मोदी बोले- आत्मनिर्भर भारत के लिए वर्ल्ड लेवल के प्रोडक्ट बनाना जरूरी, ग्लोबल बेस्ट को अपने यहां बनाएंDainik Bhaskar


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो पर इस साल की आखिरी मन की बात की। मोदी ने कहा कि चार दिन बाद साल बीतने वाला है। इस साल कई चुनौतियां और संकट आए, लेकिन हमने नया सामर्थ्य पैदा किया है। आत्मनिर्भर भारत के लिए वर्ल्ड लेवल के प्रोडक्ट बनाना जरूरी है। मोदी ने मन की बात में नए साल के स्वागत, गुजरते साल की सीख, आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पाद, वन्यजीव, युवाओं की सोच और कश्मीर के केसर जैसे कई मुद्दों पर बात की।

मन की बात की 7 मुख्य बातें

1. आते और जाते साल के 2 नए विचार
देश को बधाई दें: 4 दिन बाद नए साल की शुरुआत होने जा रही है। अगली मन की बात 2021 में होगी। मेरे सामने आपकी लिखी ढेर सारी चिट्‌ठियां हैं। आप जो सुझाव भेजते हैं, वह भी हैं। कई लोगों ने फोन पर अपनी बात बताई। ज्यादातर बातों में बीते वर्षों के अनुभव और नए साल के संकल्प हैं। अंजली जी ने लिखा है कि इस बार हम ये नया काम करें कि देश को बधाई दें, शुभकामनाएं दें।

गुजरते साल की नई सीख: नमो ऐप पर मुंबई के अभिषेक जी ने एक मैसेज पोस्ट किया है। कि 2020 ने जो दिखाया दिया, जो सिखाया, वह कभी सोचा ही नहीं था। ज्यादातर लोगों ने देश के सामर्थ्य की भरपूर तारीफ की है। जब कोरोना के समय लोगों ने ताली-थाली बजाकर हमारे कोरोना वॉरियर्स को सम्मान किया था, उसकी लोगों ने तारीफ की है।

2. आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की 3 बातें
स्वदेशी की मांग बढ़ी: देश में आए संकटों का हमने हिम्मत से सामना किया है। दिल्ली के अभिनव को बच्चों को गिफ्ट देने थे। वे झंडेवालान बाजार गए। अभिनव बताते हैं कि वहां दुकानदार यह बोलकर सामान बेच रहे हैं कि ये खिलौने मेड इन इंडिया हैं। लोग भी भारत में बने खिलौनों को पसंद कर रहे हैं। यह बदलाव एक साल में हुआ है। इस पैमाने को अर्थशास्त्री भी नहीं तौल सकते।

विदेशी प्रोडक्ट्स पर निर्भरता कम करें: विशाखापट्टनम से वेंकट मुरलीप्रसाद जी ने 2021 के लिए एक ABC बनाया है। ABC यानी आत्मनिर्भर भारत चार्ट। इसमें सभी चीजों की पूरी लिस्ट है, जिन्हें वे रोज इस्तेमाल करते हैं। वेंकट जी कहते हैं कि हम उन विदेशी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनके विकल्प भारत में आसानी से उपलब्ध हैं। मैं उन्हीं प्रोडक्ट का इस्तेमाल करूंगा, जिनमें हमारी मेहनत और पसीना लगा हो।

विश्वस्तरीय प्रोडक्ट्स बनाएं: वोकल फॉर लोकल आज घर-घर में गूंज रहा है। ऐसे में अब यह सुनिश्चित करने का समय है कि हमारे प्रोडक्ट्स विश्वस्तरीय हों। जो भी ग्लोबल बेस्ट है, वह हम भारत में बनाकर दिखाएं। इसके लिए हमारे उद्यमी साथियों को आगे होगा। स्टार्टअप्स को भी आगे बढ़ाना होगा।

3. तेंदुओं की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
भारत में लेपर्ड्स यानी तेंदुओं की संख्या में 2014 से 2018 के बीच 60% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। 2014 में देश में संख्या करीब 7,900 थी, वहीं 2019 में बढ़कर 12,852 हो गयी। लेपर्ड्स के बारे में जिम कार्बेट ने कहा था, ‘जिन्होंने ने तेंदुए स्वछंद रूप से घूमते नहीं देखा, वे उसकी खूबसूरती की बयां ही नहीं कर सकते।’ तेंदुए की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्यों में मध्यप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र हैं।

4. जानवरों के लिए भी संवेदनशीलता दिखाएं
मैंने तमिलनाडु में एक हृदयस्पर्शी प्रयास के बारे में पढ़ा। हम सबने इंसानों के लिए व्हीलचेयर देखी है, लेकिन कोयंबटूर की बेटी गायत्री ने अपने पिताजी के साथ एक पीड़ित डॉग के लिए व्हीलचेयर बना दी। ये तभी हो सकता है, जब व्यक्ति हर जीव के प्रति, दया और करुणा से भरा हुआ हो। उत्तर प्रदेश के कौशांबी की जेल में गायों को ठंड से बचाने के लिए पुराने और फटे कम्बलों से कवर बनाए जा रहे हैं।

5. मंदिरों के जीर्णोद्धार में जुटे युवा
एक युवा ब्रिगेड ने कर्नाटक में स्थित श्रीरंगपट्टनम के पास वीरभद्र स्वामी के एक प्राचीन शिव मंदिर का कायाकल्प कर दिया। यहां हर तरफ घास-फूस और झाड़ियां थीं कि लोगों को मंदिर दिखता तक नहीं था। युवाओं की लगन देखकर स्थानीय भी मदद के लिए आगे आए। वीकेंड्स में युवाओं ने काम किया और मंदिर के पुराने वैभव को लौटा लाए।

6. कश्मीर का केसर मशहूर
अकबर के दरबारी अबुल फजल ने कश्मीर यात्रा के बाद कहा था कि कश्मीर के केसर के खेत देखकर चिड़चिड़े और गुस्सैल लोग भी झूम उठेंगे। कश्मीरी केसर मुख्य रूप से पुलवामा, बडगाम और किश्तवाड़ जैसी जगहों पर उगाया जाता है। इसी साल मई में कश्मीरी केसर को जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी GI Tag दिया गया। इसके जरिए हम कश्मीरी केसर को एक ग्लोबली पॉपुलर ब्रांड बनाना चाहते हैं।

7. शहादत न भूलें
देश की हजारों साल पुरानी संस्कृति, सभ्यता, हमारे रीति-रिवाजों को बचाने के लिए कई बलिदान दिए गए। 27 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह जी के बेटों जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था। अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे महान परंपरा की सीख छोड़ दें, लेकिन उन्होंने गजब का साहस दिखाया। दोनों बेटों के सामने मौत मंडरा रही थी, फिर भी वे सिद्धांतों से टस-से-मस नहीं हुए।

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PM Modi in Mann Ki Baat | vivekananda birth anniversary, West Bengal Election, Subhash Chandra Bose birth anniversary, Farmers protest, Republic day, Corona Vaccine

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो पर इस साल की आखिरी मन की बात की। मोदी ने कहा कि चार दिन बाद साल बीतने वाला है। इस साल कई चुनौतियां और संकट आए, लेकिन हमने नया सामर्थ्य पैदा किया है। आत्मनिर्भर भारत के लिए वर्ल्ड लेवल के प्रोडक्ट बनाना जरूरी है। मोदी ने मन की बात में नए साल के स्वागत, गुजरते साल की सीख, आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पाद, वन्यजीव, युवाओं की सोच और कश्मीर के केसर जैसे कई मुद्दों पर बात की। मन की बात की 7 मुख्य बातें 1. आते और जाते साल के 2 नए विचारदेश को बधाई दें: 4 दिन बाद नए साल की शुरुआत होने जा रही है। अगली मन की बात 2021 में होगी। मेरे सामने आपकी लिखी ढेर सारी चिट्‌ठियां हैं। आप जो सुझाव भेजते हैं, वह भी हैं। कई लोगों ने फोन पर अपनी बात बताई। ज्यादातर बातों में बीते वर्षों के अनुभव और नए साल के संकल्प हैं। अंजली जी ने लिखा है कि इस बार हम ये नया काम करें कि देश को बधाई दें, शुभकामनाएं दें। गुजरते साल की नई सीख: नमो ऐप पर मुंबई के अभिषेक जी ने एक मैसेज पोस्ट किया है। कि 2020 ने जो दिखाया दिया, जो सिखाया, वह कभी सोचा ही नहीं था। ज्यादातर लोगों ने देश के सामर्थ्य की भरपूर तारीफ की है। जब कोरोना के समय लोगों ने ताली-थाली बजाकर हमारे कोरोना वॉरियर्स को सम्मान किया था, उसकी लोगों ने तारीफ की है। 2. आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की 3 बातेंस्वदेशी की मांग बढ़ी: देश में आए संकटों का हमने हिम्मत से सामना किया है। दिल्ली के अभिनव को बच्चों को गिफ्ट देने थे। वे झंडेवालान बाजार गए। अभिनव बताते हैं कि वहां दुकानदार यह बोलकर सामान बेच रहे हैं कि ये खिलौने मेड इन इंडिया हैं। लोग भी भारत में बने खिलौनों को पसंद कर रहे हैं। यह बदलाव एक साल में हुआ है। इस पैमाने को अर्थशास्त्री भी नहीं तौल सकते। विदेशी प्रोडक्ट्स पर निर्भरता कम करें: विशाखापट्टनम से वेंकट मुरलीप्रसाद जी ने 2021 के लिए एक ABC बनाया है। ABC यानी आत्मनिर्भर भारत चार्ट। इसमें सभी चीजों की पूरी लिस्ट है, जिन्हें वे रोज इस्तेमाल करते हैं। वेंकट जी कहते हैं कि हम उन विदेशी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनके विकल्प भारत में आसानी से उपलब्ध हैं। मैं उन्हीं प्रोडक्ट का इस्तेमाल करूंगा, जिनमें हमारी मेहनत और पसीना लगा हो। विश्वस्तरीय प्रोडक्ट्स बनाएं: वोकल फॉर लोकल आज घर-घर में गूंज रहा है। ऐसे में अब यह सुनिश्चित करने का समय है कि हमारे प्रोडक्ट्स विश्वस्तरीय हों। जो भी ग्लोबल बेस्ट है, वह हम भारत में बनाकर दिखाएं। इसके लिए हमारे उद्यमी साथियों को आगे होगा। स्टार्टअप्स को भी आगे बढ़ाना होगा। 3. तेंदुओं की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोतरी भारत में लेपर्ड्स यानी तेंदुओं की संख्या में 2014 से 2018 के बीच 60% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। 2014 में देश में संख्या करीब 7,900 थी, वहीं 2019 में बढ़कर 12,852 हो गयी। लेपर्ड्स के बारे में जिम कार्बेट ने कहा था, ‘जिन्होंने ने तेंदुए स्वछंद रूप से घूमते नहीं देखा, वे उसकी खूबसूरती की बयां ही नहीं कर सकते।’ तेंदुए की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्यों में मध्यप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र हैं। 4. जानवरों के लिए भी संवेदनशीलता दिखाएं मैंने तमिलनाडु में एक हृदयस्पर्शी प्रयास के बारे में पढ़ा। हम सबने इंसानों के लिए व्हीलचेयर देखी है, लेकिन कोयंबटूर की बेटी गायत्री ने अपने पिताजी के साथ एक पीड़ित डॉग के लिए व्हीलचेयर बना दी। ये तभी हो सकता है, जब व्यक्ति हर जीव के प्रति, दया और करुणा से भरा हुआ हो। उत्तर प्रदेश के कौशांबी की जेल में गायों को ठंड से बचाने के लिए पुराने और फटे कम्बलों से कवर बनाए जा रहे हैं। 5. मंदिरों के जीर्णोद्धार में जुटे युवा एक युवा ब्रिगेड ने कर्नाटक में स्थित श्रीरंगपट्टनम के पास वीरभद्र स्वामी के एक प्राचीन शिव मंदिर का कायाकल्प कर दिया। यहां हर तरफ घास-फूस और झाड़ियां थीं कि लोगों को मंदिर दिखता तक नहीं था। युवाओं की लगन देखकर स्थानीय भी मदद के लिए आगे आए। वीकेंड्स में युवाओं ने काम किया और मंदिर के पुराने वैभव को लौटा लाए। 6. कश्मीर का केसर मशहूर अकबर के दरबारी अबुल फजल ने कश्मीर यात्रा के बाद कहा था कि कश्मीर के केसर के खेत देखकर चिड़चिड़े और गुस्सैल लोग भी झूम उठेंगे। कश्मीरी केसर मुख्य रूप से पुलवामा, बडगाम और किश्तवाड़ जैसी जगहों पर उगाया जाता है। इसी साल मई में कश्मीरी केसर को जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी GI Tag दिया गया। इसके जरिए हम कश्मीरी केसर को एक ग्लोबली पॉपुलर ब्रांड बनाना चाहते हैं। 7. शहादत न भूलें देश की हजारों साल पुरानी संस्कृति, सभ्यता, हमारे रीति-रिवाजों को बचाने के लिए कई बलिदान दिए गए। 27 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह जी के बेटों जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था। अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे महान परंपरा की सीख छोड़ दें, लेकिन उन्होंने गजब का साहस दिखाया। दोनों बेटों के सामने मौत मंडरा रही थी, फिर भी वे सिद्धांतों से टस-से-मस नहीं हुए। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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