त्रासदी ने परिवार और सरकार ने पेंशन छीनी; भूख मिटाने के लिए विधवाओं को खाना मांगना पड़ रहाDainik Bhaskar


85 साल की चिरौंजी बाई भोपाल गैस त्रासदी में सास, पति, बड़ी बेटी और दो बेटों को खो चुकी हैं। उस त्रासदी के बारे में बात करते हुए उनकी आंखें डबडबा जाती हैं। चिरौंजी बाई कहती हैं, छोटे बेटे राजवीर और बहू आरती के सहारे जिंदा थी। पिछले साल राजवीर की मौत से जीने की रही सही उम्मीद भी खत्म हो गई है।

चिरौंजी बाई का कहना है कि कभी-कभी लगता है कि मैं अब तक जिंदा कैसे हूं। किसके सहारे जियूं, समझ नहीं आता। गैस कांड ने मेरी सास 70 साल की गूंगाबाई, पति महाराज सिंह, बड़े बेटे हंसराज, बड़ी बेटी सुधा को लील लिया। चिरौंजी बाई को एक साल से पेंशन नहीं मिली है। कोरोना फैलने के दौरान पैसों की ऐसी तंगी हुई कि मांग कर पेट भरना पड़ा।

तस्वीर 24 अगस्त 2010 की है। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गैस राहत काॅलोनी में विधवा महिलाओं के बीच पहुंचे थे। उन्होंने ऐलान किया था कि इन बहनों को आजीवन 1 हजार रुपए पेंशन मिलेगी।

चिरौंजी बाई की तरह ही 4,650 महिलाएं पेंशन का इंतजार कर रही हैं। भोपाल में 36 साल पहले हुई गैस त्रासदी ने शहर की 5 हजार महिलाओं के जीवन का सहारा छीन लिया था। अब ये महिलाएं एक और त्रासदी झेल रही हैं। जिंदा रहने के लिए हर दिन जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इन महिलाओं के बुढ़ापे का इकलौता सहारा 1000 रुपए गैस पीड़ित विधवा पेंशन एक साल पहले बंद कर दी गई। सरकार ने 2011 में 1000 रुपये पेंशन का वादा किया था, लेकिन अब जिम्मेदार मंत्री इसे नकार रहे हैं।

महिलाओं ने कहा कि पेंशन नहीं मिलने से उनकी जिंदगी मुश्किल हो गई है।

तत्कालीन कमलनाथ सरकार के समय ये पेंशन बंद हुई। शिवराज सरकार के वापस आने के बाद अब तक पेंशन शुरू नहीं कराई जा सकी। हालत ये है कि गैस पीड़ित महिलाओं को कोरोना काल में कई बार खाना मांगकर पेट भरना पड़ा। इन 5 हजार महिलाओं में से 4,650 जीवित हैं। बाकी 350 महिलाएं बीमारी के कारण चल बसीं।

इन महिलाओं ने मंगलवार को करोंद में हाउसिंग बोर्ड की कालोनी के सामने पेंशन के लिए प्रदर्शन भी किया। उन्होंने हाथों में थाली-कटोरी ले रखी थी और साइन बोर्ड लिखवा रखा था, हमारी पेंशन चालू करो। ये महिलाएं हर लेवल पर आवेदन दे चुकी हैं। विरोध भी दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि बिना पेंशन के गुजारा मुश्किल हो गया है। बाहर से कोई मदद भी नहीं मिल रही है।

महिलाओं ने गैस राहत कॉलोनी के सामने हाथों में थालियां लेकर पेंशन शुरू करने की मांग की।

गैस राहत मंत्री सारंग ने कहा- महिलाओं के जल्दी ही 400 रुपए पेंशन मिलेगी

दैनिक भास्कर ने पेंशन बंद होने को लेकर भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री विश्वास सारंग ने पूछा तो उन्होंने कहा- हम उन सभी महिलाओं को समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से जोड़ रहे हैं। इन्हें 400 रुपए पेंशन दी जाएगी। जहां जीरो था, वहां अब उन्हें 400 रुपए मिलेंगे। पेंशन कब से शुरू होगी? सारंग यह नहीं बता पाए।

भास्कर के पास मौजूद है प्रशासकीय प्रतिवेदन

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 2010 में इन्हीं महिलाओं से भाई बनकर राखी बंधवाई थी। ऐलान किया था कि उन्हें आजीवन 1 हजार रुपए पेंशन दी जाएगी। कार्यक्रम में खुद विश्वास सारंग बतौर विधायक मौजूद थे, लेकिन मंत्री जी ने इसे नकारते हुए कहा कि ऐसा कोई वादा नहीं किया गया था। जानकारी गलत है।

हालांकि, दैनिक भास्कर के पास वह तस्वीर और प्रशासकीय प्रतिवेदन उपलब्ध है, जिसमें गैस पीड़ित विधवा महिलाओं को आजीवन 1000 रुपए पेंशन देने की बात कही गई थी। मध्य प्रदेश की सरकारी वेबसाइट पर भी ये जानकारी उपलब्ध है।

यह पेंशन न कमलनाथ सरकार चालू करा पाई और न ही अब शिवराज सिंह चौहान की सरकार करवा पा रही है, जबकि महिलाएं सभी स्तर पर आवेदन दे चुकी हैं।

भास्कर के पास मौजूद प्रतिवेदन, जिसमें आजीवन पेंशन देने की बात लिखी गई है।

गैस राहत के साथ राशन कार्ड भी बंद किए

कुछ गैस पीड़ित विधवा महिलाओं के राशन कार्ड बंद कर दिए हैं। इस वजह से इन महिलाओं को राशन भी नहीं मिल रहा। बताया जा रहा है कि समग्र आईडी निष्क्रिय कर दी गई है। इस वजह से पाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों में आईडी नहीं खुल रही है। इन्हें राशन नहीं दिया जा रहा है। कुछ महिलाओं को हर महीने 4 किलो गेहूं और 1 किलो चावल होता है। उनका कहना है कि जीवन यापन के लिए इतना राशन काफी नहीं है।

विधवा गैस पीड़ित महिलाओं के लिए संघर्ष कर रहे बालकृष्ण नामदेव।

इन महिलाओं के साथ अन्याय क्यों?

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने बताया कि गैस त्रासदी से पीड़ित 5 हजार से ज्यादा महिलाएं विधवा हुईं हैं। इनकी विधवा पेंशन दिसंबर-2019 से बंद है। दशहरा मैदान में 28 अगस्त 2010 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन विधवा महिलाओं से राखी बंधवाते वक्त ये वादा किया था कि आपको आजीवन पेंशन मिलेगी। आखिर ऐसा अन्याय क्यों?

पेंशन बंद होने के बाद हम सीएम हाउस गए, वहां प्रदर्शन किया, कलेक्टर को लिखकर दिया। सीएम के नाम से उन्हें ज्ञापन दिया। कोरोना में इन महिलाओं को परेशानी हुई, तो जब सरकार सबको राहत दे रही है, तो इन्हें क्यों नहीं? मेरे पास वह सीएम शिवराज सिंह चौहान का प्रशासकीय प्रतिवेदन अब भी मौजूद है, जिसमें आजीवन पेंशन देने का वादा किया गया था।

90 साल की कलावती बाई घरों में काम करने गुजारा कर रही हैं।

विधवाएं बोलीं – मुश्किल हो गई जिंदगी

  1. 85 सल की चिरौंजी बाई कहती हैं कि कोरोना काल और लॉकडाउन के दौरान एक टाइम चटनी से रोटी खाई। किसी ने मदद नहीं की। पेंशन ही उनकी सहारा थी।
  2. 70 साल लाली उर्फ कालीबाई कहती हैं कि पहले 750 रुपए मिलते थे। इसके बाद 1 हजार रुपए मिलने लगे। कोरोना काल में कोई रोटी दे जाता था, कोई सब्जी दे दे तो पेट भर पाए।
  3. 90 साल की कलावती बाई ने बताया कि किसी के घर काम कर लिया, कहीं चक्की पीस दी तो किसी ने रहम करके रोटी-सब्जी दे दी। भूखे रहकर गुजारा करना पड़ा।
70 साल की लाली उर्फ कालीबाई ने बताया कि खाने के लिए दूसरों के भरोसे हैं।

गैस त्रासदी की विधवाओं को साल 2011 से मिल रही थी पेंशन

  • भोपाल में 4,650 गैस पीड़ित विधवा महिलाएं हैं।

  • 350 महिलाओं की मौत हो चुकी है।

  • सभी महिलाओं की उम्र 70 साल से ज्यादा ही है।

  • 1000 रुपए प्रति माह गैस पीड़ित विधवा पेंशन मिलती थी।

  • 2011 से मिल रही है प्रत्येक विधवा गैस पीड़ित को पेंशन।

  • 2016 में मई से पेंशन अचानक बंद कर दी थी, इसे दिसंबर 2017 में चालू किया गया।

  • 2019 में दिसंबर से पेंशन बंद है।

  • 750 रुपए पेंशन हर महीने मिलती थी 2011 के पहले तक।

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85 साल की चिरौंजी बाई को एक साल से पेंशन नहीं मिल रही है।

85 साल की चिरौंजी बाई भोपाल गैस त्रासदी में सास, पति, बड़ी बेटी और दो बेटों को खो चुकी हैं। उस त्रासदी के बारे में बात करते हुए उनकी आंखें डबडबा जाती हैं। चिरौंजी बाई कहती हैं, छोटे बेटे राजवीर और बहू आरती के सहारे जिंदा थी। पिछले साल राजवीर की मौत से जीने की रही सही उम्मीद भी खत्म हो गई है। चिरौंजी बाई का कहना है कि कभी-कभी लगता है कि मैं अब तक जिंदा कैसे हूं। किसके सहारे जियूं, समझ नहीं आता। गैस कांड ने मेरी सास 70 साल की गूंगाबाई, पति महाराज सिंह, बड़े बेटे हंसराज, बड़ी बेटी सुधा को लील लिया। चिरौंजी बाई को एक साल से पेंशन नहीं मिली है। कोरोना फैलने के दौरान पैसों की ऐसी तंगी हुई कि मांग कर पेट भरना पड़ा। तस्वीर 24 अगस्त 2010 की है। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गैस राहत काॅलोनी में विधवा महिलाओं के बीच पहुंचे थे। उन्होंने ऐलान किया था कि इन बहनों को आजीवन 1 हजार रुपए पेंशन मिलेगी।चिरौंजी बाई की तरह ही 4,650 महिलाएं पेंशन का इंतजार कर रही हैं। भोपाल में 36 साल पहले हुई गैस त्रासदी ने शहर की 5 हजार महिलाओं के जीवन का सहारा छीन लिया था। अब ये महिलाएं एक और त्रासदी झेल रही हैं। जिंदा रहने के लिए हर दिन जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इन महिलाओं के बुढ़ापे का इकलौता सहारा 1000 रुपए गैस पीड़ित विधवा पेंशन एक साल पहले बंद कर दी गई। सरकार ने 2011 में 1000 रुपये पेंशन का वादा किया था, लेकिन अब जिम्मेदार मंत्री इसे नकार रहे हैं। महिलाओं ने कहा कि पेंशन नहीं मिलने से उनकी जिंदगी मुश्किल हो गई है।तत्कालीन कमलनाथ सरकार के समय ये पेंशन बंद हुई। शिवराज सरकार के वापस आने के बाद अब तक पेंशन शुरू नहीं कराई जा सकी। हालत ये है कि गैस पीड़ित महिलाओं को कोरोना काल में कई बार खाना मांगकर पेट भरना पड़ा। इन 5 हजार महिलाओं में से 4,650 जीवित हैं। बाकी 350 महिलाएं बीमारी के कारण चल बसीं। इन महिलाओं ने मंगलवार को करोंद में हाउसिंग बोर्ड की कालोनी के सामने पेंशन के लिए प्रदर्शन भी किया। उन्होंने हाथों में थाली-कटोरी ले रखी थी और साइन बोर्ड लिखवा रखा था, हमारी पेंशन चालू करो। ये महिलाएं हर लेवल पर आवेदन दे चुकी हैं। विरोध भी दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि बिना पेंशन के गुजारा मुश्किल हो गया है। बाहर से कोई मदद भी नहीं मिल रही है। महिलाओं ने गैस राहत कॉलोनी के सामने हाथों में थालियां लेकर पेंशन शुरू करने की मांग की।गैस राहत मंत्री सारंग ने कहा- महिलाओं के जल्दी ही 400 रुपए पेंशन मिलेगी दैनिक भास्कर ने पेंशन बंद होने को लेकर भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री विश्वास सारंग ने पूछा तो उन्होंने कहा- हम उन सभी महिलाओं को समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से जोड़ रहे हैं। इन्हें 400 रुपए पेंशन दी जाएगी। जहां जीरो था, वहां अब उन्हें 400 रुपए मिलेंगे। पेंशन कब से शुरू होगी? सारंग यह नहीं बता पाए। भास्कर के पास मौजूद है प्रशासकीय प्रतिवेदन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 2010 में इन्हीं महिलाओं से भाई बनकर राखी बंधवाई थी। ऐलान किया था कि उन्हें आजीवन 1 हजार रुपए पेंशन दी जाएगी। कार्यक्रम में खुद विश्वास सारंग बतौर विधायक मौजूद थे, लेकिन मंत्री जी ने इसे नकारते हुए कहा कि ऐसा कोई वादा नहीं किया गया था। जानकारी गलत है। हालांकि, दैनिक भास्कर के पास वह तस्वीर और प्रशासकीय प्रतिवेदन उपलब्ध है, जिसमें गैस पीड़ित विधवा महिलाओं को आजीवन 1000 रुपए पेंशन देने की बात कही गई थी। मध्य प्रदेश की सरकारी वेबसाइट पर भी ये जानकारी उपलब्ध है। यह पेंशन न कमलनाथ सरकार चालू करा पाई और न ही अब शिवराज सिंह चौहान की सरकार करवा पा रही है, जबकि महिलाएं सभी स्तर पर आवेदन दे चुकी हैं। भास्कर के पास मौजूद प्रतिवेदन, जिसमें आजीवन पेंशन देने की बात लिखी गई है।गैस राहत के साथ राशन कार्ड भी बंद किए कुछ गैस पीड़ित विधवा महिलाओं के राशन कार्ड बंद कर दिए हैं। इस वजह से इन महिलाओं को राशन भी नहीं मिल रहा। बताया जा रहा है कि समग्र आईडी निष्क्रिय कर दी गई है। इस वजह से पाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों में आईडी नहीं खुल रही है। इन्हें राशन नहीं दिया जा रहा है। कुछ महिलाओं को हर महीने 4 किलो गेहूं और 1 किलो चावल होता है। उनका कहना है कि जीवन यापन के लिए इतना राशन काफी नहीं है। विधवा गैस पीड़ित महिलाओं के लिए संघर्ष कर रहे बालकृष्ण नामदेव।इन महिलाओं के साथ अन्याय क्यों? भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने बताया कि गैस त्रासदी से पीड़ित 5 हजार से ज्यादा महिलाएं विधवा हुईं हैं। इनकी विधवा पेंशन दिसंबर-2019 से बंद है। दशहरा मैदान में 28 अगस्त 2010 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन विधवा महिलाओं से राखी बंधवाते वक्त ये वादा किया था कि आपको आजीवन पेंशन मिलेगी। आखिर ऐसा अन्याय क्यों? पेंशन बंद होने के बाद हम सीएम हाउस गए, वहां प्रदर्शन किया, कलेक्टर को लिखकर दिया। सीएम के नाम से उन्हें ज्ञापन दिया। कोरोना में इन महिलाओं को परेशानी हुई, तो जब सरकार सबको राहत दे रही है, तो इन्हें क्यों नहीं? मेरे पास वह सीएम शिवराज सिंह चौहान का प्रशासकीय प्रतिवेदन अब भी मौजूद है, जिसमें आजीवन पेंशन देने का वादा किया गया था। 90 साल की कलावती बाई घरों में काम करने गुजारा कर रही हैं।विधवाएं बोलीं – मुश्किल हो गई जिंदगी 85 सल की चिरौंजी बाई कहती हैं कि कोरोना काल और लॉकडाउन के दौरान एक टाइम चटनी से रोटी खाई। किसी ने मदद नहीं की। पेंशन ही उनकी सहारा थी।70 साल लाली उर्फ कालीबाई कहती हैं कि पहले 750 रुपए मिलते थे। इसके बाद 1 हजार रुपए मिलने लगे। कोरोना काल में कोई रोटी दे जाता था, कोई सब्जी दे दे तो पेट भर पाए।90 साल की कलावती बाई ने बताया कि किसी के घर काम कर लिया, कहीं चक्की पीस दी तो किसी ने रहम करके रोटी-सब्जी दे दी। भूखे रहकर गुजारा करना पड़ा। 70 साल की लाली उर्फ कालीबाई ने बताया कि खाने के लिए दूसरों के भरोसे हैं।गैस त्रासदी की विधवाओं को साल 2011 से मिल रही थी पेंशन भोपाल में 4,650 गैस पीड़ित विधवा महिलाएं हैं। 350 महिलाओं की मौत हो चुकी है। सभी महिलाओं की उम्र 70 साल से ज्यादा ही है। 1000 रुपए प्रति माह गैस पीड़ित विधवा पेंशन मिलती थी। 2011 से मिल रही है प्रत्येक विधवा गैस पीड़ित को पेंशन। 2016 में मई से पेंशन अचानक बंद कर दी थी, इसे दिसंबर 2017 में चालू किया गया। 2019 में दिसंबर से पेंशन बंद है। 750 रुपए पेंशन हर महीने मिलती थी 2011 के पहले तक। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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