सिर्फ उम्र ही नहीं, अंधे होने का खतरा भी बढ़ा; जानिए कैसे कमजोर हो रही है भारतीयों की नजरDainik Bhaskar


रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर ऑफिस के सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के बाद मेडिकल जर्नल लैंसेट की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि भारत में लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ गई है। यानी जीवन लंबा हो गया है। अब दो इंटरनेशनल एजेंसियों की रिपोर्ट कह रही हैं कि डाइबिटीज का बोझ भी बढ़ा है और इसकी वजह से भारतीयों की नजर कमजोर हो रही है और अंधत्व (ब्लाइंडनेस) की परेशानी बढ़ रही है।

इन एजेंसियों का डेटा कहता है कि 1990 में 5.77 करोड़ लोगों को पास का नहीं दिखता था, जबकि 2020 में ऐसे लोगों की संख्या बढ़कर दोगुनी यानी 13.76 करोड़ हो चुकी है। इस अपडेट में भारत समेत 112 देशों में कराई गई 512 स्टडी के डेटा को शामिल किया गया है।

क्या कहती है VLEG और IAPB की रिपोर्ट?

  • विजन लॉस एक्सपर्ट ग्रुप (VLEG) ने ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज स्टडी के साथ मिलकर 2020 में ग्लोबल विजन लॉस बर्डन के अनुमान अपडेट्स किए हैं। इसमें तीन दशकों में हुए बदलावों और 2050 के लिए पूर्वानुमान बताए हैं।
  • इंटरनेशनल एजेंसी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ ब्लाइंडनेस (IAPB) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के जॉइंट इनिशिएटिव विजन 2020: द राइट टू साइट के जरिए ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि अंधत्व से लोगों को बचाया जा सके।
  • यह रिपोर्ट कहती है कि दुनियाभर में 50.7 करोड़ लोगों की पास की नजर खराब हो गई है। इसमें 13.76 करोड़ लोग भारत में हैं। नियर विजन लॉस का मतलब है कि पास की वस्तुओं पर फोकस न कर पाना। इसे प्रेसबायोपिया भी कहते हैं। डेटा कहता है कि 40 वर्ष की उम्र के बाद इसका जोखिम बढ़ जाता है।
  • नजर को मॉडरेट और सीवियर नुकसान होने के मामले भी 1990 के 4.06 करोड़ से बढ़कर 2020 में 7.9 करोड़ हो गए हैं। मॉडरेट और सीवियर नुकसान का मतलब है नजर का 6/18 से 3/60 होना। 3/60 का मतलब है आम व्यक्ति जो 60 फीट से देख सकता है, वह सिर्फ 3 फीट के पास ही देखा जा सके। नजर का 3/60 से कमजोर होना अंधत्व की शुरुआत होती है।

क्या है वजह नजर खराब होने की?

  • मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक नजर के मॉडरेट से सीवियर नुकसान की मुख्य वजह डाइबिटीज है। भारत में 1990 में 2.6 करोड़ डाइबिटीक लोग थे, जो 2016 में बढ़कर 6.5 करोड़ हो गए।
  • हाई-कैलोरी डाइट, सुस्त जीवनशैली की वजह से टाइप-2 डाइबिटीज और उसकी वजह से अंधत्व का खतरा बढ़ जाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की इंडिया डाइबिटीज स्टडी 2017 के मुताबिक 15 राज्यों में 7.3% लोग डाइबिटीक थे। गांवों में 5.2% के मुकाबले शहरों में 11.2% लोग डाइबिटीक थे।
  • IAPB के मुताबिक भारत में 6 में से एक डाइबिटीक रोगी को रेटिनोपैथी है। डाइबिटीक लोगों में रेटिनोपैथी, कैटरेक्ट, ग्लूकोमा और कॉर्नियल कंडीशन की वजह से अंधत्व हो सकता है। भारत में माइल्ड और सीवियर नुकसान के मामलों में 65% कारण यही है।

उम्र और अंधत्व का क्या संबंध है?

  • दुनियाभर के 100 से ज्यादा देशों में की गई स्टडी के आंकड़ों के एनालिसिस के आधार पर यह आंकड़े निकाले गए हैं। इसमें बताया गया है कि दुनियाभर में 78% दृष्टिहीन लोग 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के हैं। यानी बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों के कमजोर होने और अन्य समस्याओं की वजह से अंधत्व या आंख के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • भारत में इस समय 92 लाख दृष्टिहीन हैं। 1990 में यह 70 लाख थे। इसी तरह, चीन में 89 लाख दृष्टिहीन हैं। इन आंकड़ों को देखें तो दुनिया की 49% दृष्टिहीन आबादी इन दोनों देशों में रहती है।
  • भारत में 300 लोगों में से एक यानी 0.36% आबादी दृष्टिहीन है। 50 वर्ष से ऊपर 50 लोगों में एक यानी (1.99%) आबादी को नजर नहीं आता। 40 लोगों में एक (2.55%) की नजर कमजोर है। 50 वर्ष से ज्यादा उम्र वाले सात में से एक व्यक्ति (13.76%) की नजर कमजोर है।
  • 50 वर्ष से ज्यादा उम्र वाले लोगों में अंधत्व का मुख्य कारण सही समय पर कैटेरेक्ट सर्जरी न करवाने, उससे जुड़े कॉम्प्लिकेशन, ग्लूकोमा है। 6 में से एक डाइबीटिक व्यक्ति रेटिनोपैथी से जूझ रहा है। वहीं, 18.6% बच्चे विटामिन ए की कमी की वजह से नजर से जुड़ी दिक्कत का सामना कर रहे हैं।

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Vision Loss As Age Increases | Vision Loss Expert Group | The Lancet Global Health Study Over Blindness: All You Need To Know | Long Living Doesn’t Mean Living In Darkness

रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर ऑफिस के सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के बाद मेडिकल जर्नल लैंसेट की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि भारत में लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ गई है। यानी जीवन लंबा हो गया है। अब दो इंटरनेशनल एजेंसियों की रिपोर्ट कह रही हैं कि डाइबिटीज का बोझ भी बढ़ा है और इसकी वजह से भारतीयों की नजर कमजोर हो रही है और अंधत्व (ब्लाइंडनेस) की परेशानी बढ़ रही है। इन एजेंसियों का डेटा कहता है कि 1990 में 5.77 करोड़ लोगों को पास का नहीं दिखता था, जबकि 2020 में ऐसे लोगों की संख्या बढ़कर दोगुनी यानी 13.76 करोड़ हो चुकी है। इस अपडेट में भारत समेत 112 देशों में कराई गई 512 स्टडी के डेटा को शामिल किया गया है। क्या कहती है VLEG और IAPB की रिपोर्ट? विजन लॉस एक्सपर्ट ग्रुप (VLEG) ने ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज स्टडी के साथ मिलकर 2020 में ग्लोबल विजन लॉस बर्डन के अनुमान अपडेट्स किए हैं। इसमें तीन दशकों में हुए बदलावों और 2050 के लिए पूर्वानुमान बताए हैं।इंटरनेशनल एजेंसी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ ब्लाइंडनेस (IAPB) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के जॉइंट इनिशिएटिव विजन 2020: द राइट टू साइट के जरिए ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि अंधत्व से लोगों को बचाया जा सके।यह रिपोर्ट कहती है कि दुनियाभर में 50.7 करोड़ लोगों की पास की नजर खराब हो गई है। इसमें 13.76 करोड़ लोग भारत में हैं। नियर विजन लॉस का मतलब है कि पास की वस्तुओं पर फोकस न कर पाना। इसे प्रेसबायोपिया भी कहते हैं। डेटा कहता है कि 40 वर्ष की उम्र के बाद इसका जोखिम बढ़ जाता है। नजर को मॉडरेट और सीवियर नुकसान होने के मामले भी 1990 के 4.06 करोड़ से बढ़कर 2020 में 7.9 करोड़ हो गए हैं। मॉडरेट और सीवियर नुकसान का मतलब है नजर का 6/18 से 3/60 होना। 3/60 का मतलब है आम व्यक्ति जो 60 फीट से देख सकता है, वह सिर्फ 3 फीट के पास ही देखा जा सके। नजर का 3/60 से कमजोर होना अंधत्व की शुरुआत होती है। क्या है वजह नजर खराब होने की? मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक नजर के मॉडरेट से सीवियर नुकसान की मुख्य वजह डाइबिटीज है। भारत में 1990 में 2.6 करोड़ डाइबिटीक लोग थे, जो 2016 में बढ़कर 6.5 करोड़ हो गए।हाई-कैलोरी डाइट, सुस्त जीवनशैली की वजह से टाइप-2 डाइबिटीज और उसकी वजह से अंधत्व का खतरा बढ़ जाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की इंडिया डाइबिटीज स्टडी 2017 के मुताबिक 15 राज्यों में 7.3% लोग डाइबिटीक थे। गांवों में 5.2% के मुकाबले शहरों में 11.2% लोग डाइबिटीक थे।IAPB के मुताबिक भारत में 6 में से एक डाइबिटीक रोगी को रेटिनोपैथी है। डाइबिटीक लोगों में रेटिनोपैथी, कैटरेक्ट, ग्लूकोमा और कॉर्नियल कंडीशन की वजह से अंधत्व हो सकता है। भारत में माइल्ड और सीवियर नुकसान के मामलों में 65% कारण यही है। उम्र और अंधत्व का क्या संबंध है? दुनियाभर के 100 से ज्यादा देशों में की गई स्टडी के आंकड़ों के एनालिसिस के आधार पर यह आंकड़े निकाले गए हैं। इसमें बताया गया है कि दुनियाभर में 78% दृष्टिहीन लोग 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के हैं। यानी बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों के कमजोर होने और अन्य समस्याओं की वजह से अंधत्व या आंख के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है।भारत में इस समय 92 लाख दृष्टिहीन हैं। 1990 में यह 70 लाख थे। इसी तरह, चीन में 89 लाख दृष्टिहीन हैं। इन आंकड़ों को देखें तो दुनिया की 49% दृष्टिहीन आबादी इन दोनों देशों में रहती है। भारत में 300 लोगों में से एक यानी 0.36% आबादी दृष्टिहीन है। 50 वर्ष से ऊपर 50 लोगों में एक यानी (1.99%) आबादी को नजर नहीं आता। 40 लोगों में एक (2.55%) की नजर कमजोर है। 50 वर्ष से ज्यादा उम्र वाले सात में से एक व्यक्ति (13.76%) की नजर कमजोर है।50 वर्ष से ज्यादा उम्र वाले लोगों में अंधत्व का मुख्य कारण सही समय पर कैटेरेक्ट सर्जरी न करवाने, उससे जुड़े कॉम्प्लिकेशन, ग्लूकोमा है। 6 में से एक डाइबीटिक व्यक्ति रेटिनोपैथी से जूझ रहा है। वहीं, 18.6% बच्चे विटामिन ए की कमी की वजह से नजर से जुड़ी दिक्कत का सामना कर रहे हैं। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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