सुप्रीम कोर्ट का वर्चुअल रैली करने के हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे, राजनीतिक दलों को फटकार- इसका जिम्मेदार कौनDainik Bhaskar


मध्य प्रदेश उपचुनाव में राजनीतिक दलों को सिर्फ वर्चुअल रैली करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्टे दे दिया। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने फिजिकल रैली पर रोक लगाते हुए सिर्फ वर्चुअल रैली करने का आदेश दिया था। चुनाव आयोग ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

चुनाव आयोग ने कहा था कि 3 नवंबर को उपचुनाव होना है। इससे कुछ समय पहले हाईकोर्ट के आदेश ने चुनाव प्रक्रिया को लाचार बना दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी रैलियों में कोरोना गाइडलाइंस लागू करवाने के लिए समय पर कदम नहीं उठाने को लेकर चुनाव आयोग की भी खिंचाई की। साथ ही राजनीतिक दलों को फटकार लगाते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया, उसके लिए आखिरकार जिम्मेदार कौन है?

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
कोर्ट ने कहा था कि चुनाव से जुड़ी सभी कैंपेनिंग वर्चुअली होनी चाहिए। अगर कहीं वर्चुअल मोड संभव नहीं हो तो डीएम की इजाजत से ही फिजिकल प्रचार किया जाएगा। डीएम को भी पहले चुनाव आयोग से मंजूरी लेनी होगी और चुनाव लड़ रहे कैंडिडेट को इतनी रकम जमा करवानी होगी कि रैली में जुटने वाले लोगों के लिए मास्क और सैनिटाइजर खरीदे जा सकें।

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मध्य प्रदेश में 3 नवंबर को 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। फोटो इंदौर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की चुनावी रैली की है।

मध्य प्रदेश उपचुनाव में राजनीतिक दलों को सिर्फ वर्चुअल रैली करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्टे दे दिया। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने फिजिकल रैली पर रोक लगाते हुए सिर्फ वर्चुअल रैली करने का आदेश दिया था। चुनाव आयोग ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। चुनाव आयोग ने कहा था कि 3 नवंबर को उपचुनाव होना है। इससे कुछ समय पहले हाईकोर्ट के आदेश ने चुनाव प्रक्रिया को लाचार बना दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी रैलियों में कोरोना गाइडलाइंस लागू करवाने के लिए समय पर कदम नहीं उठाने को लेकर चुनाव आयोग की भी खिंचाई की। साथ ही राजनीतिक दलों को फटकार लगाते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया, उसके लिए आखिरकार जिम्मेदार कौन है? हाईकोर्ट ने क्या कहा था? कोर्ट ने कहा था कि चुनाव से जुड़ी सभी कैंपेनिंग वर्चुअली होनी चाहिए। अगर कहीं वर्चुअल मोड संभव नहीं हो तो डीएम की इजाजत से ही फिजिकल प्रचार किया जाएगा। डीएम को भी पहले चुनाव आयोग से मंजूरी लेनी होगी और चुनाव लड़ रहे कैंडिडेट को इतनी रकम जमा करवानी होगी कि रैली में जुटने वाले लोगों के लिए मास्क और सैनिटाइजर खरीदे जा सकें। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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