देश की पहली mRNA टेक्नीक वाली कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल को मंजूरी, पुणे की जेनोवा कंपनी ने डेवलप कीDainik Bhaskar


देश की पहली mRNA टेक्नोलॉजी से बनी वैक्सीन के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी दे दी है। मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। HGCO19 नाम की यह वैक्सीन पुणे की कंपनी जेनोवा ने डेवलप की है।

जेनोवा ने अमेरिका की कंपनी HDT बायोटेक कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर यह वैक्सीन बनाई है। वैक्सीन का जानवरों पर सफल ट्रायल किया जा चुका है। इसके डोज लगाने के बाद जानवरों में एंटीबॉडी तैयार होने का दावा किया गया है। HGCO19 को दो से आठ डिग्री सेल्सियस टेम्प्रेचर पर दो महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन भी इसी टेक्नीक पर बनी

फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन को ब्रिटेन में मंजूरी मिल चुकी है। एक और अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना ने भी वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए एप्रूवल मांगा है। ये दोनों ही वैक्सीन मैसेंजर-RNA यानी mRNA पर बेस्ड टेक्नोलॉजी पर डेवलप की गई हैं और दोनों ही 95% तक इफेक्टिव भी हैं।

इस तरह की वैक्सीन mRNA का इस्तेमाल करती हैं, जो शरीर को बताती हैं कि वायरस से लड़ने के लिए किस तरह का प्रोटीन बनाना है।

पहली बार mRNA टेक्नोलॉजी पर बेस्ड वैक्सीन बनीं

mRNA या मैसेंजर-RNA जेनेटिक कोड का एक छोटा सा हिस्सा है, जो हमारी सेल्स (कोशिकाओं) में प्रोटीन बनाती है। इसे आसान भाषा में ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब हमारे शरीर पर कोई वायरस या बैक्टीरिया हमला करता है, तो mRNA टेक्नोलॉजी हमारी सेल्स को उस वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्रोटीन बनाने का मैसेज भेजती है।

इससे हमारे इम्यून सिस्टम को जो जरूरी प्रोटीन चाहिए, वो मिल जाता है और हमारे शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे कन्वेंशनल वैक्सीन के मुकाबले ज्यादा जल्दी वैक्सीन बन सकती है। इसके साथ ही इससे शरीर की इम्युनिटी भी मजबूत होती है। ये पहली बार है जब mRNA टेक्नोलॉजी पर बेस्ड वैक्सीन दुनिया में बन रही है।

भारत वैक्सीन के बाजार का बड़ा खिलाड़ी

दुनियाभर में बेची जाने वाली वैक्सीन का 60% हिस्सा सिर्फ भारत में तैयार किया जाता है। भारत का फार्मा सेक्टर करीब 2.9 लाख करोड़ रुपए का है। पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) दुनिया की सबसे बड़ा वैक्सीन मैन्युफैक्चरर है। भारत में अभी फाइजर, भारत बायोटेक के अलावा सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोवीशील्ड के लिए इमरजेंसी अप्रूवल मांगा है।

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Coronavirus Vaccine India Latest News | Human trial of the country’s first mRNA technology, corona vaccine approved

देश की पहली mRNA टेक्नोलॉजी से बनी वैक्सीन के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी दे दी है। मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। HGCO19 नाम की यह वैक्सीन पुणे की कंपनी जेनोवा ने डेवलप की है। जेनोवा ने अमेरिका की कंपनी HDT बायोटेक कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर यह वैक्सीन बनाई है। वैक्सीन का जानवरों पर सफल ट्रायल किया जा चुका है। इसके डोज लगाने के बाद जानवरों में एंटीबॉडी तैयार होने का दावा किया गया है। HGCO19 को दो से आठ डिग्री सेल्सियस टेम्प्रेचर पर दो महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन भी इसी टेक्नीक पर बनी फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन को ब्रिटेन में मंजूरी मिल चुकी है। एक और अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना ने भी वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए एप्रूवल मांगा है। ये दोनों ही वैक्सीन मैसेंजर-RNA यानी mRNA पर बेस्ड टेक्नोलॉजी पर डेवलप की गई हैं और दोनों ही 95% तक इफेक्टिव भी हैं। इस तरह की वैक्सीन mRNA का इस्तेमाल करती हैं, जो शरीर को बताती हैं कि वायरस से लड़ने के लिए किस तरह का प्रोटीन बनाना है। पहली बार mRNA टेक्नोलॉजी पर बेस्ड वैक्सीन बनीं mRNA या मैसेंजर-RNA जेनेटिक कोड का एक छोटा सा हिस्सा है, जो हमारी सेल्स (कोशिकाओं) में प्रोटीन बनाती है। इसे आसान भाषा में ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब हमारे शरीर पर कोई वायरस या बैक्टीरिया हमला करता है, तो mRNA टेक्नोलॉजी हमारी सेल्स को उस वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्रोटीन बनाने का मैसेज भेजती है। इससे हमारे इम्यून सिस्टम को जो जरूरी प्रोटीन चाहिए, वो मिल जाता है और हमारे शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे कन्वेंशनल वैक्सीन के मुकाबले ज्यादा जल्दी वैक्सीन बन सकती है। इसके साथ ही इससे शरीर की इम्युनिटी भी मजबूत होती है। ये पहली बार है जब mRNA टेक्नोलॉजी पर बेस्ड वैक्सीन दुनिया में बन रही है। भारत वैक्सीन के बाजार का बड़ा खिलाड़ी दुनियाभर में बेची जाने वाली वैक्सीन का 60% हिस्सा सिर्फ भारत में तैयार किया जाता है। भारत का फार्मा सेक्टर करीब 2.9 लाख करोड़ रुपए का है। पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) दुनिया की सबसे बड़ा वैक्सीन मैन्युफैक्चरर है। भारत में अभी फाइजर, भारत बायोटेक के अलावा सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोवीशील्ड के लिए इमरजेंसी अप्रूवल मांगा है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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