मुकेश सहनी बोले- नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाएंगे, उनसे राजनीति भी सीखेंगे, राजद में नेतृत्व बदले तो आगे फिर सोचेंगेDainik Bhaskar


सन ऑफ मल्लाह यानी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) प्रमुख मुकेश सहनी एनडीए से नाता जोड़ने के बाद बिहार में 11 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। वह तेजस्वी यादव से हाथ नहीं मिलाना चाहते, लेकिन राजद में नेतृत्व बदलने पर फिर से विचार करने की बात भी कर रहे हैं। महागठबंधन में उप मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे सहनी इस बार सिमरी बख्तियारपुर से खुद चुनाव लड़ रहे हैं। कहते हैं- नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाएंगे और उनके नेतृत्व में राजनीति भी सीखेंगे। भास्कर से उनकी बातचीत के प्रमुख अंश-

आपने महागठबंधन उस समय छोड़ा, जब टिकट नहीं मिला। एनडीए से नाता जोड़ने के बाद पार्टी की क्या रणनीति होगी?
मुकेश सहनी:
बिहार चुनाव में मजबूती से एनडीए के लिए प्रचार करेंगे। नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाएंगे और उनके नेतृत्व में हम भी राजनीति सीखेंगे। बिहार की समस्याओं पर मजबूती से काम करेंगे।

महागठबंधन में आप उप मुख्यमंत्री के उम्मीदवार थे। क्या ये इच्छा अब कम हो गई?
मुकेश सहनी:
नहीं, इच्छा नहीं कम हुई है। परिस्थितियां बदली हैं। उस समय हम महागठबंधन में थे, अब एनडीए के पार्ट हैं। बिहार की 12 करोड़ जनता जो चाहेगी, वही होगा। हम जनता की सेवा के लिए तैयार हैं। एनडीए में 11 सीटें मिली हैं तो सरकार में भी जगह जरूर मिलेगी। यहां पहले से सीएम नीतीश कुमार तो उप मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से तय है।

आप अति पिछड़ा वर्ग के बड़े चेहरे हैं। आपको ऐसा नहीं लगता कि उपमुख्यमंत्री इसी तबके से हो?
मुकेश सहनी:
ये तो टॉप नेतृत्व का निर्णय होगा कि वह उप मुख्यमंत्री किसे बनाते हैं। एनडीए की ओर से वीआईपी को सम्मान मिला है। पीएम मोदी से लेकर सीएम नीतीश कुमार, राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा ने भी हमसे बात की। एनडीए के नेतृत्व में इस बार महागठबंधन को बिहार में हराएंगे।

क्या डिप्टी सीएम बनने की चाह में आप खुद चुनाव लड़ रहे हैं?
मुकेश सहनी: नहीं, ऐसी बात नहीं है। मेरी पार्टी के लीडर और नीतीश कुमार से बात हुई तो उनकी इच्छा थी कि हम चुनाव लड़ें। इस बार सिमरी बख्तियारपुर से विधानसभा चुनाव लड़ रहा हूं। एमएलसी तो मेरे पास है ही तो चुनाव जीतने के बाद एमएलसी वाली सीट पार्टी के साथी को दे देंगे। मेरी इच्छा थी कि मुंगेर, शेखपुरा से हमारे साथी चुनाव लड़ें तो उन्हें भी मौका दूंगा।

पिछले दिनों चर्चा थी कि आप एनडीए में शामिल तो हुए हैं, लेकिन उनके सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ेंगे?
मुकेश सहनी: जब हमारा गठबंधन हुआ है तो ये बात कहां से आ जाती है? निश्चित तौर पर हम एनडीए के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगे।

क्या आपके पास कैंडिडेट की कमी है?
मुकेश सहनी: नहीं, हमारे पास 243 सीट पर कैंडिडेट की मारामारी है। समझ नहीं आ रहा कि किसको हां और किसको ना कहें। पहले हमलोगों का 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्लान था, इसलिए हमारे सामने संकट है कि किसको खड़ा करें, किसको बिठाएं। असंतोषजनक स्थिति और नाराजगी न हो, इसलिए हमलोग हर निर्णय सोच-विचार कर ले रहे हैं।

कहा जा रहा है कि आप भाजपा से बॉरो प्लेयर लाएंगे?
मुकेश सहनी: हमें चुनाव जीतना है, जिसे जो कहना है कहे। भाजपा ने अपनी सेटिंग सीट काटकर हमें 11 सीटें दी हैं। 11 सीट काटकर हमें एडजस्ट कर लिया है। ऐसे में एकाध सीट पर जहां वह जीत सकते हैं, वहां की सीट उन्हें देने में क्या दिक्कत है? हमलोग अलग-अलग सीट पर जीतने वाले उम्मीदवारों को आगे कर रहे हैं, ताकि हर सीट पर हम काबिज हों।

महागठबंधन छोड़ रहे थे तो कहा था कि तेजस्वी के साथ जीते जी नहीं जाएंगे, तेजप्रताप के साथ सोचा जा सकता है। ऐसा क्यों?
मुकेश सहनी: देखिए हमने कहा था कि जैसे राजद ने हमारे साथ विश्वासघात किया, उसके बाद हम जीते जी राजद का दामन नहीं थामेंगे। तेजस्वी यादव के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। हां, नेतृत्व बदलने पर सोचा जा सकता है। ये आगे की बात है।

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मुकेश सहनी की पार्टी एनडीए से नाता जोड़ने के बाद बिहार में 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

सन ऑफ मल्लाह यानी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) प्रमुख मुकेश सहनी एनडीए से नाता जोड़ने के बाद बिहार में 11 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। वह तेजस्वी यादव से हाथ नहीं मिलाना चाहते, लेकिन राजद में नेतृत्व बदलने पर फिर से विचार करने की बात भी कर रहे हैं। महागठबंधन में उप मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे सहनी इस बार सिमरी बख्तियारपुर से खुद चुनाव लड़ रहे हैं। कहते हैं- नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाएंगे और उनके नेतृत्व में राजनीति भी सीखेंगे। भास्कर से उनकी बातचीत के प्रमुख अंश- आपने महागठबंधन उस समय छोड़ा, जब टिकट नहीं मिला। एनडीए से नाता जोड़ने के बाद पार्टी की क्या रणनीति होगी? मुकेश सहनी: बिहार चुनाव में मजबूती से एनडीए के लिए प्रचार करेंगे। नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाएंगे और उनके नेतृत्व में हम भी राजनीति सीखेंगे। बिहार की समस्याओं पर मजबूती से काम करेंगे। महागठबंधन में आप उप मुख्यमंत्री के उम्मीदवार थे। क्या ये इच्छा अब कम हो गई? मुकेश सहनी: नहीं, इच्छा नहीं कम हुई है। परिस्थितियां बदली हैं। उस समय हम महागठबंधन में थे, अब एनडीए के पार्ट हैं। बिहार की 12 करोड़ जनता जो चाहेगी, वही होगा। हम जनता की सेवा के लिए तैयार हैं। एनडीए में 11 सीटें मिली हैं तो सरकार में भी जगह जरूर मिलेगी। यहां पहले से सीएम नीतीश कुमार तो उप मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से तय है। आप अति पिछड़ा वर्ग के बड़े चेहरे हैं। आपको ऐसा नहीं लगता कि उपमुख्यमंत्री इसी तबके से हो? मुकेश सहनी: ये तो टॉप नेतृत्व का निर्णय होगा कि वह उप मुख्यमंत्री किसे बनाते हैं। एनडीए की ओर से वीआईपी को सम्मान मिला है। पीएम मोदी से लेकर सीएम नीतीश कुमार, राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा ने भी हमसे बात की। एनडीए के नेतृत्व में इस बार महागठबंधन को बिहार में हराएंगे। क्या डिप्टी सीएम बनने की चाह में आप खुद चुनाव लड़ रहे हैं?मुकेश सहनी: नहीं, ऐसी बात नहीं है। मेरी पार्टी के लीडर और नीतीश कुमार से बात हुई तो उनकी इच्छा थी कि हम चुनाव लड़ें। इस बार सिमरी बख्तियारपुर से विधानसभा चुनाव लड़ रहा हूं। एमएलसी तो मेरे पास है ही तो चुनाव जीतने के बाद एमएलसी वाली सीट पार्टी के साथी को दे देंगे। मेरी इच्छा थी कि मुंगेर, शेखपुरा से हमारे साथी चुनाव लड़ें तो उन्हें भी मौका दूंगा। पिछले दिनों चर्चा थी कि आप एनडीए में शामिल तो हुए हैं, लेकिन उनके सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ेंगे?मुकेश सहनी: जब हमारा गठबंधन हुआ है तो ये बात कहां से आ जाती है? निश्चित तौर पर हम एनडीए के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगे। क्या आपके पास कैंडिडेट की कमी है?मुकेश सहनी: नहीं, हमारे पास 243 सीट पर कैंडिडेट की मारामारी है। समझ नहीं आ रहा कि किसको हां और किसको ना कहें। पहले हमलोगों का 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्लान था, इसलिए हमारे सामने संकट है कि किसको खड़ा करें, किसको बिठाएं। असंतोषजनक स्थिति और नाराजगी न हो, इसलिए हमलोग हर निर्णय सोच-विचार कर ले रहे हैं। कहा जा रहा है कि आप भाजपा से बॉरो प्लेयर लाएंगे?मुकेश सहनी: हमें चुनाव जीतना है, जिसे जो कहना है कहे। भाजपा ने अपनी सेटिंग सीट काटकर हमें 11 सीटें दी हैं। 11 सीट काटकर हमें एडजस्ट कर लिया है। ऐसे में एकाध सीट पर जहां वह जीत सकते हैं, वहां की सीट उन्हें देने में क्या दिक्कत है? हमलोग अलग-अलग सीट पर जीतने वाले उम्मीदवारों को आगे कर रहे हैं, ताकि हर सीट पर हम काबिज हों। महागठबंधन छोड़ रहे थे तो कहा था कि तेजस्वी के साथ जीते जी नहीं जाएंगे, तेजप्रताप के साथ सोचा जा सकता है। ऐसा क्यों?मुकेश सहनी: देखिए हमने कहा था कि जैसे राजद ने हमारे साथ विश्वासघात किया, उसके बाद हम जीते जी राजद का दामन नहीं थामेंगे। तेजस्वी यादव के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। हां, नेतृत्व बदलने पर सोचा जा सकता है। ये आगे की बात है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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