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आनंद-पंचांग / नववर्ष के अवसर पर जानें कि भगवान गणेश के जीवन में युवाओं के लिए क्या अद्भुत संदेश निहित हैं

नवान्न / कैलेंडर बनाने वालों ने जब कभी साल का बदलना तय किया तो वह इंसान के लिए खुशी का मौका बन गया। लेकिन कहने वाले तो ये भी कहते हैं कि कैलेंडर यानी साल बदलने से आखिर बदलता क्या है?

कविताएं / नया साल नई उमंग, नया जोश और एक नया ही माहौल लेकर हाजिर होता है। ये कविताएं नए साल को समर्पित हैं…

अंतचर्क्षु / दृष्टिहीन मनुष्यों के लिए ज्ञान का द्वार खोलने वाले लुई ब्रेल के सम्मान में हर वर्ष 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है। यह लेख उन्हीं लुई ब्रेल को आदरांजलि है…

देशराग / स्वामी विवेकानंद भारत की चिर तरुणाई के प्रतीक ही थे।जब उन्होंने शिकागो की धर्म संसद में भारतीयता का उद्‌घोष किया, तब भी उनकी अवस्था तीस वर्ष की ही थी और अल्पायु में ही उनका देहांत हो गया…

स्वर्ण-दृष्टि / आने वाला कल भविष्य है। उसे डर के काले चश्मे से न देखें। विश्वास करें कि आगामी कल अद्‌भुत ही होगा…

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आनंद-पंचांग / नववर्ष के अवसर पर जानें कि भगवान गणेश के जीवन में युवाओं के लिए क्या अद्भुत संदेश निहित हैं नए साल का श्रीगणेश करें भगवान गणेश की सीखों से, युवाओं के लिए विशेषरूप से लाभदायक हैं ये सीख नवान्न / कैलेंडर बनाने वालों ने जब कभी साल का बदलना तय किया तो वह इंसान के लिए खुशी का मौका बन गया। लेकिन कहने वाले तो ये भी कहते हैं कि कैलेंडर यानी साल बदलने से आखिर बदलता क्या है? बीते साल ने बहुत कुछ सिखाया, नए साल के नए संकल्प लेने से पूर्व इस नएपन और बदलाव की परख ज़रूरी है कविताएं / नया साल नई उमंग, नया जोश और एक नया ही माहौल लेकर हाजिर होता है। ये कविताएं नए साल को समर्पित हैं… नए साल का स्वागत करती दो प्रसिद्ध कवियों की कविताएं अंतचर्क्षु / दृष्टिहीन मनुष्यों के लिए ज्ञान का द्वार खोलने वाले लुई ब्रेल के सम्मान में हर वर्ष 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है। यह लेख उन्हीं लुई ब्रेल को आदरांजलि है… जो देख नहीं सकते थे उनके लिए ज्ञान का उजाला किया था ब्रेल ने देशराग / स्वामी विवेकानंद भारत की चिर तरुणाई के प्रतीक ही थे।जब उन्होंने शिकागो की धर्म संसद में भारतीयता का उद्‌घोष किया, तब भी उनकी अवस्था तीस वर्ष की ही थी और अल्पायु में ही उनका देहांत हो गया… शिकागो के रेलवे स्टेशन पर सोये थे स्वामी विवेकानंद, 30 की उम्र में धर्म संसद में दिया था ऐतिहासिक भाषण स्वर्ण-दृष्टि / आने वाला कल भविष्य है। उसे डर के काले चश्मे से न देखें। विश्वास करें कि आगामी कल अद्‌भुत ही होगा… शांत स्मृति के साथ अतीत को गले लगाना और कामना भरे प्रेम के साथ भविष्य का आलिंगन करना ही नया जीवन है आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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