बीकानेर में रावण नहीं जलेगा, दशहरा कमेटी रावण दहन के लिए जमा पैसों से बनाएगी क्वारैंटाइन सेंटरDainik Bhaskar


राजस्थान के बीकानेर के जिस मैदान पर शहर का सबसे बड़ा रावण का पुतला जलता था, वहां इस बार रावण तो नहीं जलेगा, लेकिन ‘रावण’ की तरह फैल रहे कोरोना को हराने की कोशिश जरूर होगी। बीकानेर के धरणीधर ट्रस्ट की दशहरा कमेटी ने तय किया है कि रावण दहन का कार्यक्रम नहीं होने से बचने वाली रकम से दशहरा मैदान में एक क्वारैंटाइन सेंटर खोला जाएगा। आयोजकों ने कहा- कोरोनावायरस भी रावण की तरह खतरनाक है और इसका खात्मा करना वर्तमान समय की जरूरत है।

आयोजक रामकिशन आचार्य ने बताया कि बीकानेर में कोरोना संक्रमण चरम पर है। ऐसे में रावण दहन के बजाय लोगों को सुरक्षा की जरूरत है। हम रावण दहन करने के बजाय बीमार लोगों के लिए क्वारैंटाइन सेंटर स्थापित कर रहे हैं। जो लोग कोरोना संक्रमित हैं, घर छोटे हैं, वे यहां आकर क्वारैंटाइन हो सकते हैं। यह सेंटर दशहरा मैदान में ही बनाया जाएगा। इसके लिए 30 बेड का भी इंतजाम कर लिया गया है।

धरणीधर मैदान पर होने वाले दशहरा समारोह में 25 से 30 हजार लोग आते थे, जो महामारी के दौरान खतरनाक होता। इस बार सरकार ने ऐसे आयोजनों पर रोक लगा दी है। इसलिए कमेटी ने सोचा कि मेले के लिए मिले चंदे का कुछ अच्छा इस्तेमाल किया जाय। इसके बाद ही क्वारैंटाइन सेंटर का विचार आया।

बीकानेर में इसलिए भी ज्यादा क्वारैंटाइन सेंटर की जरूरत
आयोजन समिति के रामकिशन कहते हैं कि बीकानेर जैसे वॉल सिटी में क्वारैंटाइन सेंटर की जरूरत भी थी। बीकानेर के परकोटे में घर बहुत छोटे-छोटे होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि पंद्रह बाई तीस के मकान में दस लोगों का परिवार रहता है। ऐसे में अगर परिवार का एक भी व्यक्ति संक्रमित होता है तो पूरे परिवार में संक्रमण फैलने का खतरा होता है। यहां कोरोना पेशेंट का होम आइसोलेशन भी बहुत मुश्किल होता है। छोटे घर होने के कारण दूसरे में इंफेक्शन का खतरा रहता है। ऐसे में कमेटी को लगा कि सरकारी कोविड सेंटर्स के अलावा एक क्वारैंटाइन सेंटर होना चाहिए।

इसके बाद दशहरे के आयोजन के लिए चंदा देने वालों से कहा गया कि वे पैसे के बजाय इस बार कमेटी को हॉस्पिटल में इस्तेमाल होने वाले बेड दें। कई लोगों ने ऐसा किया तो कुछ ने बेड की कीमत दे दी। इस तरह फिलहाल 30 बेड की व्यवस्था कर ली गई। धरणीधर ट्रस्ट यहां पर अपने पास से मरीज को खाना भी देगा। ट्रस्ट ने इसके लिए चिकित्सा विभाग और प्रशासन की मंजूरी भी ले ली है। ट्रस्ट का कहना है कि अब मदद के लिए कई लोग आगे आ रहे हैं। ऐसे में अगर बजट हुआ तो 30 बेड की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।

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बीकानेर की धरणीधर मैदान दशहरा कमेटी इसी भवन में क्वारैंटाइन सेंटर बनाएगी।

राजस्थान के बीकानेर के जिस मैदान पर शहर का सबसे बड़ा रावण का पुतला जलता था, वहां इस बार रावण तो नहीं जलेगा, लेकिन ‘रावण’ की तरह फैल रहे कोरोना को हराने की कोशिश जरूर होगी। बीकानेर के धरणीधर ट्रस्ट की दशहरा कमेटी ने तय किया है कि रावण दहन का कार्यक्रम नहीं होने से बचने वाली रकम से दशहरा मैदान में एक क्वारैंटाइन सेंटर खोला जाएगा। आयोजकों ने कहा- कोरोनावायरस भी रावण की तरह खतरनाक है और इसका खात्मा करना वर्तमान समय की जरूरत है। आयोजक रामकिशन आचार्य ने बताया कि बीकानेर में कोरोना संक्रमण चरम पर है। ऐसे में रावण दहन के बजाय लोगों को सुरक्षा की जरूरत है। हम रावण दहन करने के बजाय बीमार लोगों के लिए क्वारैंटाइन सेंटर स्थापित कर रहे हैं। जो लोग कोरोना संक्रमित हैं, घर छोटे हैं, वे यहां आकर क्वारैंटाइन हो सकते हैं। यह सेंटर दशहरा मैदान में ही बनाया जाएगा। इसके लिए 30 बेड का भी इंतजाम कर लिया गया है। धरणीधर मैदान पर होने वाले दशहरा समारोह में 25 से 30 हजार लोग आते थे, जो महामारी के दौरान खतरनाक होता। इस बार सरकार ने ऐसे आयोजनों पर रोक लगा दी है। इसलिए कमेटी ने सोचा कि मेले के लिए मिले चंदे का कुछ अच्छा इस्तेमाल किया जाय। इसके बाद ही क्वारैंटाइन सेंटर का विचार आया। बीकानेर में इसलिए भी ज्यादा क्वारैंटाइन सेंटर की जरूरत आयोजन समिति के रामकिशन कहते हैं कि बीकानेर जैसे वॉल सिटी में क्वारैंटाइन सेंटर की जरूरत भी थी। बीकानेर के परकोटे में घर बहुत छोटे-छोटे होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि पंद्रह बाई तीस के मकान में दस लोगों का परिवार रहता है। ऐसे में अगर परिवार का एक भी व्यक्ति संक्रमित होता है तो पूरे परिवार में संक्रमण फैलने का खतरा होता है। यहां कोरोना पेशेंट का होम आइसोलेशन भी बहुत मुश्किल होता है। छोटे घर होने के कारण दूसरे में इंफेक्शन का खतरा रहता है। ऐसे में कमेटी को लगा कि सरकारी कोविड सेंटर्स के अलावा एक क्वारैंटाइन सेंटर होना चाहिए। इसके बाद दशहरे के आयोजन के लिए चंदा देने वालों से कहा गया कि वे पैसे के बजाय इस बार कमेटी को हॉस्पिटल में इस्तेमाल होने वाले बेड दें। कई लोगों ने ऐसा किया तो कुछ ने बेड की कीमत दे दी। इस तरह फिलहाल 30 बेड की व्यवस्था कर ली गई। धरणीधर ट्रस्ट यहां पर अपने पास से मरीज को खाना भी देगा। ट्रस्ट ने इसके लिए चिकित्सा विभाग और प्रशासन की मंजूरी भी ले ली है। ट्रस्ट का कहना है कि अब मदद के लिए कई लोग आगे आ रहे हैं। ऐसे में अगर बजट हुआ तो 30 बेड की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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