जयशंकर बोले- LAC पर तनाव को लेकर चीन ने 5 तरह की सफाई दी, हमारे रिश्ते सबसे नाजुक मोड़ परDainik Bhaskar


लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर जारी तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीनी साजिश को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने बुधवार को बताया कि सीमा पर अपनी हरकतों को लेकर चीन 5 अलग-अलग तरह की सफाई दे चुका है। इससे दोनों देशों के रिश्तों पर बुरा असर पड़ा है। हमारे रिश्ते पिछले 30-40 साल के सबसे मुश्किल फेज से गुजर रहे हैं।

जयशंकर पूर्वी लद्दाख में सीमा पर पिछले सात महीने से जारी तनाव के बैक ड्रॉप को लेकर ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लॉवी इंस्टीट्यूट के ऑनलाइन सेशन में बोल रहे थे।

भारत सीमा पर शांति कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने कहा कि हम सीमा पर शांति और सौहार्द्र बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि हमारे बीच जैसे भी रिश्ते बचे हैं, वह आगे बढ़ते रहें। बॉर्डर पर हमारे सामने ऐसे हालात नहीं हैं, जिसके साथ हम आगे बढ़ सकते हों। उन्होंने आगे कहा कि हमारे सामने यह समस्या इसलिए है, क्योंकि 1988 से हमारे रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। हमारे अपने मुद्दे और मतभेद थे, लेकिन मोटे तौर पर संबंधों की दिशा पॉजिटिव थी।

चीन ने समझौतों का उल्लंघन किया
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 1993 से कई बार ऐसे एग्रीमेंट हो चुके हैं, जिसके मुताबिक दोनों देश बॉर्डर एरिया पर बड़ा तादाद में सेना तैनात नहीं कर सकते। चीन ने इन समझौतों का उल्लंघन किया। इसीलिए वह 5 अलग-अलग तरह के बयान देकर सफाई देने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने कहा कि चीन ने लद्दाख में बॉर्डर पर पूरी सैन्य तैयारियों के साथ 10 हजार से अधिक सैनिकों की तैनाती कर दी थी। ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ा स्वाभाविक है।

रिश्तों को ट्रैक पर लाना जरूरी
गलवान में हुए संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस घटना ने देश की भावनाओं को बदल कर रख दिया। गलवान ने हुए खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन की सेना को भारी नुकसान हुआ था, लेकिन उसने यह कभी कबूला नहीं। उन्होंने कहा कि अब हमारे सामने सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि कैसे दोनों देशों के बीच बिगड़े रिश्तों को ट्रैक पर लाया जाए।

दोनों देशों के बीच हुए एग्रीमेंट पर अमल नहीं हो रहा
जयशंकर ने दोनों देशों के बीच हुए डिप्लोमैटिक-मिलिट्री इंगेजमेंट और मॉस्को उनकी चीनी काउंटर पार्ट वांग यी से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि बातचीत में कोई दिक्‍कत नहीं है। मुद्दा यह है कि हमारे बीच जो भी समझौते हुए, उन पर अमल नहीं किया जा रहा। दोनों देशों के नेताओं ने मॉस्‍को में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) सम्‍मेलन में मुलाकात की थी। यहां दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच भी बातचीत हुई थी।

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लॉवी इंस्टीट्यूट के ऑनलाइन सेशन को संबोधित किया। उन्होंने चीन के साथ रिश्तों पर बात की। (फाइल फोटो)

लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर जारी तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीनी साजिश को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने बुधवार को बताया कि सीमा पर अपनी हरकतों को लेकर चीन 5 अलग-अलग तरह की सफाई दे चुका है। इससे दोनों देशों के रिश्तों पर बुरा असर पड़ा है। हमारे रिश्ते पिछले 30-40 साल के सबसे मुश्किल फेज से गुजर रहे हैं। जयशंकर पूर्वी लद्दाख में सीमा पर पिछले सात महीने से जारी तनाव के बैक ड्रॉप को लेकर ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लॉवी इंस्टीट्यूट के ऑनलाइन सेशन में बोल रहे थे। भारत सीमा पर शांति कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने कहा कि हम सीमा पर शांति और सौहार्द्र बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि हमारे बीच जैसे भी रिश्ते बचे हैं, वह आगे बढ़ते रहें। बॉर्डर पर हमारे सामने ऐसे हालात नहीं हैं, जिसके साथ हम आगे बढ़ सकते हों। उन्होंने आगे कहा कि हमारे सामने यह समस्या इसलिए है, क्योंकि 1988 से हमारे रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। हमारे अपने मुद्दे और मतभेद थे, लेकिन मोटे तौर पर संबंधों की दिशा पॉजिटिव थी। चीन ने समझौतों का उल्लंघन किया उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 1993 से कई बार ऐसे एग्रीमेंट हो चुके हैं, जिसके मुताबिक दोनों देश बॉर्डर एरिया पर बड़ा तादाद में सेना तैनात नहीं कर सकते। चीन ने इन समझौतों का उल्लंघन किया। इसीलिए वह 5 अलग-अलग तरह के बयान देकर सफाई देने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने कहा कि चीन ने लद्दाख में बॉर्डर पर पूरी सैन्य तैयारियों के साथ 10 हजार से अधिक सैनिकों की तैनाती कर दी थी। ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ा स्वाभाविक है। रिश्तों को ट्रैक पर लाना जरूरी गलवान में हुए संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस घटना ने देश की भावनाओं को बदल कर रख दिया। गलवान ने हुए खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन की सेना को भारी नुकसान हुआ था, लेकिन उसने यह कभी कबूला नहीं। उन्होंने कहा कि अब हमारे सामने सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि कैसे दोनों देशों के बीच बिगड़े रिश्तों को ट्रैक पर लाया जाए। दोनों देशों के बीच हुए एग्रीमेंट पर अमल नहीं हो रहा जयशंकर ने दोनों देशों के बीच हुए डिप्लोमैटिक-मिलिट्री इंगेजमेंट और मॉस्को उनकी चीनी काउंटर पार्ट वांग यी से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि बातचीत में कोई दिक्‍कत नहीं है। मुद्दा यह है कि हमारे बीच जो भी समझौते हुए, उन पर अमल नहीं किया जा रहा। दोनों देशों के नेताओं ने मॉस्‍को में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) सम्‍मेलन में मुलाकात की थी। यहां दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच भी बातचीत हुई थी। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लॉवी इंस्टीट्यूट के ऑनलाइन सेशन को संबोधित किया। उन्होंने चीन के साथ रिश्तों पर बात की। (फाइल फोटो)Read More

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