दो वैक्सीन की मंजूरी के बाद अब जल्द शुरू होगा वैक्सीनेशन; लेना या न लेना आपकी मर्जी परDainik Bhaskar


भारत में कोवीशील्ड और कोवैक्सिन को इमरजेंसी अप्रूवल मिल गया है। अब जल्द ही कोरोना वैक्सीनेशन शुरू होगा। लोगों को वैक्सीन से संबंधित पूरी जानकारी मुहैया कराने के लिए सरकार ने कुछ सवाल-जवाब (FAQ) जारी किए हैं। इनके मुताबिक वैक्सीन लेना अनिवार्य नहीं है। यह आपकी मर्जी पर निर्भर होगा। यानी अगर सपा नेता अखिलेश यादव कह रहे हैं कि वे वैक्सीन नहीं लगवाएंगे, तो वैसा ऐसा कर सकते हैं। साथ ही दूसरे डोज के दो सप्ताह बाद शरीर में कोरोना के खिलाफ सुरक्षा देने लायक एंटी बॉडी तैयार होंगे। आगे पढ़ें सभी सवाल-जवाब…

वैक्सीन कब से शुरू होगा?
बहुत जल्द। दुनिया के 18 देशों में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके बाद अब जल्द ही भारत में यह प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट www.mohfw.gov.in पर विजिट करें।

क्या सभी को कोरोना वैक्सीन एक साथ लगेगी?
सरकार ने वैक्सीन की उपलब्धता के हिसाब से शुरुआती चरण के लिए कुछ प्राथमिकता समूहों की पहचान की है। पहले ग्रुप में हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल हैं। दूसरे समूह में 50 साल से ऊपर के लोग शामिल हैं। इसमें 50 से नीचे के वे लोग भी हैं, जो पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। यह मिलाकर 30 करोड़ लोग होते हैं, जिनका पहले चरण में वैक्सीनेशन किया जाएगा।

क्या वैक्सीन लगवाना जरूरी है?
नहीं। वैक्सीन लगवाना या न लगवाना, आपकी इच्छा पर निर्भर करेगा। हालांकि, यह सलाह दी जाती है कि जो भी वैक्सीन लें वे इसका पूरा कोर्स लें, ताकि उन्हें वायरस से पूरी सुरक्षा मिले। साथ ही उनसे संक्रमण फैलने की आशंका कम हो।

वैक्सीन इतने कम समय में तैयार की गई है? क्या यह सुरक्षित होगी?
सुरक्षा और असर पर नियामक संस्थाओं की स्वीकृति मिलने के बाद ही देश में किसी वैक्सीन की इजाजत दी जाएगी। देश की टॉप वैक्सीन साइंटिस्ट डॉ. गगनदीप कंग के मुताबिक, जल्दबाजी का यह मतलब नहीं है कि बिना जांच-पड़ताल के लिए रेगुलेटर ने इसकी मंजूरी दे दी है। रेगुलेटर ने इन वैक्सीन के रिजल्ट्स को जांचा-परखा है। उसके बाद ही इसे इमरजेंसी अप्रूवल दिया है।

वहीं, ICMR के पूर्व प्रमुख डॉ. वीएम कटोच का कहना है कि वैक्सीन को अप्रूव करने की पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है। जिन्हें वैक्सीन लगेगी, उनकी आगे भी निगरानी होगी। अगर कोई साइड-इफेक्ट दिखता है तो उसका उपचार होगा। कुल मिलाकर यह समझ लीजिए कि यह सबकुछ प्रक्रिया का हिस्सा है। जल्द वैक्सीन आने का मतलब यह नहीं है कि लापरवाही बरती गई है।

क्या उस व्यक्ति को भी वैक्सीन लगवानी चाहिए जिसे अभी कोरोना है (पुष्ट या आशंका)?
नहीं। जिन्हें अभी कोरोना है या कोरोना होने की आशंका है, उन्हें लक्षण ठीक होने के 14 दिन बाद वैक्सीन लगेगी। अभी तो वे बाहर निकलेंगे तो संक्रमण फैलेगा। भारत बायोटेक की ज्वॉइंट एमडी सुचित्रा एल्ला के मुताबिक वैक्सीन का असर दिखने में 45 से 60 दिन भी लग सकते हैं। इसका मतलब है कि वैक्सीन लगने के बाद भी मास्क तो पहनना ही होगा।

क्या कोरोना से रिकवर हो चुके लोगों को भी वैक्सीन लेनी होगी?
हां। कोरोना से रिकवर हो चुके लोगों को भी वैक्सीन लेने की सलाह दी गई है। इससे उनका इम्यून सिस्टम और भी मजबूत होगा। उन्हें रीइंफेक्शन का खतरा कम होगा। दरअसल, किसे कोरोना रीइंफेक्शन हो सकता है और किसे नहीं, इस बात को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।

भोपाल में कोरोना वार्ड में सेवाएं दे रहे डॉ. तेजप्रताप का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति में वायरल लोड कम रहा होगा तो उसमें एंटीबॉडी भी कम ही होगी। ऐसे में उसे रीइंफेक्ट होने का खतरा बना रहता है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि शरीर में एंटीबॉडी कितनी बनी है।

कोवैक्सिन और कोवीशील्ड को चुने जाने की वजह क्या बनी है?
कोवीशील्ड को ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर बनाई है। यह वैक्सीन भारत में पुणे में अदार पूनावाला का सीरम इंस्टीट्यूट बना रहा है। ब्राजील और ब्रिटेन में इसके फेज-3 ट्रायल्स हुए थे और इसमें यह 90% तक असरदार पाई गई है।

इसी तरह कोवैक्सिन को भारतीय कंपनी भारत बायोटेक ने ICMR और NIV के साथ मिलकर बनाया है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरे वायरस के खिलाफ असरदार है। इससे कोरोना के नए स्ट्रेन सामने आने के बाद भी इसके असर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं, फेज-1 और फेज-2 के क्लीनिकल ट्रायल्स में यह काफी सुरक्षित और असरदार साबित हुई है।

क्या भारत के पास वैक्सीन को स्टोर करने और इसे देशभर में लगवाने की क्षमता है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीनेशन प्रोग्राम में से एक को चलाता है। भारत के पास पूरी क्षमता है। यहां हर साल 2.6 करोड़ नवजात और 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं को टीके लग रहे हैं। यह पहला मौका है जब भारत में वयस्कों को वैक्सीनेट किया जा रहा है। इसके लिए पूरे देश में ड्राई रन भी किया गया है, ताकि जब वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू हो, तब किसी तरह की दिक्कत न हो।

कैसे पता चलेगा कि आपको वैक्सीन लगेगी या नहीं?
जो वैक्सीन लगवाने के योग्य होंगे उन्हें मोबाइल पर मैसेज मिलेगा। इसमें जानकारी होगी कि उन्हें कहां और कब वैक्सीन लगाई जाएगी। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में असुविधा न हो, इसके लिए यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

क्या स्वास्थ्य विभाग में रजिस्ट्रेशन कराए बिना वैक्सीन ले सकते हैं?
नहीं। वैक्सीन लेने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद ही पता चलेगा कि वैक्सीन कहां लगेगी।

रजिस्ट्रेशन के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट वैध होंगे?
इनमें से किसी एक आई कार्ड और फोटो के साथ रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा: आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, श्रम मंत्रालय द्वारा जारी हेल्थ इंश्योरेंस स्मार्ट कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, एमपी, एमएलए या एमएलसी द्वारा जारी आधिकारिक पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक/पोस्टऑफिस पासबुक, पासपोर्ट, पेंशन डॉक्यूमेंट, केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी सर्विस कार्ड, वोटर आईडी।

वैक्सीन लेने के लिए सेंटर पर कौन-सी आईडी दिखानी होगी?
रजिस्ट्रेशन में जो आईडी कार्ड दिया गया उसे वैक्सीन लगवाने के लिए भी साथ ले जाना होगा।

तारीख का पता कैसे चलेगा?
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद योग्य उम्मीदवार को मोबाइल पर मैसेज से जानकारी दी जाएगी।

क्या वैक्सीन लेने वाले को कोई प्रमाण पत्र मिलेगा?
वैक्सीन लेने के बाद पहले मैसेज द्वारा जानकारी दी जाएगी। कोर्स पूरा होने के बाद QR कोड आधारित सर्टिफिकेट रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा।

क्या डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को टीका लेना होगा?
हां, वे ज्यादा जोखिम में हैं। उन्हें टीका लेने की जरूरत है।

क्या सेंटर पर टीका लेने के पहले या बाद में कोई परहेज की जरूरत है?
वैक्सीन लेने के बाद आधा घंटा तक सेंटर पर आराम करें। अगर कोई समस्या हो तो नजदीकी एएनएम, आशा और स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क करें। वैक्सीन लेने से पहले और इसके बाद में भी मास्क पहनने, सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन करते रहें।

साइड इफेक्ट क्या होंगे?
सुरक्षित साबित होगी तभी इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। जैसा कि किसी वैक्सीन के मामले में होता है इसमें भी हल्का बुखार, इंजेक्शन की जगह पर दर्द आदि साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे तैयारी पूरी रखें।

कितनी डोज लेनी होगी और कितने दिनों के अंतराल पर?
दो डोज लेनी होगी, 28 दिनों के अंतराल पर।

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Vaccination will start soon after approval of two vaccines; Take or not at your will

भारत में कोवीशील्ड और कोवैक्सिन को इमरजेंसी अप्रूवल मिल गया है। अब जल्द ही कोरोना वैक्सीनेशन शुरू होगा। लोगों को वैक्सीन से संबंधित पूरी जानकारी मुहैया कराने के लिए सरकार ने कुछ सवाल-जवाब (FAQ) जारी किए हैं। इनके मुताबिक वैक्सीन लेना अनिवार्य नहीं है। यह आपकी मर्जी पर निर्भर होगा। यानी अगर सपा नेता अखिलेश यादव कह रहे हैं कि वे वैक्सीन नहीं लगवाएंगे, तो वैसा ऐसा कर सकते हैं। साथ ही दूसरे डोज के दो सप्ताह बाद शरीर में कोरोना के खिलाफ सुरक्षा देने लायक एंटी बॉडी तैयार होंगे। आगे पढ़ें सभी सवाल-जवाब… वैक्सीन कब से शुरू होगा? बहुत जल्द। दुनिया के 18 देशों में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके बाद अब जल्द ही भारत में यह प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट www.mohfw.gov.in पर विजिट करें। क्या सभी को कोरोना वैक्सीन एक साथ लगेगी? सरकार ने वैक्सीन की उपलब्धता के हिसाब से शुरुआती चरण के लिए कुछ प्राथमिकता समूहों की पहचान की है। पहले ग्रुप में हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल हैं। दूसरे समूह में 50 साल से ऊपर के लोग शामिल हैं। इसमें 50 से नीचे के वे लोग भी हैं, जो पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। यह मिलाकर 30 करोड़ लोग होते हैं, जिनका पहले चरण में वैक्सीनेशन किया जाएगा। क्या वैक्सीन लगवाना जरूरी है? नहीं। वैक्सीन लगवाना या न लगवाना, आपकी इच्छा पर निर्भर करेगा। हालांकि, यह सलाह दी जाती है कि जो भी वैक्सीन लें वे इसका पूरा कोर्स लें, ताकि उन्हें वायरस से पूरी सुरक्षा मिले। साथ ही उनसे संक्रमण फैलने की आशंका कम हो। वैक्सीन इतने कम समय में तैयार की गई है? क्या यह सुरक्षित होगी? सुरक्षा और असर पर नियामक संस्थाओं की स्वीकृति मिलने के बाद ही देश में किसी वैक्सीन की इजाजत दी जाएगी। देश की टॉप वैक्सीन साइंटिस्ट डॉ. गगनदीप कंग के मुताबिक, जल्दबाजी का यह मतलब नहीं है कि बिना जांच-पड़ताल के लिए रेगुलेटर ने इसकी मंजूरी दे दी है। रेगुलेटर ने इन वैक्सीन के रिजल्ट्स को जांचा-परखा है। उसके बाद ही इसे इमरजेंसी अप्रूवल दिया है। वहीं, ICMR के पूर्व प्रमुख डॉ. वीएम कटोच का कहना है कि वैक्सीन को अप्रूव करने की पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है। जिन्हें वैक्सीन लगेगी, उनकी आगे भी निगरानी होगी। अगर कोई साइड-इफेक्ट दिखता है तो उसका उपचार होगा। कुल मिलाकर यह समझ लीजिए कि यह सबकुछ प्रक्रिया का हिस्सा है। जल्द वैक्सीन आने का मतलब यह नहीं है कि लापरवाही बरती गई है। क्या उस व्यक्ति को भी वैक्सीन लगवानी चाहिए जिसे अभी कोरोना है (पुष्ट या आशंका)? नहीं। जिन्हें अभी कोरोना है या कोरोना होने की आशंका है, उन्हें लक्षण ठीक होने के 14 दिन बाद वैक्सीन लगेगी। अभी तो वे बाहर निकलेंगे तो संक्रमण फैलेगा। भारत बायोटेक की ज्वॉइंट एमडी सुचित्रा एल्ला के मुताबिक वैक्सीन का असर दिखने में 45 से 60 दिन भी लग सकते हैं। इसका मतलब है कि वैक्सीन लगने के बाद भी मास्क तो पहनना ही होगा।क्या कोरोना से रिकवर हो चुके लोगों को भी वैक्सीन लेनी होगी? हां। कोरोना से रिकवर हो चुके लोगों को भी वैक्सीन लेने की सलाह दी गई है। इससे उनका इम्यून सिस्टम और भी मजबूत होगा। उन्हें रीइंफेक्शन का खतरा कम होगा। दरअसल, किसे कोरोना रीइंफेक्शन हो सकता है और किसे नहीं, इस बात को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। भोपाल में कोरोना वार्ड में सेवाएं दे रहे डॉ. तेजप्रताप का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति में वायरल लोड कम रहा होगा तो उसमें एंटीबॉडी भी कम ही होगी। ऐसे में उसे रीइंफेक्ट होने का खतरा बना रहता है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि शरीर में एंटीबॉडी कितनी बनी है। कोवैक्सिन और कोवीशील्ड को चुने जाने की वजह क्या बनी है? कोवीशील्ड को ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर बनाई है। यह वैक्सीन भारत में पुणे में अदार पूनावाला का सीरम इंस्टीट्यूट बना रहा है। ब्राजील और ब्रिटेन में इसके फेज-3 ट्रायल्स हुए थे और इसमें यह 90% तक असरदार पाई गई है। इसी तरह कोवैक्सिन को भारतीय कंपनी भारत बायोटेक ने ICMR और NIV के साथ मिलकर बनाया है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरे वायरस के खिलाफ असरदार है। इससे कोरोना के नए स्ट्रेन सामने आने के बाद भी इसके असर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं, फेज-1 और फेज-2 के क्लीनिकल ट्रायल्स में यह काफी सुरक्षित और असरदार साबित हुई है। क्या भारत के पास वैक्सीन को स्टोर करने और इसे देशभर में लगवाने की क्षमता है? भारत दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीनेशन प्रोग्राम में से एक को चलाता है। भारत के पास पूरी क्षमता है। यहां हर साल 2.6 करोड़ नवजात और 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं को टीके लग रहे हैं। यह पहला मौका है जब भारत में वयस्कों को वैक्सीनेट किया जा रहा है। इसके लिए पूरे देश में ड्राई रन भी किया गया है, ताकि जब वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू हो, तब किसी तरह की दिक्कत न हो। कैसे पता चलेगा कि आपको वैक्सीन लगेगी या नहीं? जो वैक्सीन लगवाने के योग्य होंगे उन्हें मोबाइल पर मैसेज मिलेगा। इसमें जानकारी होगी कि उन्हें कहां और कब वैक्सीन लगाई जाएगी। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में असुविधा न हो, इसके लिए यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी। क्या स्वास्थ्य विभाग में रजिस्ट्रेशन कराए बिना वैक्सीन ले सकते हैं? नहीं। वैक्सीन लेने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद ही पता चलेगा कि वैक्सीन कहां लगेगी। रजिस्ट्रेशन के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट वैध होंगे? इनमें से किसी एक आई कार्ड और फोटो के साथ रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा: आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, श्रम मंत्रालय द्वारा जारी हेल्थ इंश्योरेंस स्मार्ट कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, एमपी, एमएलए या एमएलसी द्वारा जारी आधिकारिक पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक/पोस्टऑफिस पासबुक, पासपोर्ट, पेंशन डॉक्यूमेंट, केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी सर्विस कार्ड, वोटर आईडी। वैक्सीन लेने के लिए सेंटर पर कौन-सी आईडी दिखानी होगी? रजिस्ट्रेशन में जो आईडी कार्ड दिया गया उसे वैक्सीन लगवाने के लिए भी साथ ले जाना होगा। तारीख का पता कैसे चलेगा? ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद योग्य उम्मीदवार को मोबाइल पर मैसेज से जानकारी दी जाएगी। क्या वैक्सीन लेने वाले को कोई प्रमाण पत्र मिलेगा? वैक्सीन लेने के बाद पहले मैसेज द्वारा जानकारी दी जाएगी। कोर्स पूरा होने के बाद QR कोड आधारित सर्टिफिकेट रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। क्या डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को टीका लेना होगा? हां, वे ज्यादा जोखिम में हैं। उन्हें टीका लेने की जरूरत है। क्या सेंटर पर टीका लेने के पहले या बाद में कोई परहेज की जरूरत है? वैक्सीन लेने के बाद आधा घंटा तक सेंटर पर आराम करें। अगर कोई समस्या हो तो नजदीकी एएनएम, आशा और स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क करें। वैक्सीन लेने से पहले और इसके बाद में भी मास्क पहनने, सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन करते रहें। साइड इफेक्ट क्या होंगे? सुरक्षित साबित होगी तभी इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। जैसा कि किसी वैक्सीन के मामले में होता है इसमें भी हल्का बुखार, इंजेक्शन की जगह पर दर्द आदि साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे तैयारी पूरी रखें। कितनी डोज लेनी होगी और कितने दिनों के अंतराल पर? 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