डेलावेयर की 85% शराब की दुकानों के मालिक गुजराती; इन्होंने कहा- बाइडेन भारत विरोधी नहींDainik Bhaskar


अमेरिका में फिलहाल डेलावेयर राज्य की ही चर्चा है। प्रेसिडेंट इलेक्ट जो बाइडेन यहीं के रहने वाले हैं। इस स्टेट को अमेरिका में स्माल वंडर भी कहा जाता है। करीब 10 लाख की आबादी वाले इस राज्य की राजधानी डोवर है। सबसे बड़ा शहर विल्मिंगटन है। बाइडेन इसी शहर में रहते हैं। उनका कैम्पेन ऑफिस भी यहीं था।

डेलावेयर में रहने वाले भारतीय बिजनेसमैन पलाश गुप्ता के साथ बाइडेन। (फाइल)

न्यूक्लियर सप्लाई डील में भारत के समर्थन में थे बाइडेन
डेलावेयर के बिजनेसमैन पलाश गुप्ता कहते हैं- बाइडेन के कजिन मुंबई में रहते हैं। इसलिए उनकी इच्छा मुंबई जाने की है। उनका भारतीयों के प्रति हमेशा से लगाव रहा है। इस बात की पूरी उम्मीद है कि उनका लगाव भारत से आगे भी रहेगा। क्योंकि, भारत विकासशील देश है। जब बराक ओबामा प्रेसिडेंट थे, तब न्युक्लियर सप्लाई डील में बाइडेन भारत के समर्थन में थे। उन्होंने ही सिविल न्युक्लियर एग्रीमेंट पास कराया था।

डेलावेयर के ही परेश पटेल कहते हैं- बाइडेन मेरे घर से एक मील की दूरी पर रहते हैं। मैं और मेरा परिवार 36 साल से उन्हें निजी तौर पर जानते हैं। इलेक्शन में जीत के बाद बाइडेन जब डेलावेयर के चर्च में कैंडिल जलाने आए थे, तब मैं परिवार के साथ चर्च में मौजूद था। हमारे पारिवारिक रिश्ते हैं।

नरेंद्र मोदी ने 2016 में अमेरिकी संसद को संबोधित किया था। इस दौरान तब के उप राष्ट्रपति जो बाइडेन और हाउस स्पीकर पॉल रेयान भी मौजूद थे।

भारत या मोदी विरोधी नहीं है बाइडेन
परेश कहते हैं- सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रम्प ही भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे दोस्त हैं। बाइडेन और वाइस प्रेसिडेंट इलेक्ट कमला हैरिस को भारत और मोदी विरोधी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि उनका झुकाव इस्लाम की तरफ ज्यादा है। ये बात बिल्कुल गलत है। बाइडेन ने कुछ समय पहले ही कहा था कि वे भारत के साथ रिश्ते और ज्यादा मजबूत करेंगे। डेमोक्रेटिक पार्टी ने एक साल से भारत के पक्ष में कई बार आवाज उठाई है। ओबामा के समय वाइस प्रेसिडेंट रहे बाइडेन ने 2014 में मोदी का भव्य स्वागत किया था। परेश पटेल ने इलेक्शन के दौरान बाइडेन की काफी मदद की।

भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बाइडेन। (फाइल)

हिंदू त्योहारों में शामिल होते हैं बाइडेन
परेश कहते हैं- बाइडेन भारतीयों से जुड़े हुए हैं। एक ही स्टेट और शहर में रहने की वजह से हम उन्हें कई साल से जानते हैं। वे गरबा और दीपावली के दौरान हमारे कार्यक्रमों में शामिल होते थे। वे भारतीयों का स्वागत हमेशा हाथ जोड़कर करते हैं। यहां बीएपीएस मंदिर है। इसमें वे अकसर आते हैं। जहां तक कमला हैरिस का सवाल है तो उनके बारे में सब जानते हैं। उनका भारत से गहरा जुड़ाव है। उम्मीद है यह आगे ज्यादा मजबूत होगा।

डेलावेयर में 85% शराब की दुकानें गुजरातियों की
इस छोटे से राज्य में गुजरातियों का बोलबाला है। लिकर यानी शराब के 85% स्टोर्स गुजरातियों के हैं। इसकी एक लॉबी भी है। डेलावेयर के पूर्व में पेन्सिलवेनिया, उत्तर में न्यूजर्सी, पश्चिम और दक्षिण में मेरीलैंड जैसे बड़े राज्य हैं। न्यूजर्सी और डेलावेयर को जोड़ने वाला ‘डेलावेयर मेमोरियल ब्रिज’ बहुत मशहूर है।

गुजराती रायटर रेखा पटेल से हाथ मिलाते बाइडेन। रेखा डेलावेयर में ही रहती हैं। (फाइल)

पारिवारिक हैं बाइडेन
बाइडेन शांत स्वभाव और मीठा बोलने वाले व्यक्ति हैं। 77 साल की उम्र में भी उनमें युवाओं जैसा जोश है। वे पारिवारिक व्यक्ति हैं। सीनेटर रहते हुए वे रोजाना डेलावेयर से वॉशिंगटन तक की सफर ट्रेन से करते थे। ऐसा इसलिए ताकि रोज परिवार को वक्त दे सकें।

डेलावेयर में बाइडेन का घर।

बाइडेन के डेलावेयर में दो घर हैं। एक मकान दो साल पहले बाइडेन और पत्नी जील ने खरीदा था। चुनाव प्रचार के दौरान कोविड से बचने के लिए उन्होंने घर के बेसमेंट में ही ऑफिस बनाया था। इसी ऑफिस से ऑनलाइन कैम्पेन किए। लोगों ने इसे काफी पसंद भी किया था।

डेलावेयर में कोर्ट बिल्डिंग के पास लेखक रेखा पटेल।

सेल्स टैक्स नहीं देना पड़ता

डेलावेयर में कोई बड़ा ऐतिहासिक स्थल नहीं है। इसके बावजूद यह राज्य मशहूर है। यहां खरीदारी पर सेल्स टैक्स नहीं देना पड़ता। अमेरिका की ज्यादातर बड़ी कंपनियां अपने कार्पोरेट ऑफिस यहीं रजिस्टर कराती हैं। क्योंकि टैक्स कम देना पड़ता है। पड़ोसी राज्यों की तुलना में डेलावर में प्रॉपर्टी टैक्स काफी कम है। इस वजह से यहां रहने और प्रॉपर्टी खरीदने की होड़ लगी रहती है। उम्मीद करते हैं आने वाले साल अमेरिका के लिए सुनहरे होंगे.. गॉड ब्लेस अमेरिका।

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भारतीय समुदाय के लोगों से हाथ मिलाते हुए जो बाइडेन की पुरानी फोटो।

अमेरिका में फिलहाल डेलावेयर राज्य की ही चर्चा है। प्रेसिडेंट इलेक्ट जो बाइडेन यहीं के रहने वाले हैं। इस स्टेट को अमेरिका में स्माल वंडर भी कहा जाता है। करीब 10 लाख की आबादी वाले इस राज्य की राजधानी डोवर है। सबसे बड़ा शहर विल्मिंगटन है। बाइडेन इसी शहर में रहते हैं। उनका कैम्पेन ऑफिस भी यहीं था। डेलावेयर में रहने वाले भारतीय बिजनेसमैन पलाश गुप्ता के साथ बाइडेन। (फाइल)न्यूक्लियर सप्लाई डील में भारत के समर्थन में थे बाइडेन डेलावेयर के बिजनेसमैन पलाश गुप्ता कहते हैं- बाइडेन के कजिन मुंबई में रहते हैं। इसलिए उनकी इच्छा मुंबई जाने की है। उनका भारतीयों के प्रति हमेशा से लगाव रहा है। इस बात की पूरी उम्मीद है कि उनका लगाव भारत से आगे भी रहेगा। क्योंकि, भारत विकासशील देश है। जब बराक ओबामा प्रेसिडेंट थे, तब न्युक्लियर सप्लाई डील में बाइडेन भारत के समर्थन में थे। उन्होंने ही सिविल न्युक्लियर एग्रीमेंट पास कराया था। डेलावेयर के ही परेश पटेल कहते हैं- बाइडेन मेरे घर से एक मील की दूरी पर रहते हैं। मैं और मेरा परिवार 36 साल से उन्हें निजी तौर पर जानते हैं। इलेक्शन में जीत के बाद बाइडेन जब डेलावेयर के चर्च में कैंडिल जलाने आए थे, तब मैं परिवार के साथ चर्च में मौजूद था। हमारे पारिवारिक रिश्ते हैं। बाइडेन की जीत की 5 वजहें:कोरोना पर खुलकर सरकार के विरोध में आए, अपना मैसेज वोटर्स तक पहुंचाने में कामयाब रहे नरेंद्र मोदी ने 2016 में अमेरिकी संसद को संबोधित किया था। इस दौरान तब के उप राष्ट्रपति जो बाइडेन और हाउस स्पीकर पॉल रेयान भी मौजूद थे।भारत या मोदी विरोधी नहीं है बाइडेन परेश कहते हैं- सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रम्प ही भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे दोस्त हैं। बाइडेन और वाइस प्रेसिडेंट इलेक्ट कमला हैरिस को भारत और मोदी विरोधी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि उनका झुकाव इस्लाम की तरफ ज्यादा है। ये बात बिल्कुल गलत है। बाइडेन ने कुछ समय पहले ही कहा था कि वे भारत के साथ रिश्ते और ज्यादा मजबूत करेंगे। डेमोक्रेटिक पार्टी ने एक साल से भारत के पक्ष में कई बार आवाज उठाई है। ओबामा के समय वाइस प्रेसिडेंट रहे बाइडेन ने 2014 में मोदी का भव्य स्वागत किया था। परेश पटेल ने इलेक्शन के दौरान बाइडेन की काफी मदद की। जीत के बाद बाइडेन की पहली स्पीच:दौड़ते हुए मंच तक आए प्रेसिडेंट इलेक्ट, बोले- अब जख्मों को भरने का वक्त, देश को एकजुट करूंगा भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बाइडेन। (फाइल)हिंदू त्योहारों में शामिल होते हैं बाइडेन परेश कहते हैं- बाइडेन भारतीयों से जुड़े हुए हैं। एक ही स्टेट और शहर में रहने की वजह से हम उन्हें कई साल से जानते हैं। वे गरबा और दीपावली के दौरान हमारे कार्यक्रमों में शामिल होते थे। वे भारतीयों का स्वागत हमेशा हाथ जोड़कर करते हैं। यहां बीएपीएस मंदिर है। इसमें वे अकसर आते हैं। जहां तक कमला हैरिस का सवाल है तो उनके बारे में सब जानते हैं। उनका भारत से गहरा जुड़ाव है। उम्मीद है यह आगे ज्यादा मजबूत होगा। डेलावेयर में 85% शराब की दुकानें गुजरातियों की इस छोटे से राज्य में गुजरातियों का बोलबाला है। लिकर यानी शराब के 85% स्टोर्स गुजरातियों के हैं। इसकी एक लॉबी भी है। डेलावेयर के पूर्व में पेन्सिलवेनिया, उत्तर में न्यूजर्सी, पश्चिम और दक्षिण में मेरीलैंड जैसे बड़े राज्य हैं। न्यूजर्सी और डेलावेयर को जोड़ने वाला ‘डेलावेयर मेमोरियल ब्रिज’ बहुत मशहूर है। गुजराती रायटर रेखा पटेल से हाथ मिलाते बाइडेन। रेखा डेलावेयर में ही रहती हैं। (फाइल)पारिवारिक हैं बाइडेन बाइडेन शांत स्वभाव और मीठा बोलने वाले व्यक्ति हैं। 77 साल की उम्र में भी उनमें युवाओं जैसा जोश है। वे पारिवारिक व्यक्ति हैं। सीनेटर रहते हुए वे रोजाना डेलावेयर से वॉशिंगटन तक की सफर ट्रेन से करते थे। ऐसा इसलिए ताकि रोज परिवार को वक्त दे सकें। डेलावेयर में बाइडेन का घर।बाइडेन के डेलावेयर में दो घर हैं। एक मकान दो साल पहले बाइडेन और पत्नी जील ने खरीदा था। चुनाव प्रचार के दौरान कोविड से बचने के लिए उन्होंने घर के बेसमेंट में ही ऑफिस बनाया था। इसी ऑफिस से ऑनलाइन कैम्पेन किए। लोगों ने इसे काफी पसंद भी किया था। डेलावेयर में कोर्ट बिल्डिंग के पास लेखक रेखा पटेल।सेल्स टैक्स नहीं देना पड़ता डेलावेयर में कोई बड़ा ऐतिहासिक स्थल नहीं है। इसके बावजूद यह राज्य मशहूर है। यहां खरीदारी पर सेल्स टैक्स नहीं देना पड़ता। अमेरिका की ज्यादातर बड़ी कंपनियां अपने कार्पोरेट ऑफिस यहीं रजिस्टर कराती हैं। क्योंकि टैक्स कम देना पड़ता है। पड़ोसी राज्यों की तुलना में डेलावर में प्रॉपर्टी टैक्स काफी कम है। इस वजह से यहां रहने और प्रॉपर्टी खरीदने की होड़ लगी रहती है। उम्मीद करते हैं आने वाले साल अमेरिका के लिए सुनहरे होंगे.. गॉड ब्लेस अमेरिका। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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