नवंबर में 2 और दिसंबर में सिर्फ 5 दिन शादियों के मुहूर्त, 11 दिसंबर के बाद अप्रैल में आएंगे शुभ मुहूर्तDainik Bhaskar


2020 के अंतिम दो महीने नवंबर और दिसंबर में विवाह के बहुत कम मुहूर्त हैं। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इस दिन विवाह आदि शुभ कर्म फिर से शुरू हो जाएंगे। इसके बाद 11 दिसंबर तक ही विवाह के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे। क्योंकि, 15 दिसंबर से खरमास शुरू हो जाएगा। इस माह में विवाह के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। दिसबंर के बाद अप्रैल में विवाह के मुहूर्त रहेंगे।

नवंबर में 2 और दिसंबर में 5 मुहूर्त
25 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन विवाह का मुहूर्त है। देश के कई हिस्सों में इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इसलिए इस दिन विवाह और हर तरह के मांगलिक काम इस दिन कर लिए जाते हैं। लेकिन ग्रंथों में इसे अबूझ मुहूर्त नहीं कहा गया है। इस बार नवंबर में 25 और 30 तारीख को विवाह के मुहूर्त रहेंगे। इसके बाद दिसंबर में 1, 7, 8, 9 और 11 तारीख को विवाह के मुहूर्त रहेंगे।

अगले साल अप्रैल में रहेगा पहला मुहूर्त
इस साल 15 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में आ जाने से खर मास शुरू हो जाएगा। जो कि अगले साल 14 जनवरी तक रहेगा। खरमास में विवाह के लिए मुहूर्त नहीं होते हैं। इसके बाद 19 जनवरी को गुरु तारा अस्त हो जाएगा और 16 फरवरी तक अस्त ही रहेगा। इस दौरान भी विवाह के लिए मुहूर्त नहीं रहेंगे। फिर 16 फरवरी से 17 अप्रैल तक शुक्र तारा अस्त रहेगा। इस कारण 11 दिसंबर के बाद अगले 4 महीने तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहेंगे। इस तरह अगले साल 22 अप्रैल को पहला विवाह मुहूर्त रहेगा।

साल 2020 और विवाह मुहूर्त
इस साल जनवरी और फरवरी में ही ज्यादातर विवाह हुए हैं। मार्च में होलाष्टक के कारण मुहूर्त नहीं थे। इसके बाद कोरोना के चलते मई तक बहुत ही कम शादियां हुई। फिर अनलॉक शुरू होने के बाद 31 मई से 8 जून तक शुक्र तारा अस्त होने से मुहूर्त नहीं थे। जून में सिर्फ 7 दिन मुहूर्त थे। इसके बाद 1 जुलाई को एकादशी पर देवशयन हो गया और चातुर्मास लग गया। अधिक मास की वजह से इन 5 महीनों में कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। अब सीधे 25 नवंबर से ही विवाह और अन्य मांगलिक काम शुरू होंगे।

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2020 के अंतिम दो महीने नवंबर और दिसंबर में विवाह के बहुत कम मुहूर्त हैं। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इस दिन विवाह आदि शुभ कर्म फिर से शुरू हो जाएंगे। इसके बाद 11 दिसंबर तक ही विवाह के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे। क्योंकि, 15 दिसंबर से खरमास शुरू हो जाएगा। इस माह में विवाह के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। दिसबंर के बाद अप्रैल में विवाह के मुहूर्त रहेंगे। नवंबर में 2 और दिसंबर में 5 मुहूर्त 25 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन विवाह का मुहूर्त है। देश के कई हिस्सों में इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इसलिए इस दिन विवाह और हर तरह के मांगलिक काम इस दिन कर लिए जाते हैं। लेकिन ग्रंथों में इसे अबूझ मुहूर्त नहीं कहा गया है। इस बार नवंबर में 25 और 30 तारीख को विवाह के मुहूर्त रहेंगे। इसके बाद दिसंबर में 1, 7, 8, 9 और 11 तारीख को विवाह के मुहूर्त रहेंगे। अगले साल अप्रैल में रहेगा पहला मुहूर्त इस साल 15 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में आ जाने से खर मास शुरू हो जाएगा। जो कि अगले साल 14 जनवरी तक रहेगा। खरमास में विवाह के लिए मुहूर्त नहीं होते हैं। इसके बाद 19 जनवरी को गुरु तारा अस्त हो जाएगा और 16 फरवरी तक अस्त ही रहेगा। इस दौरान भी विवाह के लिए मुहूर्त नहीं रहेंगे। फिर 16 फरवरी से 17 अप्रैल तक शुक्र तारा अस्त रहेगा। इस कारण 11 दिसंबर के बाद अगले 4 महीने तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहेंगे। इस तरह अगले साल 22 अप्रैल को पहला विवाह मुहूर्त रहेगा। साल 2020 और विवाह मुहूर्त इस साल जनवरी और फरवरी में ही ज्यादातर विवाह हुए हैं। मार्च में होलाष्टक के कारण मुहूर्त नहीं थे। इसके बाद कोरोना के चलते मई तक बहुत ही कम शादियां हुई। फिर अनलॉक शुरू होने के बाद 31 मई से 8 जून तक शुक्र तारा अस्त होने से मुहूर्त नहीं थे। जून में सिर्फ 7 दिन मुहूर्त थे। इसके बाद 1 जुलाई को एकादशी पर देवशयन हो गया और चातुर्मास लग गया। अधिक मास की वजह से इन 5 महीनों में कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। अब सीधे 25 नवंबर से ही विवाह और अन्य मांगलिक काम शुरू होंगे। ये भी पढ़ें 1. अनमोल विचार:जीवन हमेशा अपने सबसे अच्छे स्वरूप में आने से पहले किसी संकट का इंतजार करता है 2. लियो टॉलस्टॉय के विचार:जब हम किसी से प्रेम करते हैं तो हम उन्हें ऐसे प्रेम करते हैं, जैसे वे हैं, ना कि जैसा हम उन्हें बनाना चाहते हैं 3. प्रेरक कथा:अपने धन का सही समय पर उपयोग कर लेना चाहिए, वरना बाद में पछताना पड़ सकता है, सदुपयोग के बिना धन व्यर्थ है 4. चाणक्य नीति:पुत्र वही है जो पिता का भक्त है, पिता वही है जो पालन करता है, मित्र वही है जिस पर विश्वास है 5. गीता:कोई भी व्यक्ति किसी भी अवस्था में पल भर भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता, सभी अपनी प्रवृत्ति के अनुसार कर्म करते हैं 6. प्रेरक कथा:दूसरों के बुरी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए, वरना हमारा मन अशांत हो जाता है, सिर्फ अपने काम में मन लगाएं आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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