SC ने केंद्र से कहा- फेक न्यूज के खिलाफ अपनी ताकत का इस्तेमाल करें, वरना मामला बाहरी एजेंसी को दे देंगेDainik Bhaskar


तब्लीगी जमात के मीडिया रिपोर्टिंग से जुड़े एक मामले पर केंद्र के जवाब से सुप्रीम कोर्ट नाखुश है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से कहा कि आपको टीवी और दूसरे माध्यमों के कंटेंट के मसले पर ध्यान देने के लिए एक मैकेनिज्म बनाना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो हम ये मामला किसी बाहरी एजेंसी को दे देंगे।

मीडिया संस्थान पर अल्पसंख्यकों की छवि खराब करने का आरोप

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने अगस्त में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। ये याचिका कोरोना के दौरान तब्लीगी जमात पर हुई टीवी रिपोर्टिंग को लेकर थी। मुस्लिम संगठन ने कहा था कि मीडिया संस्थान अल्पसंख्यकों की छवि को खराब कर रहे हैं और उन्हें खतरा बता रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब तक हम नहीं कहेंगे, तब तक सरकार काम नहीं करेगी।

फेक न्यूज पर केंद्र को SC के निर्देश और सुझाव

  • साफ करें एक्ट कैसे काम करेगा: मंगलवार को इसी मामले पर चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने केंद्र के जवाब पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ‘कोर्ट केंद्र के जवाब से खुश नहीं है। इसमें वह हिस्सा ही नहीं है, जिससे यह पता चले कि केंद्र के पास केबल टीवी नेटवर्क एक्ट के तहत क्या शक्तियां हैं, जिनसे ऐसी शिकायतों पर ध्यान दिया जा सके। केंद्र स्पष्ट करे कि किस तरह से इस एक्ट का इस्तेमाल केबल टीवी नेटवर्क के कंटेंट को नियंत्रित करने में किया जा सकता है।’
  • नए एफिडेविट में मैकेनिज्म के बारे में बताएं: चीफ जस्टिस ने कहा, ‘आपका एफिडेविट इस मसले पर पूरी तरह से चुप है। दूसरा मसला यह है कि आपने ऐसी शिकायतों को सुलझाने के लिए कौन से कदम उठाए हैं। मैकेनिज्म क्या है, इस पर भी आपके एफिडेविट में कुछ नहीं है। कृपया दोबारा जो एफिडेविट दें, उसमें ये सारी चीजें बताएं।’
  • आपके पास अधिकार, नहीं है तो उसे अस्तित्व में लाएं: कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले को न्यूज ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन (NBSA) या दूसरों को क्यों भेजें, जब केंद्र के पास इसे देखने का अधिकार है। अगर ऐसा कोई अधिकार अस्तित्व में नहीं है तो आप उसे अस्तित्व में लाएं। नहीं तो हम ये मामला दूसरी बाहरी एजेंसी को दे देंगे।
  • फेक न्यूज के खिलाफ क्या कदम उठा सकते हैं: कोर्ट ने कहा कि केबल टीवी नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट के तहत आपके पास अभी क्या मैकेनिज्म है और तीन हफ्तों में बताएं फेक न्यूज के खिलाफ आप इस एक्ट के तहत क्या कदम उठा सकते हैं।

पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने केंद्र पर तंज कसा था

इस मामले पर हुई पिछली सुनवाई में केंद्र ने कहा था कि अपने अनुभव के आधार पर हमने देखा है कि जब तक हम निर्देश नहीं देंगे, केंद्र एक्शन नहीं लेगा। हम तुषार मेहता की आलोचना नहीं कर रहे हैं, लेकिन सरकार तब तक काम नहीं करेगी, जब तक हम निर्देश नहीं देंगे और इसीलिए यह सिस्टम यहां पर है।

कोर्ट ने केंद्र को सुझाव दिया था कि नेशनल ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन को भी इस मामले में पार्टी बनाया जाए। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने कोर्ट से कहा था कि गलत रिपोर्टिंग की 50 शिकायतों पर हमने ध्यान दिया है। उधर, NBA ने कहा था कि हमें ऐसी 100 शिकायतें मिली हैं।

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1 मार्च से 15 मार्च के बीच दिल्ली में तब्लीगी जमात का मरकज हुआ था। इसमें देश-विदेश के करीब 5 हजार जमाती जुटे थे। मरकज को लॉकडाउन के बीच खाली करवाया गया था। इसके बाद कई राज्यों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े थे।

तब्लीगी जमात के मीडिया रिपोर्टिंग से जुड़े एक मामले पर केंद्र के जवाब से सुप्रीम कोर्ट नाखुश है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से कहा कि आपको टीवी और दूसरे माध्यमों के कंटेंट के मसले पर ध्यान देने के लिए एक मैकेनिज्म बनाना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो हम ये मामला किसी बाहरी एजेंसी को दे देंगे। मीडिया संस्थान पर अल्पसंख्यकों की छवि खराब करने का आरोप जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने अगस्त में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। ये याचिका कोरोना के दौरान तब्लीगी जमात पर हुई टीवी रिपोर्टिंग को लेकर थी। मुस्लिम संगठन ने कहा था कि मीडिया संस्थान अल्पसंख्यकों की छवि को खराब कर रहे हैं और उन्हें खतरा बता रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब तक हम नहीं कहेंगे, तब तक सरकार काम नहीं करेगी। फेक न्यूज पर केंद्र को SC के निर्देश और सुझाव साफ करें एक्ट कैसे काम करेगा: मंगलवार को इसी मामले पर चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने केंद्र के जवाब पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ‘कोर्ट केंद्र के जवाब से खुश नहीं है। इसमें वह हिस्सा ही नहीं है, जिससे यह पता चले कि केंद्र के पास केबल टीवी नेटवर्क एक्ट के तहत क्या शक्तियां हैं, जिनसे ऐसी शिकायतों पर ध्यान दिया जा सके। केंद्र स्पष्ट करे कि किस तरह से इस एक्ट का इस्तेमाल केबल टीवी नेटवर्क के कंटेंट को नियंत्रित करने में किया जा सकता है।’नए एफिडेविट में मैकेनिज्म के बारे में बताएं: चीफ जस्टिस ने कहा, ‘आपका एफिडेविट इस मसले पर पूरी तरह से चुप है। दूसरा मसला यह है कि आपने ऐसी शिकायतों को सुलझाने के लिए कौन से कदम उठाए हैं। मैकेनिज्म क्या है, इस पर भी आपके एफिडेविट में कुछ नहीं है। कृपया दोबारा जो एफिडेविट दें, उसमें ये सारी चीजें बताएं।’आपके पास अधिकार, नहीं है तो उसे अस्तित्व में लाएं: कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले को न्यूज ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन (NBSA) या दूसरों को क्यों भेजें, जब केंद्र के पास इसे देखने का अधिकार है। अगर ऐसा कोई अधिकार अस्तित्व में नहीं है तो आप उसे अस्तित्व में लाएं। नहीं तो हम ये मामला दूसरी बाहरी एजेंसी को दे देंगे।फेक न्यूज के खिलाफ क्या कदम उठा सकते हैं: कोर्ट ने कहा कि केबल टीवी नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट के तहत आपके पास अभी क्या मैकेनिज्म है और तीन हफ्तों में बताएं फेक न्यूज के खिलाफ आप इस एक्ट के तहत क्या कदम उठा सकते हैं। पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने केंद्र पर तंज कसा था इस मामले पर हुई पिछली सुनवाई में केंद्र ने कहा था कि अपने अनुभव के आधार पर हमने देखा है कि जब तक हम निर्देश नहीं देंगे, केंद्र एक्शन नहीं लेगा। हम तुषार मेहता की आलोचना नहीं कर रहे हैं, लेकिन सरकार तब तक काम नहीं करेगी, जब तक हम निर्देश नहीं देंगे और इसीलिए यह सिस्टम यहां पर है। कोर्ट ने केंद्र को सुझाव दिया था कि नेशनल ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन को भी इस मामले में पार्टी बनाया जाए। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने कोर्ट से कहा था कि गलत रिपोर्टिंग की 50 शिकायतों पर हमने ध्यान दिया है। उधर, NBA ने कहा था कि हमें ऐसी 100 शिकायतें मिली हैं। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

1 मार्च से 15 मार्च के बीच दिल्ली में तब्लीगी जमात का मरकज हुआ था। इसमें देश-विदेश के करीब 5 हजार जमाती जुटे थे। मरकज को लॉकडाउन के बीच खाली करवाया गया था। इसके बाद कई राज्यों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े थे।Read More

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