बच्चों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं, उनकी बातों पर गौर करें तो बहुत कुछ सीख सकते हैंDainik Bhaskar


क्रिसचीना कारोन. साल 2020 तो बीत गया, लेकिन इसकी यादें सालों-साल तक रहेंगी। दुनिया में ऐसा कौन होगा, जिसके जेहन से 2020 उतरने वाला है? यह साल जितना डरावना रहा, उतना ही हमने इससे सीखा भी। बच्चों को लेकर पैरेंट्स की घिसी-पिटी और परंपरागत धारणाएं बदल गईं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोरोना के दौरान पैरेंट्स बच्चों के ज्यादा करीब आए हैं।

2020 के दौरान बच्चों से पैरेंट्स को बहुत कुछ सीखने को मिला। आमतौर पर पैरेंट्स को लगता है कि बच्चों में अनुभव की कमी होती है, ऐसे में उन्हें बहुत कुछ जानना और समझना चाहिए। इसी सोच के साथ जब पैरेंट्स बच्चों को समझाते और सिखाते हुए उन पर गुस्सा करते हैं और उन्हें डांटते-मारते हैं तो इस चीज का बच्चों पर बहुत ही गलत प्रभाव पड़ता है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बच्चों को सिखाने-समझाने के लिए उनकी सोच को पकड़ना जरूरी है। यह जानना जरूरी है कि उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं। जब तक आप पैरेंट्स के तौर पर बच्चों से क्लोज नहीं होंगे, आप उनकी चीजों को नहीं समझ पाएंगे और न ही उन्हें बेहतर गाइड कर पाएंगे। बीते साल कोरोना के चलते जो कुछ थोड़ा बहुत अच्छा हुआ, उसमें एक बात यह भी कि पैरेंट्स ने बच्चों से कुछ जरूरी चीजें सीखीं हैं।

बच्चों के सामने साधारण रहें

अमेरिकी महिला लारिसा ली के पति की कोरोना के चलते मौत हो गई थी। जाहिर है कि वह बहुत दुखी और तनाव में थीं। उन्होंने बताया कि उनके 5 बच्चे हैं। बच्चों ने उन्हें सिखाया कि वह उस चीज को सोचकर दुखी न हों, जिसे कोई कंट्रोल नहीं कर सकता। लारिसा छुट्टियों को पूरी तरह नजरअंदाज करना चाहती थीं, लेकिन बच्चों ने उन्हें छुट्टियों को एंजॉय करने के लिए प्रेरित किया।

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बच्चों को लेकर हमारा व्यवहार आम नहीं होता। हम उन्हें अंडरइस्टिमेट करते हैं और उनमें सुधारों की उम्मीद करते हैं। हमें लगता है कि उनकी बातें एमेच्योर हैं, जबकि ऐसा नहीं है। बच्चों में जो संवेदना या चीजों की समझ होती है, वह बहुत प्योर होती है।

बच्चे बस उतना तनाव लेते हैं, जितने की जरूरत होती है

आखिर क्या वजह है कि कम उम्र में ज्यादा तनाव नहीं होता? आम धारणा यह है कि बच्चों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, जिसके चलते वे ज्यादा तनाव नहीं लेते। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह धारणा ही गलत है। बच्चों को हम से ज्यादा फर्क पड़ता है और उन्हें भी तनाव होता है। लेकिन, बच्चे बस उतना ही तनाव लेते हैं, जितने की जरूरत होती है।

बच्चे बहुत ही कंस्ट्रक्टिव सोचते हैं, दुखी होकर ज्यादा तनाव में रहने के बजाए बच्चे सॉल्यूशन पर फोकस करते हैं। बच्चों के सामने भी हमें खुद को समान्य रखना चाहिए। उनकी बातों को गंभीरता से सुनें और उन पर गौर करें। इग्नोर करने से खुद का नुकसान है और बच्चों का कॉन्फिडेंस भी कम होता है।

बच्चों को ईमानदारी पसंद आती है

अमेरिकी महिला अन्ना थॉम्पसन 38 साल की हैं, उनके दो बच्चे हैं। अन्ना एक चाइल्ड केयर चलाती हैं। आमतौर वे बहुत नम्र और सहज रहती हैं। बीते साल उन्हें दो बार भयानक गुस्सा आया और पैनिक अटैक भी हुआ।

एक बार जब वे काफी गुस्से में थीं तो उनके दोनों बच्चे उनके पास थे। उन्होंने गुस्से में बच्चों को बहुत भला-बुरा कहा, लेकिन बच्चों ने अपनी मां की इस हरकत को माइंड नहीं किया। अन्ना कहती हैं कि उन्हें नहीं पता कि उनका गुस्सा जायज था या नहीं, लेकिन गुस्से में वह बस वही बोल रहीं थीं, जो उन्हें महसूस हो रहा था।

अन्ना कहती हैं कि ‘अगली सुबह मैं अपने बच्चों से मिली तो वे बहुत नॉर्मल थे और मेरे लिए आम दिनों से ज्यादा कंसर्न भी दिख रहे थे। उन्हें मालूम था कि मैं मानसिक तौर पर अच्छा महसूस नहीं कर रही हूं। मैंने बच्चों से पूछा कि उन्हें मेरी बात बुरी नहीं लगी? तो बच्चों ने कहा बिल्कुल नहीं।’

अन्ना के बड़े बच्चे ने उन्हें बताया कि उसे उनकी बात इसलिए बुरी नहीं लगी, क्योंकि उन्होंने जो कुछ भी बोला था, वह बहुत ईमानदारी से बोला था। मैंने सीखा कि बच्चों को ईमानदारी पसंद है।

बच्चों की इमेजिनेशन को कम नहीं आंकना चाहिए

अमेरिकी महिला कैरेन पोमराज 41 साल की हैं। उनके दो बच्चे हैं। कैरेन और उनके पति बीते साल अपने बच्चों की एक्टिविटीज को लेकर काफी दबाव महसूस करने लग गए थे। कैरेन कहती हैं कि उनके बच्चों को म्यूजियम, डांस एक्सरसाइज और पार्क में खेलने जाना बहुत पसंद है, लेकिन कोरोना ने सब पर पाबंदी लगा दी गई है।

कैरेन इस बात को लेकर परेशान थीं कि बच्चों की एक्टिविटीज बंद होने से उनकी मानसिक हेल्थ पर नेगेटिव असर हो सकता है। बच्चे घर पर खुद से कुछ नहीं कर सकते और उन्होंने कुछ प्लान करके खेलना भी नहीं सीखा है, लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा।

एक दिन कैरन के बच्चों के हाथ स्टोर रूम में रखे टॉयलेट पेपर का बंडल लग गया। उनके बच्चों ने उसे कलर किया और उसे असेंबल कर पार्किंग एरिया बना दिया। इस डमी पार्किंग में बच्चों ने पार्किंग के सही तरीके को शो किया था। कैरेन ने उस डमी को अपने लिविंग रूम में लगा दिया, इससे लिविंग रूम ज्यादा खूबसूरत लगने लगा।

अन्ना कहती हैं कि मैं अपने बच्चों की इमेजिनेशन क्षमता को हमेशा इग्नोर करती रही। मुझे लगता था कि वे खुद से कुछ नहीं कर सकते, लेकिन मैं गलत थी। 2020 में मैंने ये सीखा कि बच्चों की इमेजिनेशन को कम नहीं आंकना चाहिए।

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It is not good to ignore children, listen to their words, they can also teach you something.


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क्रिसचीना कारोन. साल 2020 तो बीत गया, लेकिन इसकी यादें सालों-साल तक रहेंगी। दुनिया में ऐसा कौन होगा, जिसके जेहन से 2020 उतरने वाला है? यह साल जितना डरावना रहा, उतना ही हमने इससे सीखा भी। बच्चों को लेकर पैरेंट्स की घिसी-पिटी और परंपरागत धारणाएं बदल गईं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोरोना के दौरान पैरेंट्स बच्चों के ज्यादा करीब आए हैं। 2020 के दौरान बच्चों से पैरेंट्स को बहुत कुछ सीखने को मिला। आमतौर पर पैरेंट्स को लगता है कि बच्चों में अनुभव की कमी होती है, ऐसे में उन्हें बहुत कुछ जानना और समझना चाहिए। इसी सोच के साथ जब पैरेंट्स बच्चों को समझाते और सिखाते हुए उन पर गुस्सा करते हैं और उन्हें डांटते-मारते हैं तो इस चीज का बच्चों पर बहुत ही गलत प्रभाव पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बच्चों को सिखाने-समझाने के लिए उनकी सोच को पकड़ना जरूरी है। यह जानना जरूरी है कि उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं। जब तक आप पैरेंट्स के तौर पर बच्चों से क्लोज नहीं होंगे, आप उनकी चीजों को नहीं समझ पाएंगे और न ही उन्हें बेहतर गाइड कर पाएंगे। बीते साल कोरोना के चलते जो कुछ थोड़ा बहुत अच्छा हुआ, उसमें एक बात यह भी कि पैरेंट्स ने बच्चों से कुछ जरूरी चीजें सीखीं हैं। बच्चों के सामने साधारण रहें अमेरिकी महिला लारिसा ली के पति की कोरोना के चलते मौत हो गई थी। जाहिर है कि वह बहुत दुखी और तनाव में थीं। उन्होंने बताया कि उनके 5 बच्चे हैं। बच्चों ने उन्हें सिखाया कि वह उस चीज को सोचकर दुखी न हों, जिसे कोई कंट्रोल नहीं कर सकता। लारिसा छुट्टियों को पूरी तरह नजरअंदाज करना चाहती थीं, लेकिन बच्चों ने उन्हें छुट्टियों को एंजॉय करने के लिए प्रेरित किया। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बच्चों को लेकर हमारा व्यवहार आम नहीं होता। हम उन्हें अंडरइस्टिमेट करते हैं और उनमें सुधारों की उम्मीद करते हैं। हमें लगता है कि उनकी बातें एमेच्योर हैं, जबकि ऐसा नहीं है। बच्चों में जो संवेदना या चीजों की समझ होती है, वह बहुत प्योर होती है। बच्चे बस उतना तनाव लेते हैं, जितने की जरूरत होती है आखिर क्या वजह है कि कम उम्र में ज्यादा तनाव नहीं होता? आम धारणा यह है कि बच्चों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, जिसके चलते वे ज्यादा तनाव नहीं लेते। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह धारणा ही गलत है। बच्चों को हम से ज्यादा फर्क पड़ता है और उन्हें भी तनाव होता है। लेकिन, बच्चे बस उतना ही तनाव लेते हैं, जितने की जरूरत होती है। बच्चे बहुत ही कंस्ट्रक्टिव सोचते हैं, दुखी होकर ज्यादा तनाव में रहने के बजाए बच्चे सॉल्यूशन पर फोकस करते हैं। बच्चों के सामने भी हमें खुद को समान्य रखना चाहिए। उनकी बातों को गंभीरता से सुनें और उन पर गौर करें। इग्नोर करने से खुद का नुकसान है और बच्चों का कॉन्फिडेंस भी कम होता है। बच्चों को ईमानदारी पसंद आती है अमेरिकी महिला अन्ना थॉम्पसन 38 साल की हैं, उनके दो बच्चे हैं। अन्ना एक चाइल्ड केयर चलाती हैं। आमतौर वे बहुत नम्र और सहज रहती हैं। बीते साल उन्हें दो बार भयानक गुस्सा आया और पैनिक अटैक भी हुआ। एक बार जब वे काफी गुस्से में थीं तो उनके दोनों बच्चे उनके पास थे। उन्होंने गुस्से में बच्चों को बहुत भला-बुरा कहा, लेकिन बच्चों ने अपनी मां की इस हरकत को माइंड नहीं किया। अन्ना कहती हैं कि उन्हें नहीं पता कि उनका गुस्सा जायज था या नहीं, लेकिन गुस्से में वह बस वही बोल रहीं थीं, जो उन्हें महसूस हो रहा था। अन्ना कहती हैं कि ‘अगली सुबह मैं अपने बच्चों से मिली तो वे बहुत नॉर्मल थे और मेरे लिए आम दिनों से ज्यादा कंसर्न भी दिख रहे थे। उन्हें मालूम था कि मैं मानसिक तौर पर अच्छा महसूस नहीं कर रही हूं। मैंने बच्चों से पूछा कि उन्हें मेरी बात बुरी नहीं लगी? तो बच्चों ने कहा बिल्कुल नहीं।’ अन्ना के बड़े बच्चे ने उन्हें बताया कि उसे उनकी बात इसलिए बुरी नहीं लगी, क्योंकि उन्होंने जो कुछ भी बोला था, वह बहुत ईमानदारी से बोला था। मैंने सीखा कि बच्चों को ईमानदारी पसंद है। बच्चों की इमेजिनेशन को कम नहीं आंकना चाहिए अमेरिकी महिला कैरेन पोमराज 41 साल की हैं। उनके दो बच्चे हैं। कैरेन और उनके पति बीते साल अपने बच्चों की एक्टिविटीज को लेकर काफी दबाव महसूस करने लग गए थे। कैरेन कहती हैं कि उनके बच्चों को म्यूजियम, डांस एक्सरसाइज और पार्क में खेलने जाना बहुत पसंद है, लेकिन कोरोना ने सब पर पाबंदी लगा दी गई है। कैरेन इस बात को लेकर परेशान थीं कि बच्चों की एक्टिविटीज बंद होने से उनकी मानसिक हेल्थ पर नेगेटिव असर हो सकता है। बच्चे घर पर खुद से कुछ नहीं कर सकते और उन्होंने कुछ प्लान करके खेलना भी नहीं सीखा है, लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। एक दिन कैरन के बच्चों के हाथ स्टोर रूम में रखे टॉयलेट पेपर का बंडल लग गया। उनके बच्चों ने उसे कलर किया और उसे असेंबल कर पार्किंग एरिया बना दिया। इस डमी पार्किंग में बच्चों ने पार्किंग के सही तरीके को शो किया था। कैरेन ने उस डमी को अपने लिविंग रूम में लगा दिया, इससे लिविंग रूम ज्यादा खूबसूरत लगने लगा। अन्ना कहती हैं कि मैं अपने बच्चों की इमेजिनेशन क्षमता को हमेशा इग्नोर करती रही। मुझे लगता था कि वे खुद से कुछ नहीं कर सकते, लेकिन मैं गलत थी। 2020 में मैंने ये सीखा कि बच्चों की इमेजिनेशन को कम नहीं आंकना चाहिए। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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