एमपी में रावण की ऊंचाई 90% तक कम, जयपुर में 70 पुरानी परंपरा टूटेगीDainik Bhaskar


कोरोना ने दशहरा उत्सव पर बड़ा असर डाला है। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में रावण के छोटे पुतले जलाए जाएंगे। राजस्थान, चंडीगढ़ में दशहरे के सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होंगे। कुछ जगहों पर मेला समितियों ने वर्चुअल टेलीकास्ट की इजाजत मांगी है। दैनिक भास्कर ने 11 शहरों में जायजा लिया कि कोरोना के चलते दशहरे के उत्सव पर क्या फर्क पड़ा है।

भोपाल: रावण का कद आधा; न बड़े जुलूस निकलेंगे, न ‘माननीय’ बुलाए जाएंगे
भोपाल में रावण के कद को कोरोना ने ‘बौना’कर दिया है। यहां छोला मंदिर के 129 साल पुराने रावण दहन उत्सव में अबकी बार महज 35 फीट ऊंचा रावण बनाया जा रहा है। पहले यह 60 फीट ऊंचा बनता था। भीड़ भी 5 हजार से ज्यादा नहीं जुट पाएगी जो हर साल एक लाख के पार हो जाती थी। शहर में न कोई बड़ा जुलूस निकलेगा, न किसी को पास भेजा जा रहा है। भेल में होने वाला दशहरा कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है।

कोलार में सबसे ऊंचा 105 फीट का रावण जलता था, जो इस बार महज 12 फीट का है। ज्यादातर जगहों पर सिर्फ सांकेतिक दहन होगा। जिसमें आयोजक ही मौजूद रहेंगे। भोपाल में कुल 80 जगहों पर पुतले जलाए जाते हैं। शहर में रावण के सबसे बड़े पुतले बनाने वाले ओम प्रताप साहू ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि इस बार भोपाल में सबसे ऊंचा ऑर्डर 35 फीट के रावण का मिला है। कुल 10 ही ऑर्डर हैं, जबकि पिछली बार 40 से ज्यादा बुकिंग थी।

इंदौर: 100 फीट का रावण इस बार 21 फीट का रह गया, आतिशबाजी भी नहीं होगी
इंदौर में दशहरा मैदान, जीपीओ, तिलक नगर, चिमनबाग मैदान, विजय नगर, उषागंज हाईस्कूल मैदान, किला मैदान, कालानी नगर में मुख्य रूप से रावण दहन होता है। लेकिन, कोरोना के चलते इस बार के आयोजन फीके रहेंगे। जिन 10 प्रमुख जगहों पर 100 फीट से ज्यादा ऊंचे रावण जलते थे, वहां इस बार रावण का कद 21 फीट रहेगा। आयोजकों का कहना है कि इस बार सिर्फ परंपरा बनी रहे, इसलिए आयोजन हो रहा है।

चिमनबाग में इस बार महज 21 फीट का रावण लगेगा। रावण के पुतले बनाने वाले शशिकांत राउत ने बताया कि उनके यहां 3 फीट से लेकर 21 फीट के रावण बनाए गए हैं। पहले हम 51 फीट तक के रावण बनाते थे। इस बार आधे ही ऑर्डर हैं। डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने बताया ज्यादा भीड़ नहीं होने के निर्देश दिए हैं। जुलूस या रैली नहीं होगी। आयोजन स्थल पर बिना मास्क के एंट्री नहीं मिलेगी।

जबलपुर: प्रतीकात्मक रावण दहन, सोशल मीडिया पर टेलीकास्ट होगा
जबलपुर में सिर्फ फुहारा पर सांकेतिक रावण दहन होगा। सोशल मीडिया पर इसका लाइव टेलीकास्ट भी किया जाएगा। समारोह का आयोजन श्री गोविंदगंज रामलीला समिति करती है। 156 साल पुरानी ये समिति हर साल रामलीला और जुलूस निकालती थी। लेकिन, इस बार जुलूस नहीं निकाला जाएगा। समिति के अध्यक्ष अनिल तिवारी और महामंत्री मनीष पाठक ने बताया कि पहले रावण, मेघनाद और कुंभकरण के 15-15 फीट के पुतले बनाए जाते थे। इस बार सिर्फ रावण का पुतला जलेगा और 2 घंटे तक आतिशबाजी होगी। एंट्री के लिए मास्क जरूरी होगा। जबलपुर में प्रमुख रूप से 9 जगहों पर दशहरा मनाया जाता है। लेकिन, बाकी मेला समितियों ने प्रशासन के साथ बैठक में दशहरे का आयोजन नहीं करने का फैसला लिया था।

जयपुर : पहली बार दशहरा मेला नहीं, मानसरोवर में वर्चुअल प्रोग्राम की तैयारी
कोरोना के कारण जयपुर में 70 साल में पहली बार रावण दहन समारोह नहीं होगा। विद्याधर नगर स्टेडियम में अट्‌टाहास करता हुआ 121 फीट का सबसे बड़ा रावण इस बार नजर नहीं आएगा। सरकार ने धारा 144 लागू कर रखी है, जिसके कारण भीड़ नहीं जुट सकती है। ऐसे में मेले का आयोजन संभव नहीं। इसी के चलते 20 प्रमुख आयोजन समितियों ने रावण दहन समारोह नहीं करने का फैसला लिया है।

मानसरोवर में आयोजकों ने रावण दहन के कार्यक्रम को वर्चुअल दिखाने की अनुमति मांगी है। इसके लिए मुख्यमंत्री ऑफिस से भी अपील की गई है। जयपुर में सबसे पहले रावण दहन एमआई रोड पर रामलीला मैदान में शुरू हुआ था। 1950 से रामलीला और रावण दहन का उत्सव होता आ रहा है। हर साल हजारों की संख्या में दर्शक आते थे, लेकिन 70 साल पुरानी रावण दहन की यह परंपरा इस साल टूटेगी।

जोधपुर: जहां रावण ने लिए थे फेरे, वहां इस बार दहन भी नहीं
जोधपुर में भी इस बार रावण दहन का सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होगा। जोधपुर में ऐसे परिवार है जो स्वयं को रावण का वंशज मानते हैं। कहते हैं कि मंदोदरी के साथ रावण का विवाह जोधपुर में हुआ था। उस समय बारात में आए, ये लोग यहीं पर बस गए। इन लोगों ने रावण का मंदिर बनवा रखा है और नियमित रूप से रावण की पूजा करते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी मनीष गोधा का कहना है कि रावण दहन भले ही न हो, लेकिन इस दिन हम शोक मनाते आए है और इस बार भी ऐसा ही होगा। शाम को हम लोग अपनी जनेऊ बदलने के बाद रावण की विधिवत पूजा अर्चना कर भोग चढ़ाएंगे। जोधपुर के मेहरानगढ़ फोर्ट की तलहटी में रावण और मंदोदरी का मंदिर स्थित है। गोधा गौत्र के ब्राह्मणों ने यह मंदिर बनवा रखा है। इस मंदिर में रावण व मंदोदरी की अलग-अलग विशाल प्रतिमाएं स्थापित है।

अजमेर में निगम के 45 लाख रु. बचेंगे, बीकानेर में बचत से कोविड की लड़ाई में मदद
बीकानेर के डॉ. करणीसिंह स्टेडियम में छह दशक से रावण दहन हो रहा था। लेकिन यहां 65 साल से चली आ रही रावण दहन की परंपरा इस बार टूट जाएगी। रावण दहन वाली जगह बने एक भवन को क्वॉरैंटाइन सेंटर में तब्दील किया जा रहा है। अजमेर में राम की सवारी के साथ रावण दहन किया जाता था। लेकिन धारा 144 के कारण यहां भी कार्यक्रम नहीं होगा। 25 साल से नगर निगम यह कार्यक्रम कराता आ रहा है। पिछले साल ही रावण का 65 फुट उंचे व कुम्भकरण व मेघनाद के 55—55 फुट उंचे पुतलों का दहन किया गया। रावण दहन समारोह आयोजक नगर निगम के उपायुक्त गजेन्द्रसिंह रलावता ने बताया कि हर साल रावण दहन, रामलीला, आतिशबाजी और गरबा आदि कार्यक्रमों पर नगर निगम की ओर से करीब 45 से 50 लाख खर्च किए जाते हैं।

चंडीगढ़ : दशहरा समितियां प्रशासन से नाराज, नहीं होगा रावण दहन
चंडीगढ़ में रावण दहन को लेकर प्रशासन और आयोजन समितियों के बीच नाराजगी है। दशहरा समितियों का कहना है कि प्रशासन ने कोरोना के समय कार्यक्रम के बारे में फैसला लेने में देर कर दी। जिस वजह से इस बार शहर में रावण दहन का कार्यक्रम नहीं हो पायगा। समितियों का कहना है कि अगर अब अनुमति दी भी जाती है तो भी इतने कम समय में वह रावण दहन की तैयारी नहीं कर सकते। इसलिए समितियों ने आयोजन से खुद ही इन्कार कर दिया। चंडीगढ़ में बराड़ा, अंबाड़ा आदि स्थानों पर 200 फीट ऊंचे रावण बनाए जाते हैं जिसके लिए 6 छह महीने पहले तैयारी होती थी।

रांची : न कोलकाता के कलाकार आतिशबाजी करेंगे, न पुतला बना रहा मुस्लिम परिवार
72 सालों में पहली बार रांची में इस साल रावण दहन नहीं होगा। 1948 में पहली बार पाकिस्तान से आए रिफ्यूजी कैंप के पंजाबी परिवारों ने यह परंपरा शुरू की थी। इस बार कोरोना को लेकर सरकार की गाइडलाइन को देखते हुए पंजाबी-हिंदू बिरादरी ने रावण दहन न करने का फैसला लिया है। पंजाबी-हिंदू बिरादरी के प्रवक्ता अरुण चावला ने बताया रांची में 10 से 12 जगहों पर रावण दहन किया जाता था। इनमें सबसे बड़ा और भव्य रावण दहन रांची के मोरहाबादी मैदान में होता था। मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि रहते थे। कोलकाता और मुंबई से सांस्कृतिक और आतिशबाजी की टीम आती थी। सबसे बड़े रावण दहन के लिए पुतला बनाने का काम बिहार के गया जिले का एक मुस्लिम परिवार करता था। लेकिन इस बार यह परंपरा टूटती नजर आ रही है।

जालंधर : पुतलों की हाइट 8 से 15 फीट, सिर्फ एक घंटे पटाखे चला सकेंगे
कोरोना के चलते जालंधर में इस बार बेहद सादे ढंग से दशहरा मनाया जाएगा। सिर्फ पंडितों से पूजा करवाएंगे। यहां महानगर के पुतला कारीगर संजीवन लाल ने बताया कि इस बार रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के 8 से 15 फीट ऊंचे पुतले ही बनाए गए हैं। डीसी घनश्याम थोरी ने बताया कि दशहरा पर पर पटाखे चलाने का समय शाम 6 से 7 बजे का समय निर्धारित किया गया है।

रायपुर में 10 फीट का पुतला बनेगा, भिलाई में कार्यक्रम रद्द
रायपुर में इस बार 10 से 12 जगह ही रावण दहन होगा। पहले छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा रावण डब्ल्यू आरएस कॉलोनी में 101 फीट का जलाया जाता था। इस बार प्रशासन ने सिर्फ 10 फीट के पुतले की अनुमति दी है। आतिशबाजी पर भी रोक है। हालांकि, रायपुर के रावण भाटा में होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शामिल होंगे। भिलाई के शांतिनगर दशहरा समिति ने कोरोना के चलते कार्यक्रम रद्द कर दिया है।

लखनऊ : रावण दहन में सिर्फ समिति के सदस्य मौजूद रहेंगे, बनारस के नाटी इमली में भरत मिलाप भी नहीं होगा
कोरोना महामारी के चलते सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक इस बार दशहरे का मेला नहीं लगेगा। इस बार लखनऊ के ऐशबाग में सिर्फ रावण दहन का पुतला तैयार किया गया है, जो 71 फीट का है। इसके दहन का सोशल मीडिया पर प्रसारण किया जाएगा। राम लीला समिति के आयोजक आदित्य द्विवेदी का कहना है- यूपी सरकार की गाइड लाइन के अनुसार सार्वजनिक समारोह में 200 लोग शामिल हो सकते हैं। इसलिए समिति के सदस्यों के साथ ही रावण दहन का आयोजन किया जाएगा। कोविड के चलते बनारस की विश्वप्रसिद्ध रामलीला, नाटी इमली का ऐतिहासिक भरत मिलाप कार्यक्रम भी नहीं होगा।

( भोपाल से अनूप दुबे, इंदौर से राजीव तिवारी, जयपुर से विष्णु शर्मा, जोधपुर से सुनील चौधरी, अजमेर से सुनील जैन, बीकानेर से अनुराग हर्ष, चंडीगढ़ से आरती,जालंधर से बलराज मोर, रायपुर से सुमन, रांची से ओम प्रताप और लखनऊ से रवि श्रीवास्तव का इनपुट)

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इंदौर में इस बार रावण का कद 21 फीट रहेगा। आयोजकों का कहना है कि इस बार आयोजन सिर्फ इसलिए किया जा रहा है, ताकि परंपरा नहीं टूटे।

कोरोना ने दशहरा उत्सव पर बड़ा असर डाला है। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में रावण के छोटे पुतले जलाए जाएंगे। राजस्थान, चंडीगढ़ में दशहरे के सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होंगे। कुछ जगहों पर मेला समितियों ने वर्चुअल टेलीकास्ट की इजाजत मांगी है। दैनिक भास्कर ने 11 शहरों में जायजा लिया कि कोरोना के चलते दशहरे के उत्सव पर क्या फर्क पड़ा है। भोपाल: रावण का कद आधा; न बड़े जुलूस निकलेंगे, न ‘माननीय’ बुलाए जाएंगे भोपाल में रावण के कद को कोरोना ने ‘बौना’कर दिया है। यहां छोला मंदिर के 129 साल पुराने रावण दहन उत्सव में अबकी बार महज 35 फीट ऊंचा रावण बनाया जा रहा है। पहले यह 60 फीट ऊंचा बनता था। भीड़ भी 5 हजार से ज्यादा नहीं जुट पाएगी जो हर साल एक लाख के पार हो जाती थी। शहर में न कोई बड़ा जुलूस निकलेगा, न किसी को पास भेजा जा रहा है। भेल में होने वाला दशहरा कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। कोलार में सबसे ऊंचा 105 फीट का रावण जलता था, जो इस बार महज 12 फीट का है। ज्यादातर जगहों पर सिर्फ सांकेतिक दहन होगा। जिसमें आयोजक ही मौजूद रहेंगे। भोपाल में कुल 80 जगहों पर पुतले जलाए जाते हैं। शहर में रावण के सबसे बड़े पुतले बनाने वाले ओम प्रताप साहू ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि इस बार भोपाल में सबसे ऊंचा ऑर्डर 35 फीट के रावण का मिला है। कुल 10 ही ऑर्डर हैं, जबकि पिछली बार 40 से ज्यादा बुकिंग थी। इंदौर: 100 फीट का रावण इस बार 21 फीट का रह गया, आतिशबाजी भी नहीं होगी इंदौर में दशहरा मैदान, जीपीओ, तिलक नगर, चिमनबाग मैदान, विजय नगर, उषागंज हाईस्कूल मैदान, किला मैदान, कालानी नगर में मुख्य रूप से रावण दहन होता है। लेकिन, कोरोना के चलते इस बार के आयोजन फीके रहेंगे। जिन 10 प्रमुख जगहों पर 100 फीट से ज्यादा ऊंचे रावण जलते थे, वहां इस बार रावण का कद 21 फीट रहेगा। आयोजकों का कहना है कि इस बार सिर्फ परंपरा बनी रहे, इसलिए आयोजन हो रहा है। चिमनबाग में इस बार महज 21 फीट का रावण लगेगा। रावण के पुतले बनाने वाले शशिकांत राउत ने बताया कि उनके यहां 3 फीट से लेकर 21 फीट के रावण बनाए गए हैं। पहले हम 51 फीट तक के रावण बनाते थे। इस बार आधे ही ऑर्डर हैं। डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने बताया ज्यादा भीड़ नहीं होने के निर्देश दिए हैं। जुलूस या रैली नहीं होगी। आयोजन स्थल पर बिना मास्क के एंट्री नहीं मिलेगी। जबलपुर: प्रतीकात्मक रावण दहन, सोशल मीडिया पर टेलीकास्ट होगा जबलपुर में सिर्फ फुहारा पर सांकेतिक रावण दहन होगा। सोशल मीडिया पर इसका लाइव टेलीकास्ट भी किया जाएगा। समारोह का आयोजन श्री गोविंदगंज रामलीला समिति करती है। 156 साल पुरानी ये समिति हर साल रामलीला और जुलूस निकालती थी। लेकिन, इस बार जुलूस नहीं निकाला जाएगा। समिति के अध्यक्ष अनिल तिवारी और महामंत्री मनीष पाठक ने बताया कि पहले रावण, मेघनाद और कुंभकरण के 15-15 फीट के पुतले बनाए जाते थे। इस बार सिर्फ रावण का पुतला जलेगा और 2 घंटे तक आतिशबाजी होगी। एंट्री के लिए मास्क जरूरी होगा। जबलपुर में प्रमुख रूप से 9 जगहों पर दशहरा मनाया जाता है। लेकिन, बाकी मेला समितियों ने प्रशासन के साथ बैठक में दशहरे का आयोजन नहीं करने का फैसला लिया था। जयपुर : पहली बार दशहरा मेला नहीं, मानसरोवर में वर्चुअल प्रोग्राम की तैयारी कोरोना के कारण जयपुर में 70 साल में पहली बार रावण दहन समारोह नहीं होगा। विद्याधर नगर स्टेडियम में अट्‌टाहास करता हुआ 121 फीट का सबसे बड़ा रावण इस बार नजर नहीं आएगा। सरकार ने धारा 144 लागू कर रखी है, जिसके कारण भीड़ नहीं जुट सकती है। ऐसे में मेले का आयोजन संभव नहीं। इसी के चलते 20 प्रमुख आयोजन समितियों ने रावण दहन समारोह नहीं करने का फैसला लिया है। मानसरोवर में आयोजकों ने रावण दहन के कार्यक्रम को वर्चुअल दिखाने की अनुमति मांगी है। इसके लिए मुख्यमंत्री ऑफिस से भी अपील की गई है। जयपुर में सबसे पहले रावण दहन एमआई रोड पर रामलीला मैदान में शुरू हुआ था। 1950 से रामलीला और रावण दहन का उत्सव होता आ रहा है। हर साल हजारों की संख्या में दर्शक आते थे, लेकिन 70 साल पुरानी रावण दहन की यह परंपरा इस साल टूटेगी। जोधपुर: जहां रावण ने लिए थे फेरे, वहां इस बार दहन भी नहीं जोधपुर में भी इस बार रावण दहन का सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होगा। जोधपुर में ऐसे परिवार है जो स्वयं को रावण का वंशज मानते हैं। कहते हैं कि मंदोदरी के साथ रावण का विवाह जोधपुर में हुआ था। उस समय बारात में आए, ये लोग यहीं पर बस गए। इन लोगों ने रावण का मंदिर बनवा रखा है और नियमित रूप से रावण की पूजा करते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी मनीष गोधा का कहना है कि रावण दहन भले ही न हो, लेकिन इस दिन हम शोक मनाते आए है और इस बार भी ऐसा ही होगा। शाम को हम लोग अपनी जनेऊ बदलने के बाद रावण की विधिवत पूजा अर्चना कर भोग चढ़ाएंगे। जोधपुर के मेहरानगढ़ फोर्ट की तलहटी में रावण और मंदोदरी का मंदिर स्थित है। गोधा गौत्र के ब्राह्मणों ने यह मंदिर बनवा रखा है। इस मंदिर में रावण व मंदोदरी की अलग-अलग विशाल प्रतिमाएं स्थापित है। अजमेर में निगम के 45 लाख रु. बचेंगे, बीकानेर में बचत से कोविड की लड़ाई में मदद बीकानेर के डॉ. करणीसिंह स्टेडियम में छह दशक से रावण दहन हो रहा था। लेकिन यहां 65 साल से चली आ रही रावण दहन की परंपरा इस बार टूट जाएगी। रावण दहन वाली जगह बने एक भवन को क्वॉरैंटाइन सेंटर में तब्दील किया जा रहा है। अजमेर में राम की सवारी के साथ रावण दहन किया जाता था। लेकिन धारा 144 के कारण यहां भी कार्यक्रम नहीं होगा। 25 साल से नगर निगम यह कार्यक्रम कराता आ रहा है। पिछले साल ही रावण का 65 फुट उंचे व कुम्भकरण व मेघनाद के 55—55 फुट उंचे पुतलों का दहन किया गया। रावण दहन समारोह आयोजक नगर निगम के उपायुक्त गजेन्द्रसिंह रलावता ने बताया कि हर साल रावण दहन, रामलीला, आतिशबाजी और गरबा आदि कार्यक्रमों पर नगर निगम की ओर से करीब 45 से 50 लाख खर्च किए जाते हैं। चंडीगढ़ : दशहरा समितियां प्रशासन से नाराज, नहीं होगा रावण दहन चंडीगढ़ में रावण दहन को लेकर प्रशासन और आयोजन समितियों के बीच नाराजगी है। दशहरा समितियों का कहना है कि प्रशासन ने कोरोना के समय कार्यक्रम के बारे में फैसला लेने में देर कर दी। जिस वजह से इस बार शहर में रावण दहन का कार्यक्रम नहीं हो पायगा। समितियों का कहना है कि अगर अब अनुमति दी भी जाती है तो भी इतने कम समय में वह रावण दहन की तैयारी नहीं कर सकते। इसलिए समितियों ने आयोजन से खुद ही इन्कार कर दिया। चंडीगढ़ में बराड़ा, अंबाड़ा आदि स्थानों पर 200 फीट ऊंचे रावण बनाए जाते हैं जिसके लिए 6 छह महीने पहले तैयारी होती थी। रांची : न कोलकाता के कलाकार आतिशबाजी करेंगे, न पुतला बना रहा मुस्लिम परिवार 72 सालों में पहली बार रांची में इस साल रावण दहन नहीं होगा। 1948 में पहली बार पाकिस्तान से आए रिफ्यूजी कैंप के पंजाबी परिवारों ने यह परंपरा शुरू की थी। इस बार कोरोना को लेकर सरकार की गाइडलाइन को देखते हुए पंजाबी-हिंदू बिरादरी ने रावण दहन न करने का फैसला लिया है। पंजाबी-हिंदू बिरादरी के प्रवक्ता अरुण चावला ने बताया रांची में 10 से 12 जगहों पर रावण दहन किया जाता था। इनमें सबसे बड़ा और भव्य रावण दहन रांची के मोरहाबादी मैदान में होता था। मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि रहते थे। कोलकाता और मुंबई से सांस्कृतिक और आतिशबाजी की टीम आती थी। सबसे बड़े रावण दहन के लिए पुतला बनाने का काम बिहार के गया जिले का एक मुस्लिम परिवार करता था। लेकिन इस बार यह परंपरा टूटती नजर आ रही है। जालंधर : पुतलों की हाइट 8 से 15 फीट, सिर्फ एक घंटे पटाखे चला सकेंगे कोरोना के चलते जालंधर में इस बार बेहद सादे ढंग से दशहरा मनाया जाएगा। सिर्फ पंडितों से पूजा करवाएंगे। यहां महानगर के पुतला कारीगर संजीवन लाल ने बताया कि इस बार रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के 8 से 15 फीट ऊंचे पुतले ही बनाए गए हैं। डीसी घनश्याम थोरी ने बताया कि दशहरा पर पर पटाखे चलाने का समय शाम 6 से 7 बजे का समय निर्धारित किया गया है। रायपुर में 10 फीट का पुतला बनेगा, भिलाई में कार्यक्रम रद्द रायपुर में इस बार 10 से 12 जगह ही रावण दहन होगा। पहले छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा रावण डब्ल्यू आरएस कॉलोनी में 101 फीट का जलाया जाता था। इस बार प्रशासन ने सिर्फ 10 फीट के पुतले की अनुमति दी है। आतिशबाजी पर भी रोक है। हालांकि, रायपुर के रावण भाटा में होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शामिल होंगे। भिलाई के शांतिनगर दशहरा समिति ने कोरोना के चलते कार्यक्रम रद्द कर दिया है। लखनऊ : रावण दहन में सिर्फ समिति के सदस्य मौजूद रहेंगे, बनारस के नाटी इमली में भरत मिलाप भी नहीं होगा कोरोना महामारी के चलते सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक इस बार दशहरे का मेला नहीं लगेगा। इस बार लखनऊ के ऐशबाग में सिर्फ रावण दहन का पुतला तैयार किया गया है, जो 71 फीट का है। इसके दहन का सोशल मीडिया पर प्रसारण किया जाएगा। राम लीला समिति के आयोजक आदित्य द्विवेदी का कहना है- यूपी सरकार की गाइड लाइन के अनुसार सार्वजनिक समारोह में 200 लोग शामिल हो सकते हैं। इसलिए समिति के सदस्यों के साथ ही रावण दहन का आयोजन किया जाएगा। कोविड के चलते बनारस की विश्वप्रसिद्ध रामलीला, नाटी इमली का ऐतिहासिक भरत मिलाप कार्यक्रम भी नहीं होगा। ( भोपाल से अनूप दुबे, इंदौर से राजीव तिवारी, जयपुर से विष्णु शर्मा, जोधपुर से सुनील चौधरी, अजमेर से सुनील जैन, बीकानेर से अनुराग हर्ष, चंडीगढ़ से आरती,जालंधर से बलराज मोर, रायपुर से सुमन, रांची से ओम प्रताप और लखनऊ से रवि श्रीवास्तव का इनपुट) आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने 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