इंसान से इंसान में फैलने वाला जानलेवा वायरस सामने आया, इसके लक्षण से बचाव तक के तरीके जानिएDainik Bhaskar


दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में है। लाखों लोग मारे जा चुके हैं। करोड़ों संक्रमित हैं। इस बीच एक और वायरस ने दुनिया में दस्तक दी है। बोलिविया के ग्रामीण इलाकों में 2003 में इस वायरस से संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। 2019 में इसका प्रसार पहली बार एक से ज्यादा लोगों में देखा गया।

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल प्रिवेंशन (CDC) के रिसर्चर्स ने हाल ही में पता लगाया है कि चैपरे नाम का ये वायरस इंसान से इंसान में फैल सकता है। CDC ये पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि ये वायरस दुनिया के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है।

आइए जानते हैं आखिर ये वायरस क्या है? अब तक इसने कितने लोगों की जान ली है? इसके लक्षण क्या हैं? और इससे कैसे बच सकते हैं।

चैपरे वायरस क्या है?

चैपरे हेमोरैजिक फीवर (CHHF) उसी एरीना वायरस फैमिली से होता है जिससे इबोला वायरस है। CDC के मुताबिक आमतौर पर ये वायरस चूहों से फैलता है। संक्रमित चूहे, उसकी यूरीन और मल के साथ संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर भी ये फैल सकता है। बोलिविया के चैपरे प्रोविंस में ये वायरस सबसे पहले ऑब्जर्व किया गया। इसी प्रोविंस के नाम पर इसे चैपरे वायरस कहा जाता है।

पहली बार कब आया था? अब तक क्या इससे कोई मौत हुई है?

2003 में पहली बार बोलिविया के चैपरे प्रोविंस में CHHF का मामला सामने आया। इसने एक संक्रमित की जान भी ली। उसके बाद इस संक्रमण के नए मामले सामने नहीं आए। 16 साल बाद एक बार फिर 2019 के अंत में बोलिविया के ही चरानावी प्रोविंस में CHHF के मामले सामने आए। पांच लोगों में इसका संक्रमण मिला।

इनमें से तीन की मौत हो गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि बोलिविया की राजधानी ला पाज में दो संक्रमित लोगों से ये संक्रमण तीन स्वास्थ्यकर्मियों में फैला। बाद में एक मरीज और दो स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो गई। यानी, अब तक यह वायरस कुल चार लोगों की जान ले चुका है।

वायरस 2003 में पहली बार आया तो इसकी बात अभी क्यों हो रही है?

इस वायरस के लक्षण भले पहली बार 2003 में देखे गए लेकिन, अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के रिसर्चर्स ने हाल ही में इसकी खोज की है।

वायरस के बारे में CDC के रिसर्चर्स ने क्या खोजा है?

इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकन सोसायटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन्स एंड हाइजीन (ASTMH) की एनुअल मीटिंग हुई। इस मीटिंग में CDC के वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्होंने 2019 में बोलिविया में पाए गए वायरस का अध्ययन किया। यह वायरस आदमी से आदमी में फैलता है। इससे सबसे ज्यादा खतरा हेल्थ केयर सेक्टर में काम करने वाले लोगों को है।

ये वायरस फैलता कैसे है?

वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारे शरीर के कई फ्यूड जैसे ब्लड, यूरीन, लार और सीरम इस वायरस के फैलने में बहुत सहायक हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि बोलिविया में संक्रमित होने वाले डॉक्टरों में इन्फेक्शन इलाज के दौरान मरीज की लार से फैला। वहीं, मरीजों को घर से अस्पताल लाने के दौरान एंबुलेंसकर्मी में संक्रमण फैला। हालांकि, एंबुलेंस कर्मी की जान बच गई।

संक्रमण से ठीक हुए एक मरीज के सीमन में संक्रमण के 168 दिन बाद भी चैपरे से संबंधित कुछ RNA पाए गए। रिसर्चर्स का कहना है कि ये बताता है कि चैपरे वायरस शारीरिक संबंध बनाने पर भी फैल सकता है। ​​​​

इसके लक्षण क्या हैं और कितने दिन में नजर आने लगते हैं?

किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के 4 से 21 दिन के भीतर संक्रमण के लक्षण नजर आने लगते हैं। अब तक जो मामले सामने आए हैं उनमें चैपरे संक्रमितों में बुखार आना, सिर में दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द होना, पेट दर्द, उल्टी आना, डायरिया, मसूड़ों से खून आना, रैशेस और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण देखे गए।

क्या इसका इलाज संभव है?

चैपरे हेमोरैजिक फीवर (CHHF) का फिलहाल कोई इलाज नहीं है। अभी इस वायरस के लिए कोई स्पेसिफिक दवा नहीं है। इसके मरीजों को आम तौर पर सपोर्टिव केयर जैसे इंट्रावीनस फ्यूड दिए जाते हैं। CDC की वेबसाइट ने जो लिस्ट दी उसमें शरीर को डि-हाइड्रेशन से बचाने, अवसाद से बचने के लिए तरल पदार्थों के सेवन, पेन रिलीफ और ट्रांसफ्यूजन को मरीज के इलाज की सपोर्टिव थेरेपी के रूप में बताया गया है।

आप इससे कैसे बच सकते हैं?

चूहे, गिलहरी जैसे कुतरने वाले जानवरों को घरों और उसके आसपास से दूर रखना क्योंंकि ये इस वायरस से बड़े कैरियर हो सकते हैं। सीडीसी कहता है कि चूहे, गिलहरी जैसे जानवरों के संपर्क में आने से बचिए। घर, बिल्डिंग और उसके आसपास बने गैप और बिल को बंद कर दीजिए। इससे आप घर में कुतरने वाले जानवरों और उससे होने वाले इंफेक्शन से बच सकते हैं। हर उस खाने वाली चीज को अच्छे से साफ करें, जिसके कुतरने वाले जानवरों के संपर्क में आने की आशंका हो।

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Chapare Virus History Origin: How Did Chapare Virus Start | What Is Death Rate Of Chapare Hemorrhagic Fever

दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में है। लाखों लोग मारे जा चुके हैं। करोड़ों संक्रमित हैं। इस बीच एक और वायरस ने दुनिया में दस्तक दी है। बोलिविया के ग्रामीण इलाकों में 2003 में इस वायरस से संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। 2019 में इसका प्रसार पहली बार एक से ज्यादा लोगों में देखा गया। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल प्रिवेंशन (CDC) के रिसर्चर्स ने हाल ही में पता लगाया है कि चैपरे नाम का ये वायरस इंसान से इंसान में फैल सकता है। CDC ये पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि ये वायरस दुनिया के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है। आइए जानते हैं आखिर ये वायरस क्या है? अब तक इसने कितने लोगों की जान ली है? इसके लक्षण क्या हैं? और इससे कैसे बच सकते हैं। चैपरे वायरस क्या है? चैपरे हेमोरैजिक फीवर (CHHF) उसी एरीना वायरस फैमिली से होता है जिससे इबोला वायरस है। CDC के मुताबिक आमतौर पर ये वायरस चूहों से फैलता है। संक्रमित चूहे, उसकी यूरीन और मल के साथ संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर भी ये फैल सकता है। बोलिविया के चैपरे प्रोविंस में ये वायरस सबसे पहले ऑब्जर्व किया गया। इसी प्रोविंस के नाम पर इसे चैपरे वायरस कहा जाता है। पहली बार कब आया था? अब तक क्या इससे कोई मौत हुई है? 2003 में पहली बार बोलिविया के चैपरे प्रोविंस में CHHF का मामला सामने आया। इसने एक संक्रमित की जान भी ली। उसके बाद इस संक्रमण के नए मामले सामने नहीं आए। 16 साल बाद एक बार फिर 2019 के अंत में बोलिविया के ही चरानावी प्रोविंस में CHHF के मामले सामने आए। पांच लोगों में इसका संक्रमण मिला। इनमें से तीन की मौत हो गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि बोलिविया की राजधानी ला पाज में दो संक्रमित लोगों से ये संक्रमण तीन स्वास्थ्यकर्मियों में फैला। बाद में एक मरीज और दो स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो गई। यानी, अब तक यह वायरस कुल चार लोगों की जान ले चुका है। वायरस 2003 में पहली बार आया तो इसकी बात अभी क्यों हो रही है? इस वायरस के लक्षण भले पहली बार 2003 में देखे गए लेकिन, अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के रिसर्चर्स ने हाल ही में इसकी खोज की है। वायरस के बारे में CDC के रिसर्चर्स ने क्या खोजा है? इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकन सोसायटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन्स एंड हाइजीन (ASTMH) की एनुअल मीटिंग हुई। इस मीटिंग में CDC के वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्होंने 2019 में बोलिविया में पाए गए वायरस का अध्ययन किया। यह वायरस आदमी से आदमी में फैलता है। इससे सबसे ज्यादा खतरा हेल्थ केयर सेक्टर में काम करने वाले लोगों को है। ये वायरस फैलता कैसे है? वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारे शरीर के कई फ्यूड जैसे ब्लड, यूरीन, लार और सीरम इस वायरस के फैलने में बहुत सहायक हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि बोलिविया में संक्रमित होने वाले डॉक्टरों में इन्फेक्शन इलाज के दौरान मरीज की लार से फैला। वहीं, मरीजों को घर से अस्पताल लाने के दौरान एंबुलेंसकर्मी में संक्रमण फैला। हालांकि, एंबुलेंस कर्मी की जान बच गई। संक्रमण से ठीक हुए एक मरीज के सीमन में संक्रमण के 168 दिन बाद भी चैपरे से संबंधित कुछ RNA पाए गए। रिसर्चर्स का कहना है कि ये बताता है कि चैपरे वायरस शारीरिक संबंध बनाने पर भी फैल सकता है। ​​​​ इसके लक्षण क्या हैं और कितने दिन में नजर आने लगते हैं? किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के 4 से 21 दिन के भीतर संक्रमण के लक्षण नजर आने लगते हैं। अब तक जो मामले सामने आए हैं उनमें चैपरे संक्रमितों में बुखार आना, सिर में दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द होना, पेट दर्द, उल्टी आना, डायरिया, मसूड़ों से खून आना, रैशेस और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण देखे गए। क्या इसका इलाज संभव है? चैपरे हेमोरैजिक फीवर (CHHF) का फिलहाल कोई इलाज नहीं है। अभी इस वायरस के लिए कोई स्पेसिफिक दवा नहीं है। इसके मरीजों को आम तौर पर सपोर्टिव केयर जैसे इंट्रावीनस फ्यूड दिए जाते हैं। CDC की वेबसाइट ने जो लिस्ट दी उसमें शरीर को डि-हाइड्रेशन से बचाने, अवसाद से बचने के लिए तरल पदार्थों के सेवन, पेन रिलीफ और ट्रांसफ्यूजन को मरीज के इलाज की सपोर्टिव थेरेपी के रूप में बताया गया है। आप इससे कैसे बच सकते हैं? चूहे, गिलहरी जैसे कुतरने वाले जानवरों को घरों और उसके आसपास से दूर रखना क्योंंकि ये इस वायरस से बड़े कैरियर हो सकते हैं। सीडीसी कहता है कि चूहे, गिलहरी जैसे जानवरों के संपर्क में आने से बचिए। घर, बिल्डिंग और उसके आसपास बने गैप और बिल को बंद कर दीजिए। इससे आप घर में कुतरने वाले जानवरों और उससे होने वाले इंफेक्शन से बच सकते हैं। हर उस खाने वाली चीज को अच्छे से साफ करें, जिसके कुतरने वाले जानवरों के संपर्क में आने की आशंका हो। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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