लोकपाल को इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच 55 शिकायतें मिलीं, इनमें से केवल 3 सांसदों के खिलाफDainik Bhaskar


भारत समेत पूरी दुनिया इस साल की शुरुआत से ही कोरोना महामारी से लड़ने में जुटी है। आंकड़ों के मुताबिक, महामारी के बीच भी भ्रष्टाचार नियामक संस्था लोकपाल को अप्रैल से सितंबर के बीच 55 शिकायतें मिलीं। इनमें तीन शिकायतें सांसदों के खिलाफ थीं।

ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, इनमें 22 शिकायतें ग्रुप ए और बी कैटेगरी के केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ हैं। 26 शिकायतें अलग-अलग बोर्ड/निगमों/ऑटोनॉमस बॉडी के मेंबर्स और स्टाफ के खिलाफ थीं, जिसे आंशिक या पूर्ण रूप से केंद्र सरकार द्वारा फाइनेंस किया जाता है। वहीं, चार अन्य कैटेगरी के खिलाफ हैं।

2020-21 के लिए सितंबर के अंत तक अपडेट लोकपाल के आंकड़ों के अनुसार, शुरुआती जांच के बाद 28 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया था। इसमें कहा गया है कि लोकपाल ने 13 शिकायतों के जांच के आदेश दिए थे। 12 की जांच सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) और एक की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) करेगी।

लोकपाल के अध्यक्ष जस्टिस पीसी घोष हैं

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिछले साल 23 मार्च को जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को लोकपाल के अध्यक्ष की शपथ दिलाई थी। सरकार में उच्च पदों पर काम करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें सुनने और उन पर कार्रवाई करने वाली संस्था है। लोकपाल के आठ मेंबर्स को जस्टिस घोष ने 27 मार्च को शपथ दिलाई थी।

हालांकि, लोकपाल के एक मेंबर जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी का इस साल मई में निधन हो गया। दूसरे मेंबर जस्टिस दिलीप बी भोसले ने इस साल जनवरी में इस्तीफा दे दिया था। नियमों के अनुसार, लोकपाल पैनल में एक अध्यक्ष और ज्यादा से ज्यादा आठ सदस्यों का प्रावधान है।

2019-20 में 613 शिकायतें राज्य के अधिकारियों के खिलाफ

आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 के दौरान लोकपाल को 1427 शिकायतें मिली थीं। इनमें 613 राज्य सरकार के अधिकारियों और चार केंद्रीय मंत्री और सांसदों के खिलाफ थीं। इसमें कहा गया है कि 245 शिकायतें केंद्र सरकार के अधिकारियों, 200 पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, वैधानिक निकाय, ज्यूडिशियल इंस्टीट्यूशन और ऑटोनोमस बॉडी में काम करने वाले अधिकारियों और 135 निजी व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ थे।

कुल शिकायतों में से 220 रिक्वेस्ट और सजेशन

लोकपाल डेटा के मुताबिक, 6 शिकायतें राज्य मंत्रियों और विधानसभा के सदस्यों के खिलाफ और चार केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ थीं। कुल शिकायतों में से 220 रिक्वेस्ट/कमेंट्स/सजेशन थे। इनमें 613 शिकायतें राज्य सरकार के अधिकारियों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, विधायी निकायों, ज्यूडिशियल इंस्टीट्यूशंस और राज्य स्तरीय ऑटोनोमस बॉडी के खिलाफ थीं।

इन शिकायतों में से 1347 का निपटारा किया गया, जबकि 1152 लोकपाल के अधिकार क्षेत्र से बाहर की थीं।

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Lokpal Complaints Between April And September Data 2020; Here’s All You Need To Know With Details

भारत समेत पूरी दुनिया इस साल की शुरुआत से ही कोरोना महामारी से लड़ने में जुटी है। आंकड़ों के मुताबिक, महामारी के बीच भी भ्रष्टाचार नियामक संस्था लोकपाल को अप्रैल से सितंबर के बीच 55 शिकायतें मिलीं। इनमें तीन शिकायतें सांसदों के खिलाफ थीं। ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, इनमें 22 शिकायतें ग्रुप ए और बी कैटेगरी के केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ हैं। 26 शिकायतें अलग-अलग बोर्ड/निगमों/ऑटोनॉमस बॉडी के मेंबर्स और स्टाफ के खिलाफ थीं, जिसे आंशिक या पूर्ण रूप से केंद्र सरकार द्वारा फाइनेंस किया जाता है। वहीं, चार अन्य कैटेगरी के खिलाफ हैं। 2020-21 के लिए सितंबर के अंत तक अपडेट लोकपाल के आंकड़ों के अनुसार, शुरुआती जांच के बाद 28 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया था। इसमें कहा गया है कि लोकपाल ने 13 शिकायतों के जांच के आदेश दिए थे। 12 की जांच सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) और एक की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) करेगी। लोकपाल के अध्यक्ष जस्टिस पीसी घोष हैं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिछले साल 23 मार्च को जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को लोकपाल के अध्यक्ष की शपथ दिलाई थी। सरकार में उच्च पदों पर काम करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें सुनने और उन पर कार्रवाई करने वाली संस्था है। लोकपाल के आठ मेंबर्स को जस्टिस घोष ने 27 मार्च को शपथ दिलाई थी। हालांकि, लोकपाल के एक मेंबर जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी का इस साल मई में निधन हो गया। दूसरे मेंबर जस्टिस दिलीप बी भोसले ने इस साल जनवरी में इस्तीफा दे दिया था। नियमों के अनुसार, लोकपाल पैनल में एक अध्यक्ष और ज्यादा से ज्यादा आठ सदस्यों का प्रावधान है। 2019-20 में 613 शिकायतें राज्य के अधिकारियों के खिलाफ आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 के दौरान लोकपाल को 1427 शिकायतें मिली थीं। इनमें 613 राज्य सरकार के अधिकारियों और चार केंद्रीय मंत्री और सांसदों के खिलाफ थीं। इसमें कहा गया है कि 245 शिकायतें केंद्र सरकार के अधिकारियों, 200 पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, वैधानिक निकाय, ज्यूडिशियल इंस्टीट्यूशन और ऑटोनोमस बॉडी में काम करने वाले अधिकारियों और 135 निजी व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ थे। कुल शिकायतों में से 220 रिक्वेस्ट और सजेशन लोकपाल डेटा के मुताबिक, 6 शिकायतें राज्य मंत्रियों और विधानसभा के सदस्यों के खिलाफ और चार केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ थीं। कुल शिकायतों में से 220 रिक्वेस्ट/कमेंट्स/सजेशन थे। इनमें 613 शिकायतें राज्य सरकार के अधिकारियों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, विधायी निकायों, ज्यूडिशियल इंस्टीट्यूशंस और राज्य स्तरीय ऑटोनोमस बॉडी के खिलाफ थीं। इन शिकायतों में से 1347 का निपटारा किया गया, जबकि 1152 लोकपाल के अधिकार क्षेत्र से बाहर की थीं। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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