संकट के कारण देश में भी लॉकडाउन लगाया गया था। इस कारण बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया था। इस संकट से निपटने के लिए आरबीआई ने 6 महीने के मोरेटोरियम की सुविधा दी थी। इस अवधि के दौरान सभी तरह के लोन लेने वालों को किश्त का भुगतान करने की मोहलत मिल गई थी। वन टाइम लोन रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम लेकर आया है आरबीआई मोरेटोरियम खत्म होने की सूरत में कर्ज लेने वालों की समस्या को दूर करने के लिए आरबीआई वन टाइम लोन रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम लेकर आया है। आरबीआई के मुताबिक, कॉरपोरेट घरानों के अलावा इंडिविजुअल को भी इस स्कीम का फायदा मिलेगा। कंज्यूमर लोन, एजुकेशन लोन, हाउसिंग लोन, शेयर मार्केट-डिबेंचर खरीदने के लिए लिया गया लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदने के लिए लिया गया लोन, क्रेडिट कार्ड लोन, ऑटो लोन (कमर्शियल व्हीकल लोन छोड़कर), गोल्ड, ज्वैलरी, एफडी के बदले लिया गया लोन, पर्सनल लोन टू प्रोफेशनल्स और अन्य किसी काम के लिए लिए गए पर्सनल लोन पर भी रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम का फायदा लिया जा सकता है। लोन रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम में मिल सकते हैं ये विकल्प बैंक इंडिविजुअल बॉरोअर को पेमेंट री-शेड्यूल की सुविधा दे सकते हैं।ब्याज को क्रेडिट सुविधा के रूप में अलग किया जा सकता है।इनकम को देखते हुए बैंक व्यक्तिगत तौर पर मोरेटोरियम की सुविधा दे सकते हैं। हालांकि, यह दो साल से ज्यादा अवधि के लिए नहीं होगी।ईएमआई कम करने के लिए लोन की अवधि बढ़ाई जा सकती है।अगर मोरेटोरियम विकल्प पर सहमति होती है तो रेजोल्यूशन प्लान पूरा होते ही यह लागू हो जाएगा। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि लोन मोराटोरियम की अवधि को दो साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है।Read More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *