सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने कोवीशील्ड के बाद कोवैक्सिन को भी सशर्त मंजूरी देने की सिफारिश कीDainik Bhaskar


नए साल के दूसरे दिन कोरोना वैक्सीन को लेकर लगातार दूसरी अच्छी खबर आई है। कोरोना पर बनी सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने शनिवार को भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए सशर्त मंजूरी देने की सिफारिश कर दी। 24 घंटे पहले ही सीरम इंस्टिट्यूट की कोवीशील्ड को भी इसी तरह की मंजूरी दने की सिफारिश की गई थी। अब दोनों वैक्सीन का मामला ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के पास है। किसी भी दिन दोनों वैक्सीन को फाइनल अप्रूवल मिल जाएगा और देश में वैक्सीनेशन शुरू हाे सकेगा।

कोवैक्सिन के फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल्स के नतीजे 23 दिसंबर को सामने आए थे। ट्रायल्स 380 सेहतमंद बच्चों और वयस्कों पर किए गए। 3 माइक्रोग्राम और 6 माइक्रोग्राम के दो फॉर्मूले तय किए गए। दो ग्रुप्स बनाए गए। उन्हें दो डोज चार हफ्तों के अंतर से लगाए गए। फेज-2 ट्रायल्स में कोवैक्सिन ने हाई लेवल एंटीबॉडी प्रोड्यूस की। दूसरे वैक्सीनेशन के 3 महीने बाद भी सभी वॉलंटियर्स में एंटीबॉडी की संख्या बढ़ी हुई दिखी।

इन नतीजों के आधार पर कंपनी का दावा है कि कोवैक्सिन की वजह से शरीर में बनी एंटीबॉडी 6 से 12 महीने तक कायम रहती है। एंटीबॉडी यानी शरीर में मौजूद वह प्रोटीन, जो वायरस, बैक्टीरिया, फंगी और पैरासाइट्स के हमले को बेअसर कर देता है। इस वैक्सीन के अभी देश में फेज-3 के ट्रायल्स चल रहे हैं।

अब तक तीन कंपनियों ने अप्रूवल मांगा, दो को मंजूरी मिल गई
भारत में अब तक तीन फार्मा कंपनियों ने कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए अप्रूवल मांगा है। इनमें से कोवीशील्ड और कोवैक्सीन को सशर्त मंजूरी मिल गई है। कोवीशील्ड या AZD1222 को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर बनाया है। अदार पूनावाला का सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) इसके भारत में ट्रायल्स कर रहा है। 1 जनवरी को सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने इसे मंजूरी देने की सिफारिश की।

कोवैक्सिन स्वदेशी है। इसे हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के साथ मिलकर बनाया है। इसे भी मंजूरी मिल गई है। भारत बायोटेक ने 7 दिसंबर को इसके लिए अप्लाई किया था। 2 जनवरी को इसे कमेटी ने इसे मंजूरी देने की सिफारिश की। अप्रूवल मांगने वाली तीसरी वैक्सीन अमेरिकी कंपनी फाइजर की थी। फाइजर की वैक्सीन को WHO ने पूरी दुनिया में इमरजेंसी यूज के लिए अप्रूवल दिया है।

इन देशों में इमरजेंसी यूज की मंजूरी मिली

  • अमेरिका में फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन को इमरजेंसी यूज का अप्रूवल मिल चुका है।
  • ब्रिटेन ने फाइजर और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को मंजूरी दी है। यहां वैक्सीनेशन चल रहा है।
  • चीन ने हाल में स्वदेशी कंपनी सिनोफार्म की वैक्सीन को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी है।
  • रूस में भी स्वदेशी वैक्सीन स्पूतनिक V के जरिए मास वैक्सीनेशन शुरू किया जा चुका है।
  • कनाडा ने फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन को मंजूरी दी है।

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CDSCO panel recommends granting approval for restricted emergency use of Bharat Biotech’s indigenous COVID vaccine Covaxin in India

नए साल के दूसरे दिन कोरोना वैक्सीन को लेकर लगातार दूसरी अच्छी खबर आई है। कोरोना पर बनी सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने शनिवार को भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए सशर्त मंजूरी देने की सिफारिश कर दी। 24 घंटे पहले ही सीरम इंस्टिट्यूट की कोवीशील्ड को भी इसी तरह की मंजूरी दने की सिफारिश की गई थी। अब दोनों वैक्सीन का मामला ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के पास है। किसी भी दिन दोनों वैक्सीन को फाइनल अप्रूवल मिल जाएगा और देश में वैक्सीनेशन शुरू हाे सकेगा। कोवैक्सिन के फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल्स के नतीजे 23 दिसंबर को सामने आए थे। ट्रायल्स 380 सेहतमंद बच्चों और वयस्कों पर किए गए। 3 माइक्रोग्राम और 6 माइक्रोग्राम के दो फॉर्मूले तय किए गए। दो ग्रुप्स बनाए गए। उन्हें दो डोज चार हफ्तों के अंतर से लगाए गए। फेज-2 ट्रायल्स में कोवैक्सिन ने हाई लेवल एंटीबॉडी प्रोड्यूस की। दूसरे वैक्सीनेशन के 3 महीने बाद भी सभी वॉलंटियर्स में एंटीबॉडी की संख्या बढ़ी हुई दिखी। इन नतीजों के आधार पर कंपनी का दावा है कि कोवैक्सिन की वजह से शरीर में बनी एंटीबॉडी 6 से 12 महीने तक कायम रहती है। एंटीबॉडी यानी शरीर में मौजूद वह प्रोटीन, जो वायरस, बैक्टीरिया, फंगी और पैरासाइट्स के हमले को बेअसर कर देता है। इस वैक्सीन के अभी देश में फेज-3 के ट्रायल्स चल रहे हैं। अब तक तीन कंपनियों ने अप्रूवल मांगा, दो को मंजूरी मिल गई भारत में अब तक तीन फार्मा कंपनियों ने कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए अप्रूवल मांगा है। इनमें से कोवीशील्ड और कोवैक्सीन को सशर्त मंजूरी मिल गई है। कोवीशील्ड या AZD1222 को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर बनाया है। अदार पूनावाला का सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) इसके भारत में ट्रायल्स कर रहा है। 1 जनवरी को सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने इसे मंजूरी देने की सिफारिश की। कोवैक्सिन स्वदेशी है। इसे हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के साथ मिलकर बनाया है। इसे भी मंजूरी मिल गई है। भारत बायोटेक ने 7 दिसंबर को इसके लिए अप्लाई किया था। 2 जनवरी को इसे कमेटी ने इसे मंजूरी देने की सिफारिश की। अप्रूवल मांगने वाली तीसरी वैक्सीन अमेरिकी कंपनी फाइजर की थी। फाइजर की वैक्सीन को WHO ने पूरी दुनिया में इमरजेंसी यूज के लिए अप्रूवल दिया है। इन देशों में इमरजेंसी यूज की मंजूरी मिली अमेरिका में फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन को इमरजेंसी यूज का अप्रूवल मिल चुका है।ब्रिटेन ने फाइजर और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को मंजूरी दी है। यहां वैक्सीनेशन चल रहा है।चीन ने हाल में स्वदेशी कंपनी सिनोफार्म की वैक्सीन को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी है।रूस में भी स्वदेशी वैक्सीन स्पूतनिक V के जरिए मास वैक्सीनेशन शुरू किया जा चुका है।कनाडा ने फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन को मंजूरी दी है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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