लोगों की जांच आयोग से शिकायत- कब्जाई जमीन वापस दिलवाएं, गिरोह से जान का खतराDainik Bhaskar


(पवन कुमार) यूपी के गैंगस्टर विकास दुबे एनकाउंटर की जांच कर रहे जस्टिस बीएस चौहान आयोग को इन दिनों अजीब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनके पास ऐसी शिकायतें आ रही हैं, जिनसे आयोग का कोई वास्ता ही नहीं है।

कोई विकास दुबे के गिरोह से अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहा है, तो कोई अपनी जमीन को कब्जा मुक्त करने की बात कह रहा है। जवाब में आयोग ने ऐसी शिकायतों पर संबंधित लोगों को पुलिस, कोर्ट व प्रशासन के पास गुहार लगाने की बात कही है। 8 पुलिस कर्मियों की हत्या का आरोपी, गैंगस्टर विकास 10 जुलाई को कानपुर में एनकाउंटर में मारा गया था। एनकाउंटर फर्जी बताया गया तो जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आयोग गठित हुआ।

दर्जनभर से ज्यादा शिकायतें मिलीं
दरअसल, जबसे जांच आयोग बना है, तबसे उसे 10 से ज्यादा ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिनका एनकाउंटर से कोई लेना-देना नहीं है। एक शिकायत में तो एक शख्स ने पत्र लिखकर कहा कि विकास दुबे के मारे जाने के बाद उसके गैंग के सदस्य पुलिस मुखबिरी को लेकर उस पर संदेह कर रहे हैं और वे उसे मारना चाहते हैं। इसलिए पुलिस सुरक्षा दिलवाई जाए।

वहीं, कानपुर के एक व्यक्ति ने कहा कि विकास ने उसकी जमीन पर कब्जा किया हुआ था। डर के कारण वह अपनी जमीन नहीं छुड़ा सका। चूंकि उसकी मौत हो चुकी है, इसलिए उसे उसकी जमीन वापस दिलवाई जाए। वहीं, कुछ शिकायतें विकास व उसके परिवार के लोगों द्वारा पैसे हड़पने व उन्हें रकम वापस दिलाने की मांग को लेकर भी आई है।

आयोग के लिए दूसरे राज्यों के वकील भी परेशानी का सबब बने हुए हैं। मुंबई, बिहार व कई अन्य राज्यों के वकील खुद को गवाह के तौर पर जोड़ना चाहते हैं, जबकि उनका मामले से कोई संबंध नहीं है। वे न तो एनकाउंटर के समय घटनास्थल के पास थे, न ही विकास की गिरफ्तारी के समय।

आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्य बीमार पड़े, जांच का काम रुका
इधर, एनकाउंटर की जांच कर रहे रिटायर्ड जस्टिस बीएस चौहान बीमार पड़ गए हैं। उन्हें दिल की बीमारी होने से अस्पताल में दाखिल किया गया है। कुछ दिनों पहले उनका ऑपरेशन भी किया गया। जांच से जुड़े एक अन्य सदस्य इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज एसके अग्रवाल भी बीमार चल रहे हैं। इस वजह से फिलहाल जांच का काम रुक सा गया है।

इसके पहले आयोग की टीम ने उस जगह का भी दौरा किया, जहां विकास का एनकाउंटर हुआ था। आयोग ने पुलिसकर्मियों से पूछा भी था कि उन्होंने हाई-वे के बजाए साइड लेन का रास्ता क्यों चुना?

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गैंगस्टर विकास दुबे 10 जुलाई में कानपुर के पास एनकाउंटर में मारा गया था। (फाइल फोटो)

(पवन कुमार) यूपी के गैंगस्टर विकास दुबे एनकाउंटर की जांच कर रहे जस्टिस बीएस चौहान आयोग को इन दिनों अजीब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनके पास ऐसी शिकायतें आ रही हैं, जिनसे आयोग का कोई वास्ता ही नहीं है। कोई विकास दुबे के गिरोह से अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहा है, तो कोई अपनी जमीन को कब्जा मुक्त करने की बात कह रहा है। जवाब में आयोग ने ऐसी शिकायतों पर संबंधित लोगों को पुलिस, कोर्ट व प्रशासन के पास गुहार लगाने की बात कही है। 8 पुलिस कर्मियों की हत्या का आरोपी, गैंगस्टर विकास 10 जुलाई को कानपुर में एनकाउंटर में मारा गया था। एनकाउंटर फर्जी बताया गया तो जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आयोग गठित हुआ। दर्जनभर से ज्यादा शिकायतें मिलीं दरअसल, जबसे जांच आयोग बना है, तबसे उसे 10 से ज्यादा ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिनका एनकाउंटर से कोई लेना-देना नहीं है। एक शिकायत में तो एक शख्स ने पत्र लिखकर कहा कि विकास दुबे के मारे जाने के बाद उसके गैंग के सदस्य पुलिस मुखबिरी को लेकर उस पर संदेह कर रहे हैं और वे उसे मारना चाहते हैं। इसलिए पुलिस सुरक्षा दिलवाई जाए। वहीं, कानपुर के एक व्यक्ति ने कहा कि विकास ने उसकी जमीन पर कब्जा किया हुआ था। डर के कारण वह अपनी जमीन नहीं छुड़ा सका। चूंकि उसकी मौत हो चुकी है, इसलिए उसे उसकी जमीन वापस दिलवाई जाए। वहीं, कुछ शिकायतें विकास व उसके परिवार के लोगों द्वारा पैसे हड़पने व उन्हें रकम वापस दिलाने की मांग को लेकर भी आई है। आयोग के लिए दूसरे राज्यों के वकील भी परेशानी का सबब बने हुए हैं। मुंबई, बिहार व कई अन्य राज्यों के वकील खुद को गवाह के तौर पर जोड़ना चाहते हैं, जबकि उनका मामले से कोई संबंध नहीं है। वे न तो एनकाउंटर के समय घटनास्थल के पास थे, न ही विकास की गिरफ्तारी के समय। आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्य बीमार पड़े, जांच का काम रुका इधर, एनकाउंटर की जांच कर रहे रिटायर्ड जस्टिस बीएस चौहान बीमार पड़ गए हैं। उन्हें दिल की बीमारी होने से अस्पताल में दाखिल किया गया है। कुछ दिनों पहले उनका ऑपरेशन भी किया गया। जांच से जुड़े एक अन्य सदस्य इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज एसके अग्रवाल भी बीमार चल रहे हैं। इस वजह से फिलहाल जांच का काम रुक सा गया है। इसके पहले आयोग की टीम ने उस जगह का भी दौरा किया, जहां विकास का एनकाउंटर हुआ था। आयोग ने पुलिसकर्मियों से पूछा भी था कि उन्होंने हाई-वे के बजाए साइड लेन का रास्ता क्यों चुना? आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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