कांग्रेस के दिग्गज नेता 4 बार मुख्यमंत्री रहे, राजनीति में KHAM थ्योरी लेकर आएDainik Bhaskar


कांग्रेस के दिग्गज नेता माधव सिंह सोलंकी (93) का शनिवार को निधन हो गया। वे चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। पीवी नरसिम्हा राव सरकार में वे विदेश मंत्री भी रहे। गुजरात की राजनीति में उन्होंने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम को लेकर एक नई रणनीति बनाई। इसे KHAM थ्योरी कहा जाता है। 1980 के दशक में सोलंकी इन्हीं 4 समुदायों को साथ लेकर भारी बहुमत से साथ सत्ता में आए।

सोलंकी के इस दांव से गुजरात का पटेल समुदाय उनसे दूर होता गया और भविष्य में भाजपा के साथ हो गया। सोलंकी पेशे से वकील और क्षत्रिय समुदाय का प्रतिनिधित्व करते थे। पहली बार 19977 में वे गुजरात के सीएम बने। 1980 के विधानसभा चुनाव में 182 में 141 सीटें जीतीं। तब भाजपा को सिर्फ 9 सीटें मिलीं थीं।

‘दशकों तक याद किए जाएंगे’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘माधव सिंह सोलंकी अजेय नेता थे। उन्होंने दशकों तक गुजरात की राजनीति में अहम किरदार निभाया। समाज को मजबूत करने के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे। उनके बेटे भरत सिंह सोलंकी से बात हुई है। पूरे परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।’

मोदी ने यह भी लिखा, ‘राजनीति के इतर सोलंकी को पढ़ने का भी शौक था। संस्कृति को लेकर भी वे जुनूनी थे। जब मैं उनसे मिलता था या बात होती थी, तो वे मुझे हालिया पढ़ी किताब के बारे में बताते थे। उनकी बातचीत को हमेशा संजोकर रखूंगा।’

तस्वीरों में सोलंकी

यह फोटो 1982 की है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ माधव सिंह सोलंकी।
फोटो 1985 की है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ माधव सिंह सोलंकी।
नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब सोलंकी एक बार हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे। मोदी उनका हालचाल लेने पहुंचे थे।
2016 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ माधव सिंह सोलंकी (दाएं)।
2017 में जब राहुल गांधी गुजरात के दौरे पर गए थे तो उन्होंने पार्टी के दिग्गज नेता यानी माधव सिंह सोलंकी से मुलाकात की थी।

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The veteran Congress leader has been the Chief Minister 4 times, bringing the KHAM Theory into politics

कांग्रेस के दिग्गज नेता माधव सिंह सोलंकी (93) का शनिवार को निधन हो गया। वे चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। पीवी नरसिम्हा राव सरकार में वे विदेश मंत्री भी रहे। गुजरात की राजनीति में उन्होंने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम को लेकर एक नई रणनीति बनाई। इसे KHAM थ्योरी कहा जाता है। 1980 के दशक में सोलंकी इन्हीं 4 समुदायों को साथ लेकर भारी बहुमत से साथ सत्ता में आए। सोलंकी के इस दांव से गुजरात का पटेल समुदाय उनसे दूर होता गया और भविष्य में भाजपा के साथ हो गया। सोलंकी पेशे से वकील और क्षत्रिय समुदाय का प्रतिनिधित्व करते थे। पहली बार 19977 में वे गुजरात के सीएम बने। 1980 के विधानसभा चुनाव में 182 में 141 सीटें जीतीं। तब भाजपा को सिर्फ 9 सीटें मिलीं थीं। ‘दशकों तक याद किए जाएंगे’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘माधव सिंह सोलंकी अजेय नेता थे। उन्होंने दशकों तक गुजरात की राजनीति में अहम किरदार निभाया। समाज को मजबूत करने के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे। उनके बेटे भरत सिंह सोलंकी से बात हुई है। पूरे परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।’ मोदी ने यह भी लिखा, ‘राजनीति के इतर सोलंकी को पढ़ने का भी शौक था। संस्कृति को लेकर भी वे जुनूनी थे। जब मैं उनसे मिलता था या बात होती थी, तो वे मुझे हालिया पढ़ी किताब के बारे में बताते थे। उनकी बातचीत को हमेशा संजोकर रखूंगा।’ Shri Madhavsinh Solanki Ji was a formidable leader, playing a key role in Gujarat politics for decades. He will be remembered for his rich service to society. Saddened by his demise. Spoke to his son, Bharat Solanki Ji and expressed condolences. Om Shanti. — Narendra Modi (@narendramodi) January 9, 2021तस्वीरों में सोलंकी यह फोटो 1982 की है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ माधव सिंह सोलंकी।फोटो 1985 की है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ माधव सिंह सोलंकी।नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब सोलंकी एक बार हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे। मोदी उनका हालचाल लेने पहुंचे थे।2016 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ माधव सिंह सोलंकी (दाएं)।2017 में जब राहुल गांधी गुजरात के दौरे पर गए थे तो उन्होंने पार्टी के दिग्गज नेता यानी माधव सिंह सोलंकी से मुलाकात की थी।आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

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