जरूरत पड़ने पर बच्चे को नई जिंदगी दे सकता है गर्भनाल का ब्लड, जानें कैसे इसे सेफ रख सकते हैंDainik Bhaskar


क्या आप जानते हैं कि गर्भ में बच्चा कैसे बड़ा होता है? क्या आपने कॉर्ड ब्लड या स्टीम ब्लड सेल के बारे में सुना है? नहीं, तो हम आपको बताते हैं। यह प्रेग्नेंट महिलाओं में डेवलप होने वाला ऐसा सेल है, जिससे बच्चा बड़ा होता है।

गर्भ के दौरान गर्भनाल में स्टेम सेल ब्लड फ्लो होता है। इसके दोनों हिस्सों यानी अम्बिलिकल और प्लैसेंटा से होकर यह गर्भ में पहुंचता है, जो गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास में सबसे जरूरी होता है। इसे ही कॉर्ड ब्लड या स्टेम सेल ब्लड कहते हैं। यह ब्लड सेल सिर्फ महिलाओं में गर्भ के दौरान डेवलप होता है और सिर्फ गर्भनाल में ही पाया जाता है।

कैसे बैंक में सुरक्षित रखा जाता है स्टीम सेल ब्लड?

बच्चा गर्भ में मां के साथ गर्भनाल यानी अम्बिलिकल कॉर्ड से जुड़ा रहता है। इसी के जरिए बच्चे तक न्यूट्रिशन और ऑक्सीजन पहुंचता है। डिलीवरी के दौरान अम्बिलिकल कॉर्ड को क्लैम्प किया जाता है यानी उसमें चिमटियां लगाईं जाती हैं और फिर गर्भनाल को काटकर मां और बच्चे को अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान नाल में मौजूद फ्रेश और एक्स्ट्रा स्टीम ब्लड सेल बाहर निकलने लगता है। जिसे डॉक्टर कलेक्ट कर ब्लड बैंक भेजते हैं। ब्लड बैंक में इसे डीप फ्रीजिंग टेम्प्रेचर में रखा जाता है।

लाइफलाइन साबित हो सकता है ब्लड कॉर्ड

  • गर्भ के बाद अगर बच्चे में किसी तरह का ब्लड इम्यून सिस्टम डिसऑर्डर, जैसे- लिम्फोमा और सिकल सेल डिजीज देखी जाती है, तो इससे ही बच्चे को ट्रीट किया जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर भविष्य में बच्चे के बड़े होने के बाद उसे किसी तरह की दिक्‍कत जैसे- लीवर, किडनी, लंग डैमेज होती है, तो उस दौरान भी इस सेल की मदद ली जा सकती है।
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसे बस उसी बच्चे को ही दिया जा सकता है, जिसके जन्म के वक्त इसे लिया गया हो। यानी किसी दूसरे के ब्लड सेल्स किसी और में इस्तेमाल नहीं कर सकते। लेकिन एक बार अगर आप इसे बैंक में रखवा लेते हैं, तो पूरे जीवन यह एक कवच की तरह रहेगा।
  • इसे स्टोर कराने के लिए आपको प्राइवेट ब्लड-बैंक का सहारा लेना होगा। सरकारी ब्लड बैंक इसे रिजर्व करने की सेवा अभी नहीं दे रहे हैं। ब्लड सेल बैंकिंग की सुविधा देने वाली कॉर्ड लाइफ संस्था ने हमें बताया कि एक बार ब्लड सेल कलेक्ट होने के बाद अगले 21 साल तक वे इसे प्रिजर्व रखते हैं। 21 सालों की कीमत 47 हजार है, जिसे EMI बेसिस पर भी दिया जा सकता है।

कॉर्ड ब्लड सेल इतने स्पेशल क्यों हैं?

कॉर्ड ब्लड के अंदर लाखों प्रकार के स्टेम सेल होते हैं, जिसे शरीर में किसी भी सेल के तौर पर डेवलप किया जा सकता है। एक तय सीमा के बीच स्टेम सेल बोन-मेरो में करोड़ों नए व्हाइट ब्लड सेल और रेड ब्लड सेल बनाता है और पुराने और डेड सेल्स को अलग करता है। लेकिन अगर स्टेम सेल इस प्रक्रिया में कोई गलती कर दें, तो उसके परिणाम बहुत ही गंभीर हो सकते हैं। यह ब्लड सेल डिसऑर्डर जैसे- ल्यूकेमिया की वजह बन सकता है।

1980 से पहले ल्यूकेमिया जैसी समस्याओं का कोई इलाज नहीं था बस एक विकल्प था, ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट। लेकिन यह एक बड़ी और चुनौतियों से भरी प्रॉसेस हुआ करती थी। जबकि कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट आपके खुद के कॉर्ड ब्लड से होता है। यह किसी भी पीड़ित में ल्यूकेमिया जैसी समस्याओं को तेजी से रिकवर करता है, ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की तुलना में इसमें रिस्क बहुत कम है।

कॉर्ड ब्लड बैंकिंग कैसे काम करती है?

भारत में कॉर्ड बैंकिंग शुरू हुए 3 से 4 साल हुए हैं। इसको लेकर देश में स्टडी चल रही है। ऐसे में कॉर्ड ब्लड को प्रिजर्व करने का सरकारी मैकेनिज्म अभी तो उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन प्राइवेट ब्लड बैंक ऐसी सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।

हर ब्लड बैंक का अलग-अलग प्रिजर्व रेट है। वहां ब्लड कॉर्ड को प्रिजर्व करने के बाद उसकी एक यूनीक आईडी दी जाती है और उस आईडी के साथ उसे एक फ्रीजर रैक में रखा जाता है। जरूरत पड़ने पर उस आईडी के जरिए आप अपना कॉर्ड ब्लड कलेक्ट कर पाएंगे।

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The blood coming out from the umbilical cord at birth can give your baby a new life if needed, learn about it

क्या आप जानते हैं कि गर्भ में बच्चा कैसे बड़ा होता है? क्या आपने कॉर्ड ब्लड या स्टीम ब्लड सेल के बारे में सुना है? नहीं, तो हम आपको बताते हैं। यह प्रेग्नेंट महिलाओं में डेवलप होने वाला ऐसा सेल है, जिससे बच्चा बड़ा होता है। गर्भ के दौरान गर्भनाल में स्टेम सेल ब्लड फ्लो होता है। इसके दोनों हिस्सों यानी अम्बिलिकल और प्लैसेंटा से होकर यह गर्भ में पहुंचता है, जो गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास में सबसे जरूरी होता है। इसे ही कॉर्ड ब्लड या स्टेम सेल ब्लड कहते हैं। यह ब्लड सेल सिर्फ महिलाओं में गर्भ के दौरान डेवलप होता है और सिर्फ गर्भनाल में ही पाया जाता है। कैसे बैंक में सुरक्षित रखा जाता है स्टीम सेल ब्लड? बच्चा गर्भ में मां के साथ गर्भनाल यानी अम्बिलिकल कॉर्ड से जुड़ा रहता है। इसी के जरिए बच्चे तक न्यूट्रिशन और ऑक्सीजन पहुंचता है। डिलीवरी के दौरान अम्बिलिकल कॉर्ड को क्लैम्प किया जाता है यानी उसमें चिमटियां लगाईं जाती हैं और फिर गर्भनाल को काटकर मां और बच्चे को अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान नाल में मौजूद फ्रेश और एक्स्ट्रा स्टीम ब्लड सेल बाहर निकलने लगता है। जिसे डॉक्टर कलेक्ट कर ब्लड बैंक भेजते हैं। ब्लड बैंक में इसे डीप फ्रीजिंग टेम्प्रेचर में रखा जाता है। लाइफलाइन साबित हो सकता है ब्लड कॉर्ड गर्भ के बाद अगर बच्चे में किसी तरह का ब्लड इम्यून सिस्टम डिसऑर्डर, जैसे- लिम्फोमा और सिकल सेल डिजीज देखी जाती है, तो इससे ही बच्चे को ट्रीट किया जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर भविष्य में बच्चे के बड़े होने के बाद उसे किसी तरह की दिक्‍कत जैसे- लीवर, किडनी, लंग डैमेज होती है, तो उस दौरान भी इस सेल की मदद ली जा सकती है।एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसे बस उसी बच्चे को ही दिया जा सकता है, जिसके जन्म के वक्त इसे लिया गया हो। यानी किसी दूसरे के ब्लड सेल्स किसी और में इस्तेमाल नहीं कर सकते। लेकिन एक बार अगर आप इसे बैंक में रखवा लेते हैं, तो पूरे जीवन यह एक कवच की तरह रहेगा।इसे स्टोर कराने के लिए आपको प्राइवेट ब्लड-बैंक का सहारा लेना होगा। सरकारी ब्लड बैंक इसे रिजर्व करने की सेवा अभी नहीं दे रहे हैं। ब्लड सेल बैंकिंग की सुविधा देने वाली कॉर्ड लाइफ संस्था ने हमें बताया कि एक बार ब्लड सेल कलेक्ट होने के बाद अगले 21 साल तक वे इसे प्रिजर्व रखते हैं। 21 सालों की कीमत 47 हजार है, जिसे EMI बेसिस पर भी दिया जा सकता है। कॉर्ड ब्लड सेल इतने स्पेशल क्यों हैं? कॉर्ड ब्लड के अंदर लाखों प्रकार के स्टेम सेल होते हैं, जिसे शरीर में किसी भी सेल के तौर पर डेवलप किया जा सकता है। एक तय सीमा के बीच स्टेम सेल बोन-मेरो में करोड़ों नए व्हाइट ब्लड सेल और रेड ब्लड सेल बनाता है और पुराने और डेड सेल्स को अलग करता है। लेकिन अगर स्टेम सेल इस प्रक्रिया में कोई गलती कर दें, तो उसके परिणाम बहुत ही गंभीर हो सकते हैं। यह ब्लड सेल डिसऑर्डर जैसे- ल्यूकेमिया की वजह बन सकता है। 1980 से पहले ल्यूकेमिया जैसी समस्याओं का कोई इलाज नहीं था बस एक विकल्प था, ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट। लेकिन यह एक बड़ी और चुनौतियों से भरी प्रॉसेस हुआ करती थी। जबकि कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट आपके खुद के कॉर्ड ब्लड से होता है। यह किसी भी पीड़ित में ल्यूकेमिया जैसी समस्याओं को तेजी से रिकवर करता है, ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की तुलना में इसमें रिस्क बहुत कम है। कॉर्ड ब्लड बैंकिंग कैसे काम करती है? भारत में कॉर्ड बैंकिंग शुरू हुए 3 से 4 साल हुए हैं। इसको लेकर देश में स्टडी चल रही है। ऐसे में कॉर्ड ब्लड को प्रिजर्व करने का सरकारी मैकेनिज्म अभी तो उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन प्राइवेट ब्लड बैंक ऐसी सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। हर ब्लड बैंक का अलग-अलग प्रिजर्व रेट है। वहां ब्लड कॉर्ड को प्रिजर्व करने के बाद उसकी एक यूनीक आईडी दी जाती है और उस आईडी के साथ उसे एक फ्रीजर रैक में रखा जाता है। जरूरत पड़ने पर उस आईडी के जरिए आप अपना कॉर्ड ब्लड कलेक्ट कर पाएंगे। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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